स्कूल बिल्डिंग पर चला बुलडोजर, कांग्रेस ने दिल्ली में उठाए सवाल, ओवैसी ने किया ट्वीट

बैतूल में नईम के स्कूल तोड़ने के मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और कलेक्टर पर सवाल उठाए हैं।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • बैतूल में नईम का स्कूल तोड़ने की कार्रवाई की गूंज अब दिल्ली तक पहुंच गई है।

  • कार्रवाई के विरोध में देश के कई बड़े नेताओं ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

  • कांग्रेस ने सरकार और कलेक्टर की मंशा पर सवाल उठाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला।

  • विपक्ष ने कलेक्टर पर किसी बाहरी दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।

  • प्रशासन और विपक्ष के बीच यह मामला देश भर में तीखी बहस का विषय बना है।

News In Detail

Betul News.बैतूल जिले में नईम के स्कूल तोड़ने का मामला दिल्ली तक पहुंच गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर देश के कई बड़े नेताओं ने नाराजगी जताई है।

इसी बीच कांग्रेस ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मध्य प्रदेश सरकार और बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि आखिर कलेक्टर पर किसका और कैसा दबाव था। फिलहाल यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानें क्या है पूरा मामला ...  

क्या था पूरा मामला?

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक शख्स, अब्दुल नईम, अपने खर्चे से एक स्कूल बना रहा था। उसने लगभग 20 लाख रुपए खर्च कर एक स्कूल भवन का निर्माण शुरू किया था।

गांव की आबादी करीब दो हजार है, जिसमें केवल तीन मुस्लिम परिवार हैं। तीन दिन पहले, अचानक अफवाह फैलने लगी कि वह अवैध मदरसा चला रहा है, जबकि भवन अभी अधूरा था और कोई कक्षा नहीं चल रही थी।

नईम ने 30 दिसंबर को स्कूल शिक्षा विभाग में नर्सरी से 8वीं तक स्कूल खोलने का आवेदन किया था और सभी जरूरी कागजात भी पूरे थे। ग्राम पंचायत ने 11 जनवरी को नोटिस जारी कर भवन गिराने का आदेश दे दिया। 

जब नईम पंचायत पहुंचा, तो उसे कहा गया कि आवेदन स्वीकार नहीं होगा। इसके बाद 12 जनवरी को पंचायत ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी दे दिया। सरपंच ने कहा कि उन्हें कभी भी कोई शिकायत नहीं मिली थी कि वहां मदरसा चल रहा है।

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कांग्रेस ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस

इस मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एमपी सरकार पर साधा निशाना है। 

इन नेताओं ने भी दी प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने यह गंभीर मुद्दा उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले की शिकायत की है। इमरान ने कहा कि मुस्लिम व्यक्ति का स्कूल 'ऊपर से दबाव' बताकर गिरा दिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल पूछे।

इमरान ने प्रधानमंत्री से भी मुख्यमंत्री के प्रशासन की कार्यप्रणाली देखने का सीधा आग्रह किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस स्कूल गिराने की कार्रवाई पर गुस्सा जताया है। उन्होंने कहा कि दलित और आदिवासी बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। सुप्रिया के अनुसार मुसलमान द्वारा पढ़ाने की पहल के कारण यह स्कूल ध्वस्त हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सरकार समाज को जानबूझकर बर्बादी की ओर धकेल रही है।

पवन खेड़ा ने उठाए सवाल

घटना के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर 2 मिनट 44 सेकंड का वीडियो ट्वीट जारी किया। उन्होंने कहा शिक्षित बनो, संघर्ष करो- यह बाबा साहब का मूल मंत्र है, जिसे संघ और उसके समर्थक संगठनों ने कभी स्वीकार नहीं किया। पिछले दस सालों में उन्होंने सरकारी तंत्र का उपयोग कर खास तौर पर दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर हमला किया है।

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