CJP, छात्र आंदोलन को बताया राष्ट्र विरोधी, BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के बयान पर वकीलों में बढ़ा विरोध
Neel Tiwari | Jul 25, 2026, 12:45 IST
BCI चेयरमैन मनन मिश्रा
छात्रों के विरोध प्रदर्शन को एक ओर जहां पूरे देश में अधिवक्ताओं का भी समर्थन मिल रहा है, वहीं BCI चेयरमैन ने आंदोलन में देश विरोधी ताकतों के शामिल होने की बात कह दी। कई वकीलों ने उनके बयान और BCI के लेटरहेड के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने छात्र प्रदर्शनों पर एक बयान जारी किया है।
- बयान में प्रदर्शनों में देश विरोधी ताकतों के शामिल होने का दावा किया गया है।
- बयान BCI के लेटरहेड पर जारी होने से नया विवाद खड़ा हो गया है।
- कई वकीलों ने इसे चेयरमैन की निजी राय बताया और विरोध किया है।
- सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर कानूनी समुदाय में बहस तेज हो गई है।
छात्र आंदोलन पर बयान से बढ़ा विवाद
BCI के लेटरहेड पर जारी हुआ बयान
साथ ही विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान, चीन तथा बांग्लादेश जैसे देशों के इशारे पर मीडिया अभियान चलने की बात भी कही गई है। हालांकि, बयान में इन दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है। इसी कारण यह बयान कानूनी समुदाय के एक हिस्से के निशाने पर आ गया है।
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वेबसाइट पर नहीं मिला प्रेस नोट
वकीलों ने लेटरहेड के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
कानूनी समुदाय के कई सदस्यों का कहना है कि इससे यह संदेश जाता है कि पूरी बार काउंसिल की यही आधिकारिक राय है, जबकि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर संस्थागत और व्यक्तिगत राय में स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
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सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आई नाराजगी
कुछ वकीलों ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का अधिकार है। उनके अनुसार किसी भी आंदोलन का मूल्यांकन तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
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कानूनी समुदाय में उठे कई अहम सवाल
कई अधिवक्ताओं का कहना है कि बार काउंसिल जैसी संस्था का दायित्व सभी वकीलों का प्रतिनिधित्व करना है। इसलिए सार्वजनिक बयान देते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।
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मामला केवल बयान का नहीं, संस्थागत मर्यादा का भी
फिलहाल इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चा जारी है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया या उसके पदाधिकारी इस विवाद पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हैं या नहीं।
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