सौम्या चौरसिया ने जमानत के लिए लगाई याचिका, पूर्व सीएम के बेटै चैतन्य की जमानत के बाद राहत की उम्मीद
VINAY VERMA | Jan 06, 2026, 19:57 IST
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया शराब घोटाले में ईडी द्वारा की गई गिरफ्तार के विरोध में जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
Raipur. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया शराब घोटाले में ईडी द्वारा की गई गिरफ्तार के विरोध में जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका पर 7 जनवरी को सुनवाई प्रस्तावित है, जबकि 8 जनवरी को ईओडब्ल्यू के प्रोडक्शन वारंट को लेकर भी सुनवाई होनी है। इसी बीच 13 जनवरी से इस बहुचर्चित मामले का ट्रायल शुरू होना है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद यह माना जा रहा है कि अन्य आरोपियों को भी राहत मिल सकती है। अदालत, आरोपों की गंभीरता के साथ-साथ जांच की प्रगति और साक्ष्यों की मजबूती को ध्यान में रखकर फैसला ले रही है। ऐसे में सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
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ईडी ने कुछ दिनों पहले ही सौम्या चौरसिया को शराब घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में शराब नीति में हेरफेर कर एक संगठित सिंडिकेट के जरिए हजारों करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया। ईडी का दावा है कि इस सिंडिकेट में राजनेता, वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी शामिल थे, जिन्होंने मिलकर राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया।
ईडी की जांच के अनुसार, इस कथित घोटाले में अवैध कमीशन वसूली, डुप्लीकेट होलोग्राम, ओवररेटिंग और ऑफ-द-बुक्स लेन-देन जैसे तरीके अपनाए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि सौम्या चौरसिया सत्ता के केंद्र में रहते हुए इस पूरे तंत्र से वाकिफ थीं और कथित तौर पर फैसलों को प्रभावित करने में उनकी भूमिका रही।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का आकार करीब 3200 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ईडी ने इस मामले में एसीबी यानि एंटी करप्शन ब्यूरो में एफआईआर दर्ज कराई है। जांच के दौरान ईडी ने जिन बड़े नामों का जिक्र किया है, उनमें तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी ए. पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर प्रमुख हैं। आरोप है कि इन लोगों के सिंडिकेट के जरिए शराब कारोबार को नियंत्रित किया गया और अवैध कमाई की गई।
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सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका के सियासी मायने भी कम नहीं हैं। चैतन्य बघेल की जमानत के बाद कांग्रेस ने इसे सत्य की जीत बताया था, वहीं भाजपा ने कहा था कि जमानत और बरी होना दो अलग-अलग बातें हैं। अब सबकी नजरें 7 जनवरी की सुनवाई पर हैं। अगर सौम्या चौरसिया को जमानत मिलती है तो यह शराब घोटाले में फंसे अन्य आरोपियों के लिए भी एक मजबूत कानूनी आधार बन सकता है। वहीं, जमानत खारिज होने की स्थिति में ईडी की जांच को और मजबूती मिलने का दावा किया जाएगा। 13 जनवरी से शुरू होने वाला ट्रायल इस पूरे मामले की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
चैतन्य के जमानत से उम्मीद
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ईडी की गिरफ्तारी और आरोप
इन तरीकों का इस्तेमाल
3200 करोड़ का घोटाला और बड़े नाम
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