भूपेश कैंडीडेट सत्येंद्र और देवेंद्र समर्थक बंजारे का नामांकन होल्ड,धांधली की शिकायत
Arun Tiwari | Sept 07, 2026, 22:38 IST
भूपेश कैंडीडेट सत्येंद्र और देवेंद्र समर्थक
छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस चुनाव में धांधली की शिकायत के बाद सत्येंद्र और शैलेंद्र बंजारे का नामांकन होल्ड कर दिया गया है। केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आरोपों की जांच के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
Raipur : छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के सांगठनिक चुनावों के दौरान फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद चुनावी माहौल गरमा गया है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है। इस क्रम में प्रमुख दावेदार सत्येंद्र और शैलेंद्र का नामांकन पत्र फिलहाल होल्ड (स्थगित) कर दिया गया है।
दोनों नेताओं पर पैसे देकर अवैध तरीके से सदस्य बनाने और डिजिटल सदस्यता अभियान में धांधली करने की गंभीर शिकायतें मिली थीं। शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए चुनाव आयोग (इलेक्शन अथॉरिटी) ने दोनों दावेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तय समयसीमा के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सत्येंद्र, भूपेश बघेल गुट के उम्मीदवार हैं तो बंजारे के समर्थक विधायक देवेंद्र यादव हैं।
युवा कांग्रेस में विभिन्न पदों के लिए सदस्यता और चुनाव प्रक्रिया एक साथ डिजिटल माध्यम से संचालित की जाती है। इस प्रक्रिया में वही दावेदार मजबूत स्थिति में माना जाता है, जो सबसे अधिक वैध सदस्य अपने पक्ष में जोड़ता है। आरोप है कि सत्येंद्र और शैलेंद्र ने अपने समर्थन में वोट बढ़ाने और सदस्यता का आंकड़ा खड़ा करने के लिए निष्पक्ष चुनावी नियमों को ताक पर रख दिया।प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं पर निम्नलिखित आरोप लगे हैं
वित्तीय प्रलोभन: आवेदकों और आम युवाओं को पैसे का लालच देकर अपनी ओर से सदस्यता दिलाने का आरोप है।
फर्जी क्रेडेंशियल का इस्तेमाल: सदस्यता शुल्क का भुगतान व्यक्तिगत या अनधिकृत खातों के माध्यम से किया गया, जो चुनाव की गाइडलाइंस का उल्लंघन है।
डिजिटल हेरफेर: एक ही IP एड्रेस या सीमित डिवाइसेस से बल्क (थोक) में सदस्यता दर्ज कराई गई।
स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों ने प्रमाणों के साथ इसकी शिकायत केंद्रीय चुनाव समिति और चुनाव में नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर से की थी। प्राथमिक जांच में शिकायतों में प्रथम दृष्टया सत्यता पाए जाने के बाद आयोग ने तुरंत प्रभाव से दोनों का नामांकन रोक दिया।
जारी नोटिस में चुनाव प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि सत्येंद्र और शैलेंद्र निर्धारित समय सीमा में संतुष्ट करने वाला स्पष्टीकरण पेश नहीं करते हैं, तो उनका नामांकन पूरी तरह से रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा, उन पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबन और भविष्य में चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।नोटिस मिलने के बाद दोनों गुटों में खलबली मच गई है। दावेदारों के समर्थकों का कहना है कि वे सभी आरोपों का सिलसिलेवार जवाब तैयार कर रहे हैं और सदस्यता अभियान पूरी तरह निष्पक्षता से चलाया गया था। उनके अनुसार, यह विरोधियों द्वारा राजनीतिक षड्यंत्र के तहत रची गई साजिश है ताकि उन्हें चुनावी रेस से बाहर किया जा सके।
युवा कांग्रेस के चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में किसी भी प्रकार की धांधली या फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही युवा नेतृत्व आगे आए, जिन्हें धरातल पर कार्यकर्ताओं और युवाओं का सच्चा समर्थन हासिल है।इस घटनाक्रम के बाद से यूथ कांग्रेस चुनाव से जुड़े अन्य दावेदारों के बीच भी हड़कंप का माहौल है। चुनाव समिति अब बाकी प्रत्याशियों द्वारा बनाई गई सदस्यता सूची और डिजिटल डेटा की भी बारीकी से स्क्रूटनी (जांच) कर रही है।
सत्येंद्र और शैलेंद्र का नामांकन होल्ड होने से संबंधित क्षेत्रों और पदों के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यदि इन दोनों नेताओं का नामांकन रद्द होता है, तो दौड़ में शामिल अन्य प्रत्याशियों के लिए राह आसान हो सकती है। वहीं, अगर दोनों जांच में निर्दोष साबित होते हैं, तो उन्हें अपने समर्थकों के बीच अपनी साख दोबारा बहाल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। फिलहाल, सभी की निगाहें चुनाव प्राधिकरण को सौंपे जाने वाले उनके जवाब और उस पर आने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
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दोनों नेताओं पर पैसे देकर अवैध तरीके से सदस्य बनाने और डिजिटल सदस्यता अभियान में धांधली करने की गंभीर शिकायतें मिली थीं। शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए चुनाव आयोग (इलेक्शन अथॉरिटी) ने दोनों दावेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तय समयसीमा के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सत्येंद्र, भूपेश बघेल गुट के उम्मीदवार हैं तो बंजारे के समर्थक विधायक देवेंद्र यादव हैं।
क्या है पूरा मामला?
वित्तीय प्रलोभन: आवेदकों और आम युवाओं को पैसे का लालच देकर अपनी ओर से सदस्यता दिलाने का आरोप है।
फर्जी क्रेडेंशियल का इस्तेमाल: सदस्यता शुल्क का भुगतान व्यक्तिगत या अनधिकृत खातों के माध्यम से किया गया, जो चुनाव की गाइडलाइंस का उल्लंघन है।
डिजिटल हेरफेर: एक ही IP एड्रेस या सीमित डिवाइसेस से बल्क (थोक) में सदस्यता दर्ज कराई गई।
स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों ने प्रमाणों के साथ इसकी शिकायत केंद्रीय चुनाव समिति और चुनाव में नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर से की थी। प्राथमिक जांच में शिकायतों में प्रथम दृष्टया सत्यता पाए जाने के बाद आयोग ने तुरंत प्रभाव से दोनों का नामांकन रोक दिया।
नोटिस में मांगा गया जवाब
संगठन का रुख और कड़ा संदेश
चुनावी समीकरणों पर असर
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