भोपाल में 3 लाख कारतूस गायब, बकरी फार्म में 6 साल से चल रही थी शूटिंग एकेडमी, बुखारी ने 'मछली' को बेची थी गन

Manish Kumar | Aug 29, 2025, 18:44 IST
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शाहिद मछली (इनसेट में) (The Sootr)

भोपाल में खेल के नाम पर हथियारों की अवैध गतिविधियां उजागर हुईं, जिसमें तीन लाख से ज्यादा कारतूस गायब हुए। जांच में सामने आया कि कुछ शूटर्स प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लेते हुए भी कारतूस लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

BHOPAL. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में खेल के नाम पर हथियारों का खेला उजागर हुआ है। आशंका है कि स्पोर्ट्स कोटे के नाम पर बुलेट्स का अवैध कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस खुलासे ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तीन लाख से ज्यादा कारतूसों के गायब होने का है।

भोपाल में हर साल तकरीबन 30 लाख 95 हजार कारतूस शूटर्स को जारी होते हैं। ये कारतूस खिलाड़ियों को प्रैक्टिस और प्रतियोगिता के नाम पर जारी किए जाते हैं, लेकिन उनका उपयोग कहां हुआ, इसका कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है। न कारतूसों के खोखों की गिनती हो रही है और न ही प्रैक्टिस का पूरा ब्यौरा लिया जा रहा है।

अब इसी ढिलाई का नतीजा है कि लाखों कारतूस बाजार और अपराध जगत तक पहुंचने की आशंका है। मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। कारतूस लेने वालों की पहचान की जा रही है। अब शूटर्स को पुराने खोखे जमा कराने के बाद ही नए कारतूस (बुलेट्स) दिए जाएंगे।

शाहिद को 17 लाख में बेची थी गन

जांच की सबसे चौंकाने वाली परत तब खुली, जब पता चला कि भोपाल के परवलिया इलाके में बकरी फार्म के भीतर छह साल से शूटिंग एकेडमी संचालित हो रही थी। यहां आर्यन शूटिंग एकेडमी के नाम से प्रैक्टिस कराई जा रही थी।

पुलिस ने इस मामले में एकेडमी के संचालक सैयद शारिक बुखारी पर केस दर्ज किया है। बुखारी और उसके परिवार के चार लोगों के पास शूटिंग के लाइसेंस हैं। वर्ष 2017 में उसने विदेश से तीन लाख में सेमी ऑटोमेटिक गन खरीदी थी।

इसी गन को उसने 2022 में गैर कानूनी तरीके से शाहिद मछली को 17 लाख रुपए में बेचा था। गौरतलब है कि भोपाल में लव जिहाद और ड्रग्स सप्लाई करने के आरोप में शाहिद और मछली परिवार पर कार्रवाई की गई है। इस परिवार के सदस्य गिरफ्तार भी किए गए हैं।

जांच में एक और खास तथ्य सामने आया है। जिन लोगों को एक-एक लाख कारतूस आवंटि​त किए गए हैं, उनमें से ज्यादातर पुराने भोपाल से ताल्लुख रखते हैं। इनमें शाहजहानाबाद के अनवर हसन खान, सारिम खान, साहिब उर रहमान, इमाद शाह, पीयूष गोगिया और जहांगीराबाद का तहा अख्तर शामिल है।

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खिलाड़ी या कारतूस व्यापारी?

पड़ताल में सामने आया कि कई शूटर्स प्रतियोगिताओं में भाग ही नहीं लेते, लेकिन हर साल हजारों-लाखों की तादाद में कारतूस ले रहे हैं। प्रशासन ने जब 77 शूटर्स से पांच साल का हिसाब मांगा तो 3 लाख कारतूसों का रिकॉर्ड ही गायब मिला। अब पूरे 10 साल का ब्यौरा खंगालने का आदेश दिया गया है।



नियम के मुताबिक, साधारण लाइसेंसधारी साल में केवल 200 कारतूस ले सकता है, लेकिन नेशनल रायफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) से प्रमाणित खिलाड़ी अपनी रैंकिंग के अनुसार 15 हजार से लेकर 1 लाख कारतूस तक ले सकते हैं। सवाल यह है कि अगर किसी खिलाड़ी को 1 लाख कारतूस मिले, तो उसे रोजाना औसतन 274 गोलियां चलानी होंगी, क्या यह संभव है? भोपाल में अवैध शूटिंग एकेडमी | अवैध हथियार | शूटिंग कारतूस

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खतरनाक हथियारों की भरमार

जांच में पता चला है कि भोपाल के 77 शूटर्स के पास 150 से ज्यादा बंदूकें दर्ज हैं। इनमें से 23 के पास ऐसी रायफलें हैं, जिनका किसी भी प्रतियोगिता से कोई लेना-देना नहीं। शहर में 18 शूटर्स के पास 30.06 बोर की 24 रायफलें हैं, जिनकी मारक क्षमता 500 मीटर तक है और जिनका प्रयोग अक्सर शिकार में होता है। इससे माना जा रहा है कि खेल की आड़ में खुलेआम शिकार और संभावित अपराध का नेटवर्क तैयार किया जा रहा था।

सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, गन हाउस भी इस गोरखधंधे में शामिल मिले। शाह आर्मोरी पर जांच में स्टॉक और बिक्री रजिस्टर में भारी गड़बड़ी पाई गई। न आधार नंबर, न मोबाइल नंबर और ऊपर से ओवरराइटिंग। मरम्मत का लाइसेंस भी 2017 से रिन्यू नहीं था। नतीजा, कलेक्टर ने लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश कर दी है।

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चौंकाने वाले खुलासे

जांच में सामने आया कि कई खिलाड़ियों ने कभी कारतूस खरीदे ही नहीं, फिर भी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। बुजुर्ग और बीमार खिलाड़ियों के नाम पर भी हजारों कारतूस जारी हुए। कुछ ने घरों में बोरे भरकर खोखे दिखा दिए और इसे ही हिसाब-किताब बताया।

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि अब पुराने खोखे जमा करने पर ही नया कोटा मिलेगा। हिसाब न देने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। हर खिलाड़ी से 10 साल का रिकॉर्ड खंगालने के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई गई है। भोपाल में 3 लाख कारतूस गायब

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