सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामले, स्पेशल लोक अदालत जाएगी छत्तीसगढ़ सरकार, विभागों को निर्देश
VINAY VERMA | Apr 27, 2026, 19:09 IST
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सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी विभागों को जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 21-23 अगस्त 2026 को स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
Raipur। सुप्रीम कोर्ट में बढ़ते लंबित मामलों ने अब राज्य सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव (CS) ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी विभागों को तुरंत एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।(नेशनल लोक अदालत) साफ कहा गया है कि ऐसे मामलों को चिन्हित किया जाए, जिनका निपटारा स्पेशल लोक अदालत में किया जा सकता है।
(छत्तीसगढ़ सरकार) मुख्य सचिव कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसे लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा करें और ऐसे प्रकरणों को अलग करें, जिनमें समझौते की संभावना है।
यह पहल Supreme Court के निर्देशों के बाद शुरू हुई है। सुप्रीम कोर्ट के सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग से प्राप्त पत्र और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के संदर्भ के आधार पर राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे साफ है कि शीर्ष अदालत लंबित मामलों को लेकर गंभीर है और राज्यों से ठोस कार्रवाई चाहती है।
सरकार ने प्रमुख सचिवों और विभागाध्यक्षों को जिम्मेदारी दी है कि वे महाधिवक्ता कार्यालय के साथ समन्वय बनाकर मामलों की सूची तैयार करें। इसके साथ ही स्टैंडिंग काउंसिल और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के जरिए मामलों को सही तरीके से प्रस्तुत करने को कहा गया है।
प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए गूगल फॉर्म के जरिए डेटा कलेक्शन की व्यवस्था भी की गई है। इससे सभी विभाग एक तय प्रारूप में जानकारी साझा कर सकेंगे और समय पर कार्रवाई हो सकेगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट है—कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ कम करना। खासकर वे मामले जो सालों से अटके हैं और जिनका समाधान आपसी सहमति से हो सकता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न सिर्फ कोर्ट का दबाव घटेगा, बल्कि संबंधित पक्षों को भी जल्द राहत मिल सकेगी।
मुख्य सचिव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को समय सीमा के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विभाग गंभीरता से काम करें, तो बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा संभव है। अब नजर इस बात पर है कि सरकारी मशीनरी इस अभियान को कितनी तेजी और ईमानदारी से अमल में लाती है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के करीब 900 से अधिक मामले पेंडिंग है। इसमें से सबसे अधिक स्कूल शिक्षा विभाग से है। इसके अलावा सर्विस मैटर को लेकर बड़ी संख्या में मामले हैं। सरकार चाहती है कि इन सभी को जल्द समाप्त किया जाए।
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यह पहल Supreme Court के निर्देशों के बाद शुरू हुई है। सुप्रीम कोर्ट के सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग से प्राप्त पत्र और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के संदर्भ के आधार पर राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे साफ है कि शीर्ष अदालत लंबित मामलों को लेकर गंभीर है और राज्यों से ठोस कार्रवाई चाहती है।
सरकार ने प्रमुख सचिवों और विभागाध्यक्षों को जिम्मेदारी दी है कि वे महाधिवक्ता कार्यालय के साथ समन्वय बनाकर मामलों की सूची तैयार करें। इसके साथ ही स्टैंडिंग काउंसिल और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के जरिए मामलों को सही तरीके से प्रस्तुत करने को कहा गया है।
प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए गूगल फॉर्म के जरिए डेटा कलेक्शन की व्यवस्था भी की गई है। इससे सभी विभाग एक तय प्रारूप में जानकारी साझा कर सकेंगे और समय पर कार्रवाई हो सकेगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट है—कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ कम करना। खासकर वे मामले जो सालों से अटके हैं और जिनका समाधान आपसी सहमति से हो सकता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इससे न सिर्फ कोर्ट का दबाव घटेगा, बल्कि संबंधित पक्षों को भी जल्द राहत मिल सकेगी।
मुख्य सचिव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को समय सीमा के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विभाग गंभीरता से काम करें, तो बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा संभव है। अब नजर इस बात पर है कि सरकारी मशीनरी इस अभियान को कितनी तेजी और ईमानदारी से अमल में लाती है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के करीब 900 से अधिक मामले पेंडिंग है। इसमें से सबसे अधिक स्कूल शिक्षा विभाग से है। इसके अलावा सर्विस मैटर को लेकर बड़ी संख्या में मामले हैं। सरकार चाहती है कि इन सभी को जल्द समाप्त किया जाए।
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