ड्रेसर से बाबू, फार्मासिस्ट से प्रभारी; राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

Ramanand Tiwari | Jan 13, 2026, 23:10 IST
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Dresser to Babu, Pharmacist to in-charge  questions on the health system of the capital
Photograph: (the sootr)

भोपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सीएमएचओ कार्यालय में कर्मचारियों की योग्यता और पद को नजरअंदाज कर कार्यों की जिम्मेदारी दी जा रही है।

NEWS IN SHORT

  • कर्मचारियों को उनके पद और योग्यता के बिना नए कार्य सौंपे जा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं।
  • ड्रेसर को बाबू के काम में लगाने का आदेश, जो मरीजों की देखभाल के लिए नियुक्त था।
  • फार्मासिस्ट को प्रशासनिक कार्यों का प्रभारी बनाने पर सवाल, क्योंकि उसे इस क्षेत्र का अनुभव नहीं है।
  • पीसीपीएनडीटी जैसे संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी एक नेत्र सहायक को दी गई, जो अप्रत्याशित है।
  • एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि अयोग्य कर्मचारियों से काम लेने पर आंदोलन किया जाएगा।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. राजधानी भोपाल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पहले ही निजी अस्पतालों की मनमानी और सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं। अब सीएमएचओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आरोप है कि सीएमएचओ कार्यालय में वर्षों से पद और योग्यता को नजरअंदाज कर कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। तकनीकी पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को प्रशासनिक और संवेदनशील शाखाओं की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

नियमों की अनदेखी या मजबूरी?

स्वास्थ्य विभाग के भीतर यह चर्चा तेज है कि जिन कर्मचारियों को मरीजों की सेवा के लिए नियुक्त किया गया था, उनसे अब फाइलें, लाइसेंस और निरीक्षण से जुड़े कार्य करवाए जा रहे हैं।

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ड्रेसर से करवाई जा रही बाबूगिरी

जेपी अस्पताल में पदस्थ एक ड्रेसर को सीएमएचओ कार्यालय में बाबू के काम में लगाने का आदेश जारी हुआ है। मरीजों की ड्रेसिंग और प्राथमिक देखभाल के लिए नियुक्त कर्मचारी को अचानक प्रशासनिक काम सौंपना कई सवाल खड़े करता है।

फार्मासिस्ट बने नर्सिंग होम शाखा प्रभारी

सीएमएचओ कार्यालय में एक फार्मासिस्ट को नर्सिंग होम शाखा का प्रभारी बना दिया गया है। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी के पास न तो प्रशासनिक अनुभव है और न ही लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़ी पर्याप्त जानकारी।

नेत्र सहायक के हाथ में पीसीपीएनडीटी जैसी शाखा

इतना ही नहीं, एक नेत्र सहायक को पीसीपीएनडीटी (भ्रूण लिंग परीक्षण रोकथाम) जैसी संवेदनशील शाखा की जिम्मेदारी देने की बात सामने आई है। यह शाखा सीधे कानून, निरीक्षण और निजी अस्पतालों की जांच से जुड़ी होती है।

एनएसयूआई का हमला: सीएमएचओ जिम्मेदार

एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के आदेशों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अयोग्य कर्मचारियों से संवेदनशील कार्य कराना नियमों का खुला उल्लंघन है।

योग्यता को ताक पर रखकर हो रहा काम

रवि परमार के अनुसार, तकनीकी सेवाओं के लिए नियुक्त कर्मचारियों से प्रशासनिक और लाइसेंस से जुड़े कार्य करवाए जा रहे हैं। इससे न केवल काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता भी कमजोर हो रही है।

“नए-नए प्रयोग, भुगत रही जनता”

एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि सीएमएचओ लगातार ऐसे प्रयोग कर रहे हैं, जिनका सीधा असर भोपाल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। योग्य कर्मचारियों को किनारे कर अयोग्य लोगों से काम करवाया जा रहा है।

भ्रष्टाचार की आशंका

अक्षय तोमर का कहना है कि संवेदनशील शाखाओं में गलत नियुक्तियां भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकती हैं और सिस्टम को और कमजोर कर सकती हैं।

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आंदोलन की चेतावनी

एनएसयूआई ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों से उनकी योग्यता के अनुरूप ही कार्य नहीं लिया गया और आदेश तत्काल वापस नहीं हुए, तो संगठन उग्र आंदोलन करेगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सीएमएचओ भोपाल पर होगी।

सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का पक्ष

इस पूरे मामले पर जब भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि जो व्यवस्था पहले से चली आ रही थी, उसी को जरूरत के हिसाब से जारी रखा गया है। एक-दो कर्मचारियों के कार्य में बदलाव किया गया है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है और सभी आदेश नियमों के अनुसार ही जारी किए गए हैं।

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