70,80,90% सैलरी पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, अंडरटेकिंग लेकर देना होगा पूरा वेतन
Neel Tiwari | Sept 25, 2026, 18:37 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. 70, 80, 90% सैलरी विवाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को फिर राहत दी। कोर्ट ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। लेकिन वहां कोई रोक नहीं है। इसलिए कर्मचारियों को पूरा वेतन देना होगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
- कर्मचारियों को पहले तीन साल कम वेतन देने का नियम था।
- हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था को पहले ही गलत माना है।
- सरकार ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई।
- इसलिए हाई कोर्ट ने पूरा वेतन देने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट से मामले में कोई भी रोक नहीं है, इसलिए हाईकोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार सरकार को 100% वेतन और एरियर का भुगतान करना ही होगा। जस्टिस विशाल धगत की कोर्ट ने यह आदेश दिया।
मामला अक्षय श्रीवास्तव और अन्य कर्मचारियों ने लगाया था। इस मामले में अधिवक्ता रिजवान खान ने पैरवी की। कर्मचारियों ने नियुक्ति की 70 80 90 प्रतिशत सैलरी शर्त को चुनौती दी थी।
इस शर्त में पहले तीन साल कम वेतन मिलता था। पहले साल 70% वेतन देने का प्रावधान था। दूसरे साल 80% वेतन दिया जाता था। तीसरे साल 90% वेतन देने की व्यवस्था थी। चौथे साल से पूरा वेतन मिलता था।
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी करना होगा भुगतान
राज्य के वकील ने डायरी नंबर 20778/2026 का हवाला दिया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है। सरकार ने कहा कि इसी मुद्दे पर चुनौती लंबित है। इसलिए अभी हाई कोर्ट को फैसला नहीं करना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों के अधिवक्ता रिजवान खान ने इसका जवाब दिया।
रिजवान खान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। हाई कोर्ट ने इसी तथ्य को अहम माना और हाईकोर्ट के पिछले आदेश के पालन का निर्देश दिया।
रोक नहीं है तो पिछले आदेश का पालन होगा
यह आदेश डब्ल्यूए 2977/2025 में दिया गया था। मामले में इंदौर नगर निगम और विनीता तिवारी पक्ष थे। उस आदेश में कम वेतन की शर्त गलत मानी गई थी। कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि का पूरा वेतन देने कहा गया था।
अंडरटेकिंग लेकर पूरा भुगतान करना होगा
कर्मचारी अभी मिलने वाले लाभ का उपयोग कर सकेंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सरकार जीतती है तो स्थिति बदलेगी। ऐसी स्थिति में राशि वापस करनी होगी
इसी शर्त के साथ भुगतान करने का रास्ता खुला है। यानी सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बाद भी कर्मचारियों को 100% सैलरी का लाभ मिलेगा। रोक मिलने तक हाई कोर्ट का आदेश लागू रहेगा।
आखिर 70, 80, 90% सैलरी का विवाद क्या है
पहले साल 70% वेतन देने की बात थी। दूसरे साल यह भुगतान 80% किया गया।।तीसरे साल भुगतान 90% तक पहुंचता था। चौथे साल से पूरा वेतन मिलता था। इस व्यवस्था को लेकर कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया। इसके बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा।
हाई कोर्ट ने पहले क्या फैसला दिया था
हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। अदालत ने इसे कानून की नजर में गलत माना। इसके बाद पूरे वेतन के भुगतान के निर्देश आए। पहले तीन वर्षों के बकाया भी एरियर के तौर पर देने के निर्देश हुए। इसी फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
सरकार की सुप्रीम कोर्ट वाली चुनौती का असर
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को है और अभी किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। यही बात ताजा हाई कोर्ट आदेश में अहम बनी।
कोर्ट ने लंबित मामले को भुगतान रोकने का आधार नहीं माना।।इससे कर्मचारियों के भुगतान का रास्ता खुला है। सरकार को अब आदेश के अनुसार भुगतान करना होगा। भुगतान से पहले अंडरटेकिंग ली जा सकती है।
कर्मचारियों के लिए ताजा आदेश का मतलब
कर्मचारियों को अपने नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड देखने होंगे। उन्हें लागू आदेश के अनुसार दावा करना होगा।ताजा आदेश ने एक बात साफ कर दी है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होना पर्याप्त नहीं है। रोक नहीं है तो हाई कोर्ट आदेश लागू रहेगा। यही इस आदेश का सबसे अहम संदेश है।
सरकार को फिलहाल भुगतान से राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आगे स्थिति बदल सकता है। फिलहाल हाई कोर्ट ने अपने आदेश को लागू माना है। यही वजह है कि कर्मचारियों के लिए आदेश अहम है।
ताजा आदेश में कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की चुनौती जारी रहेगी, लेकिन रोक मिलने तक भुगतान नहीं रोका जा सकता। इस तरह 70, 80, 90% सैलरी विवाद फिर चर्चा में है। कर्मचारियों के लिए यह आदेश राहत की तरह आया है। अब आगे की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर रहेगी।
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