भीमबेटका में बनेगा देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम, 19 करोड़ मंजूर

भीमबेटका में 19 करोड़ की लागत से देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम बनेगा। यह प्रोजेक्ट 2028 तक तैयार होगा। इसमें AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके आदिमानव के इतिहास को पूरी तरह से जीवंत किया जाएगा।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • भीमबेटका में 19 करोड़ की लागत से देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क बनेगा।

  • कंक्रीट की बजाय प्राकृतिक और अस्थायी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा।

  • इस परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके इतिहास को जीवंत किया जाएगा।

  • दुर्गम क्षेत्रों के दुर्लभ शैलचित्रों की प्रतिकृतियां भी यहां देखी जा सकेंगी।

News In Detail

पुरातत्व और इतिहास के शौकीनों के लिए मध्य प्रदेश से एक शानदार खबर आई है। विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर भीमबेटका अब एक नए रूप में नजर आने वाली है।

यहां आदिमानव के जीवन को दिखाने वाले शैलचित्रों को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम बनाया जा रहा है। इस परियोजना में 19 करोड़ रुपए लगेंगे।

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2028 तक पूरा होगा निर्माण कार्य

इसकी डिटेल्ड परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सचिव, IAS अधिकारी इलैया राजा टी. ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे  सदियों पुराना इतिहास सैलानियों की आंखों के सामने जीवंत हो उठेगा।

कंक्रीट के जंगल नहीं गुफाओं जैसा होगा अहसास

अक्सर जब हम म्यूजियम के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी कंक्रीट की इमारतें आती हैं, लेकिन भीमबेटका (भीमबेटका गुफाएं) का यह म्यूजियम कुछ अलग होगा।

मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के डायरेक्टर प्रशांत बघेल के मुताबिक, इसे पारंपरिक भवन के बजाय अस्थायी ढांचे और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनाया जाएगा। इसका मकसद यह है कि पर्यटकों को वही अनुभव मिले, जैसा हजारों साल पहले शैलाश्रयों में रहने वाले आदिमानव महसूस करते थे।

भोपाल भीम बेटका | भोपाल संभाग वेबसाइट | भारत

एक ही जगह 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद

भीमबेटका का विस्तार लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में है और यहां 7 पहाड़ियों पर 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद हैं। कई शैलचित्र (rock painting) इतने गहरे और दुर्गम जंगलों में हैं कि आम पर्यटक वहां तक नहीं पहुंच पाते। इस म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां जावरा, विनयका, भोंरावली और लाखा जुआर जैसे दूरदराज के इलाकों में मौजूद दुर्लभ चित्रों की हूबहू प्रतिकृतियां (Replicas) प्रदर्शित की जाएंगी।

चित्र:Bhimbetka Cave Paintings.jpg - विकिपीडिया

देश भर के रॉक आर्ट का बनेगा संगम केंद्र

यह म्यूजियम सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। यह देश में अपनी तरह का पहला ऐसा केंद्र होगा जहां भारत के अन्य हिस्सों में पाए गए चुनिंदा और महत्वपूर्ण शैलचित्रों की जानकारी भी एक ही स्थान पर मिलेगी। यानी अब सैलानियों को पूरे भारत के प्रागैतिहासिक (Prehistoric) कला गौरव को समझने के लिए अलग-अलग राज्यों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

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मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड IAS अधिकारी इलैया राजा टी. मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग rock painting भीमबेटका भीमबेटका गुफाएं
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