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News in Short
- निवेशकों ने की थी स्वामी विवेकानंद और लस्टीनेस सोसाइटी की धोखाधड़ी की शिकायत।
- दोनों ही सोसाइटियां धन जमा कराने के बाद मैच्योरिटी की अवधि के बावजूद राशि नहीं लौटा रही थी।
- EOW ने जांच के बाद दोनों कंपनियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
- मप्र. निक्षेपकों की सुरक्षा अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है मामला।
- निवेश के लिए दोनों ही सोसाइटियां आरबीआई के प्रावधानों की कर रही थीं अनदेखी।
News in Detail
BHOPAL. आर्थिक अपराध अनवेषण ब्यूरो ने निवेशकों से धोखाधड़ी की शिकायत पर दो क्रेडिट सोसाइटियों पर अपराध दर्ज किया है। ब्यूरो को कई निवेशकों ने सोसाइटियों द्वारा कई गुना रिटर्न का झांसा देने की शिकायत की थी। जिसके आधार पर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आए तथ्यों में दोनों ही सोसाइटी बैंक की तर्ज पर काम करती पाई गई। उनके द्वारा निवेशकों को फिक्स डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट के नाम पर निवेश करने का झांसा दिया जा रहा था। दोनों ही सोसाइटियों द्वारा कई निवेशकों को अवधि पूरी होने के बावजूद धन की वापिसी भी नहीं की जा रही थी।
शिकायतकर्ता सौरभ गुप्ता का कहना है 11 अगस्त 2020 को स्वामी विवेकानंद मल्टी स्टेट क्रेडिट सोसाइटी की आनंद नगर शाखा में 1,000 रुपए जमा किए थे। उन्हें 2,000 रुपए मिलने थे लेकिन सोसाइटी मैच्योरिटी की अवधि आने से पहले ही कार्यालय बंद कर गायब हो गई। उन्होंने कई बार संपर्क किया लेकिन रुपए वापस नहीं लौटाए गए। कमलेश खरया और रामेश्वर प्रसाद साहू ने लस्टीनेस जनहित क्रेडिट सोसाइटी में भारी निवेश किया था।
कमलेश खरया ने पत्नी, मां और पुत्र के नाम से भी राशि जमा कराई थी। उनके द्वारा 31 जनवरी 2022 को 30,000 रुपए की एफडी की गई। मैच्योरिटी के दौरान उन्हें 42,714 रुपए वापस मिलने थे। था। रामेश्वर प्रसाद साहू ने अपने पुत्र के नाम से 2,000 रुपए मासिक की आरडी ली थी। इसके तहत उन्होंने 36 माह तक 72,000 जमा किए जिसके बदले उन्हें 88,236 रुपए का भुगतान नहीं किया गया।
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मुनाफे का झांसा देकर कराया निवेश
शिकायतों की जांच में यह सामने आया कि दोनों सोसाइटियां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एनबीएफसी (Non-Banking Financial Companies) के रूप में पंजीकृत नहीं हैं। दोनों सोसाइटी केंद्रीय सहकारी सोसाइटी रजिस्ट्रार (CRCS) के अंतर्गत पंजीकृत हैं। इनकी निवेश योजनाओं को लेकर कोई कानूनी मंजूरी नहीं ली गई थी। निवेशकों से राशि निवेश कराते हुए रिटर्न का वादा किया गया था, लेकिन बाद में आनाकानी करने लगीं। मध्य प्रदेश में निक्षेपकों के हितों की सुरक्षा के लिए 2000 में लागू अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
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EOW ने दर्ज किया अपराध
शिकायत सामने आने पर EOW द्वारा मामले की जांच की गई। इस दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए गए। जांच अधिकारियों ने सोसाइटी से जारी की गई पॉलिसी भी साक्ष्य के रूप में जब्त की। इसके साथ ही दोनों ही सोसाइटियों के पंजीयन और निवेश के लिए आरबीआई से जारी प्रमाण पत्रों की भी पड़ताल की गई। जांच में दोनों सोसाइटियां बैंक की तरह काम करने के लिए अधिकृत नहीं पाई गईं। इसके आधार पर दोनों सोसाइटियों के पदाधिकारियों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया है।
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जानें कैसे हुआ धोखाधड़ी पर एक्शन
1. दोनों सोसाइटी RBI के साथ पंजीकृत नहीं हैं। इन सोसाईटियों ने निवेशकों से राशि ली, लेकिन बाद में वापस नहीं की।
2 .म.प्र. निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
3. अधिकारियों ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की है। आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
4. निवेशक चाहते हैं कि सोसाईटियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वे चाहते हैं कि उनकी राशि वापस की जाए।
निवेश करते वक्त बरतें ये सावधानियां
1. सुनिश्चित करें कि सोसाइटी RBI के साथ पंजीकृत हो।
2. फिक्स्ड डिपोजिट और रिकरिंग डिपोजिट सर्टिफिकेट की जानकारी लें।
3. वादा किए गए रिटर्न और परिपक्वता अवधि समझें।
4. अन्य निवेशकों से सोसाइटी के बारे में जानें।
5. वह राशि निवेश करें, जो खोने पर आपको फर्क न पड़े।
6. निवेश से पहले शर्तें पढ़कर समझें।
7. असामान्य रिटर्न का वादा करने वाली सोसाइटी से बचें।
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