भोपाल मेट्रोपॉलिटन: 10 लाख की आबादी पर नया निकाय बनाने की तैयारी
Amresh Kushwaha | Mar 17, 2026, 11:52 IST
bhopal metropolitan naya nikay upnagar
भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत अब 10 लाख की आबादी पर एक अलग निकाय और उपनगर बनेगा। इसी के चलते मास्टर प्लान अभी रुका है। शहर का 40 फीसदी आवासीय क्षेत्र मिक्स लैंडयूज में बदल गया है।
News In Short
- भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत अब 10 लाख की आबादी पर एक अलग निकाय बनाने की योजना है।
- मेट्रोपॉलिटन रीजन बनने की वजह से भोपाल का मास्टर प्लान अभी रुका हुआ है।
- शहर का 40 फीसदी आवासीय क्षेत्र अब मिक्स लैंडयूज में बदल चुका है।
- भोपाल के आसपास चार जिलों की 20 लाख आबादी को भी इस रीजन से जोड़ा जाएगा।
- अप्रैल 2027 तक मास्टर प्लान तैयार होने का अनुमान है।
News In Detail
भोपाल में बनेगा नया उपनगर
मेट्रोपॉलिटन रीजन क्यों रोक रहा है मास्टर प्लान?
इंदौर से पीछे क्यों है भोपाल?
40% आवासीय क्षेत्र मिक्स लैंडयूज में बदला
2031 में था एक लाख हेक्टेयर का टारगेट
भोपाल को केंद्र में रखकर जुड़ेंगे चार जिले
अप्रैल 2027 तक आएगा मास्टर प्लान
BDA की प्लानिंग पर क्या बोले अधिकारी?
FAQ
- भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में कौन-कौन से जिले शामिल हैं?
भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में भोपाल को केंद्र में रखकर आसपास के चार जिलों को गोलाई में जोड़ा गया है। कुल मिलाकर भोपाल जिले की 25 लाख और आसपास के जिलों की 20 लाख यानी करीब 45 लाख से ज्यादा आबादी इस रीजन में आती है। हालांकि बैरसिया को इस मेट्रोपॉलिटन रीजन से बाहर रखा गया है, जिसका विरोध हो रहा है। BDA को इस पूरे रीजन की नोडल एजेंसी बनाया गया है। - भोपाल मास्टर प्लान 2047 कब तक तैयार होगा?
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के लिए अभी BDA में कंसल्टेंसी एजेंसी काम कर रही है। अप्रैल 2027 तक डीपीआर तैयार होने का अनुमान है। इसके बाद जमीनी काम शुरू होगा। भोपाल का मास्टर प्लान पहले से ही करीब 21 साल लेट चल रहा है। मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना जाहिर होने के बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। - भोपाल में मिक्स लैंडयूज क्या है और यह क्यों बढ़ा?
मिक्स लैंडयूज का मतलब है कि जो इलाका पहले सिर्फ रहने के लिए था, वहां अब दुकानें, दफ्तर और व्यापारिक गतिविधियां भी होती हैं। टीडीसीपी के सर्वे के अनुसार भोपाल का 40 फीसदी आवासीय क्षेत्र अब मिक्स लैंडयूज में बदल गया है। 2005 के प्लान में 15 हजार हेक्टेयर आवासीय था, जिसमें से 6 हजार हेक्टेयर अब व्यावसायिक हो गया है। इसकी मुख्य वजह शहर का बेतरतीब विकास और मास्टर प्लान का लागू न होना है।
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