/sootr/media/media_files/2026/02/05/bhimbetka-rock-art-eco-park-museum-2026-02-05-15-54-55.jpg)
News In Short
भीमबेटका में 19 करोड़ की लागत से देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क बनेगा।
कंक्रीट की बजाय प्राकृतिक और अस्थायी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके इतिहास को जीवंत किया जाएगा।
दुर्गम क्षेत्रों के दुर्लभ शैलचित्रों की प्रतिकृतियां भी यहां देखी जा सकेंगी।
News In Detail
पुरातत्व और इतिहास के शौकीनों के लिए मध्य प्रदेश से एक शानदार खबर आई है। विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर भीमबेटका अब एक नए रूप में नजर आने वाली है।
यहां आदिमानव के जीवन को दिखाने वाले शैलचित्रों को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूजियम बनाया जा रहा है। इस परियोजना में 19 करोड़ रुपए लगेंगे।
/sootr/media/post_attachments/www.traveljunoon.com/wp-content/uploads/2020/07/pjimage-41-1-912547.jpg?fit=700%2C415&ssl=1)
2028 तक पूरा होगा निर्माण कार्य
इसकी डिटेल्ड परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सचिव, IAS अधिकारी इलैया राजा टी. ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सदियों पुराना इतिहास सैलानियों की आंखों के सामने जीवंत हो उठेगा।
कंक्रीट के जंगल नहीं गुफाओं जैसा होगा अहसास
अक्सर जब हम म्यूजियम के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी कंक्रीट की इमारतें आती हैं, लेकिन भीमबेटका (भीमबेटका गुफाएं) का यह म्यूजियम कुछ अलग होगा।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के डायरेक्टर प्रशांत बघेल के मुताबिक, इसे पारंपरिक भवन के बजाय अस्थायी ढांचे और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनाया जाएगा। इसका मकसद यह है कि पर्यटकों को वही अनुभव मिले, जैसा हजारों साल पहले शैलाश्रयों में रहने वाले आदिमानव महसूस करते थे।
![]()
एक ही जगह 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद
भीमबेटका का विस्तार लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में है और यहां 7 पहाड़ियों पर 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद हैं। कई शैलचित्र (rock painting) इतने गहरे और दुर्गम जंगलों में हैं कि आम पर्यटक वहां तक नहीं पहुंच पाते। इस म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां जावरा, विनयका, भोंरावली और लाखा जुआर जैसे दूरदराज के इलाकों में मौजूद दुर्लभ चित्रों की हूबहू प्रतिकृतियां (Replicas) प्रदर्शित की जाएंगी।
/sootr/media/post_attachments/wikipedia/commons/5/5d/Bhimbetka_Cave_Paintings-824819.jpg)
देश भर के रॉक आर्ट का बनेगा संगम केंद्र
यह म्यूजियम सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। यह देश में अपनी तरह का पहला ऐसा केंद्र होगा जहां भारत के अन्य हिस्सों में पाए गए चुनिंदा और महत्वपूर्ण शैलचित्रों की जानकारी भी एक ही स्थान पर मिलेगी। यानी अब सैलानियों को पूरे भारत के प्रागैतिहासिक (Prehistoric) कला गौरव को समझने के लिए अलग-अलग राज्यों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
ये खबरें भी पढ़ें...
आप भीमबेटका गए क्या? इतिहास की गुफाओं में सदियों से छिपी है हमारे पूर्वजों की दास्तां
हजारों साल पुरानी भीमबेटका की गुफा जहां एक जगह है 700 गुफाएं, जानें क्या है इनका रहस्य
कॉलर पकड़कर ASP के केबिन तक प्रेमी को घसीट लाई युवती, अफसरों में मच गया हड़कंप!
सरकारी बंगलों में कर्मचारी नहीं जमा पाएंगे पैर, मकान खाली न करने पर लगेगी 10 गुना पेनल्टी
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us