Tribal people को पसंद नहीं आ रहे नेताओं के चेहरे, दो चुनाव में आधी सीटों पर तीसरे नंबर पर रहा NOTA
Jitendra Shrivastava | Apr 05, 2024, 20:56 IST
THESOOTR
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के कोर एरिया में नोटा का प्रयोग ज्यादा देखा गया है। बस्तर में तो पिछले लोकसभा चुनाव में चालीस हजार से ज्यादा वोट नोटा को मिले। इस बार बीजेपी-कांग्रेस के सामने नोटा की भी चुनौती है। हार जीत का कम अंतर पर नोटा बड़ा प्रभाव डालेगा।
अरुण तिवारी, RAIPUR. सामान्य तौर पर आदिवासियों ( Tribal people ) को पिछड़ा माना जाता है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह वर्ग बहुत आगे है। इनकी राजनीतिक समझ भी आम लोगों की तरह ही परिपक्व है। हम यह क्यों कह रहे हैं इसके पीछे ठोस वजह है। छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है और यहां के आदिवासियों ने यह साबित किया है कि वे किसी से पीछे नहीं हैं। पिछले दो लोकसभा चुनावों में इस वर्ग के लोगों ने नेताओं को टाटा कर नोटा ( NOTA ) को पसंद किया है। यहां की 11 लोकसभा सीटों में से आधी सीटों पर नोटा तीसरे नंबर पर रहा है। यानी बीजेपी और कांग्रेस को छोड़ दें तो बाकी उम्मीदवारों के उपर नोटा ने अपनी जगह बनाई है।
बस्तर : 38772 वोट
कांकेर : 31917 वोट
राजनांदगांव : 32384 वोट
सरगुजा : 31104 वोट
रायगढ़ : 28480 वोट
ये खबरें भी पढ़ें...
Naxalites से पार पाने सरकार का नियद नेल्लानार, इससे होगा चुनाव में BJP का बेड़ा पार
रिश्वत का वीडियो वायरल तो मंत्री को आया बुखार और होटल बना सेटिंग का अड्डा
50 से ज्यादा कारोबारियों की लिस्ट तैयार , एक-एक कर आ रहा EOW का बुलावा
बस्तर : 41667 वोट
कांकेर : 26713 वोट
महासमुंद : 21241 वोट
राजनांदगांव : 19436 वोट
सरगुजा : 29265 वोट
नोटा का नक्सली कनेक्शन भी माना जाता है। जानकार कहते हैं कि नक्सली इलाकों में नोटा में ज्यादा वोट पड़ने का कारण नक्सली प्रभाव भी कुछ हद तक माना जा सकता है। जानकार कहते हैं कि 2013 में पहली बार नोटा का विकल्प आया था। यानी यदि आपको कोई पसंद नहीं है तो नोटा को वोट देकर अपनी राय बता सकते हैं। उस वक्त नक्सलियों ने फरमान जारी किया था कि किसी को वोट न करें। यही कारण था कि उस समय नोटा को तीन फीसदी वोट मिले। नक्सलियों के कोर एरिया में नोटा का प्रयोग ज्यादा देखा गया है। बस्तर में तो पिछले लोकसभा चुनाव में चालीस हजार से ज्यादा वोट नोटा को मिले। इस बार बीजेपी कांग्रेस के सामने नोटा की भी चुनौती है। यदि हार जीत का अंतर कम रहा तो नोटा बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
2014 में इन सीटों पर तीसरे नंबर पर रहा नोटा...
बस्तर : 38772 वोट
कांकेर : 31917 वोट
राजनांदगांव : 32384 वोट
सरगुजा : 31104 वोट
रायगढ़ : 28480 वोट
ये खबरें भी पढ़ें...
Naxalites से पार पाने सरकार का नियद नेल्लानार, इससे होगा चुनाव में BJP का बेड़ा पार
रिश्वत का वीडियो वायरल तो मंत्री को आया बुखार और होटल बना सेटिंग का अड्डा
50 से ज्यादा कारोबारियों की लिस्ट तैयार , एक-एक कर आ रहा EOW का बुलावा
2019 में इन सीटों पर तीसरे नंबर पर रहा नोटा...
बस्तर : 41667 वोट
कांकेर : 26713 वोट
महासमुंद : 21241 वोट
राजनांदगांव : 19436 वोट
सरगुजा : 29265 वोट
नोटा का नक्सली कनेक्शन
नोटा का नक्सली कनेक्शन भी माना जाता है। जानकार कहते हैं कि नक्सली इलाकों में नोटा में ज्यादा वोट पड़ने का कारण नक्सली प्रभाव भी कुछ हद तक माना जा सकता है। जानकार कहते हैं कि 2013 में पहली बार नोटा का विकल्प आया था। यानी यदि आपको कोई पसंद नहीं है तो नोटा को वोट देकर अपनी राय बता सकते हैं। उस वक्त नक्सलियों ने फरमान जारी किया था कि किसी को वोट न करें। यही कारण था कि उस समय नोटा को तीन फीसदी वोट मिले। नक्सलियों के कोर एरिया में नोटा का प्रयोग ज्यादा देखा गया है। बस्तर में तो पिछले लोकसभा चुनाव में चालीस हजार से ज्यादा वोट नोटा को मिले। इस बार बीजेपी कांग्रेस के सामने नोटा की भी चुनौती है। यदि हार जीत का अंतर कम रहा तो नोटा बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari