BJP के पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नेता नीलेश ने 200 करोड़ की सीलिंग जमीन पर ली विकास मंजूरी
Sanjay Gupta | Jul 16, 2026, 13:35 IST
bjp leader nilesh chaudhary Jitu Jirati case indore
बीजेपी के राऊ से पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नेता और पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नीलेश चौधरी व उनके परिवार की हातोद स्थित 17 हेक्टेयर की सीलिंग जमीन पर विकास मंजूरी हो गई है।
इंदौर कलेक्ट्रेट की कॉलोनी सेल में बीजेपी नेता ने बड़ा खेल कर दिया है। राऊ के पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी नेता और पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी व उनके परिवार ने हातोद के सोनगीर गांव में स्वास्तिक ग्रांड नाम से कॉलोनी का प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट को 8 जनवरी 2025 को विकास मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद जून 2025 में रेरा की मंजूरी भी मिल गई।
लेकिन एक दूसरे बिल्डर ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए और जांच की मांग की। जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर कॉलोनी विकसित की जा रही थी, वह सीलिंग जमीन है। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
हातोद के सोनगीर गांव की करीब 17 हेक्टेयर जमीन के लिए कॉलोनी की विकास मंजूरी का आवेदन लगाया गया था। इसमें कई सर्वे नंबरों की जमीन शामिल थी। यह जमीन नीलेश चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी, उनके भाई दिनेश और सुनील के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज थी।
इस प्रोजेक्ट में शरद गुप्ता पिता रामजीलाल गुप्ता को डेवलपर बनाया गया। मंजूरी लेने के दौरान साल 2009-10 का एक आदेश लगाया गया, जिसमें दावा किया गया कि यह जमीन सीलिंग से मुक्त होकर निजी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है। इसी आधार पर कॉलोनी सेल और जिला प्रशासन ने 8 जनवरी 2025 को विकास मंजूरी जारी कर दी।
जांच में चौंकाने खुलासा हुआ है। जिस आदेश के आधार पर जमीन को सीलिंग मुक्त बताया गया था, वह आदेश रिकॉर्ड में मिला ही नहीं। बताया गया था कि प्रकरण क्रमांक 0009/बी-121/2010-11 के तहत 8 दिसंबर 2010 को आदेश जारी हुआ था, लेकिन जांच में पता चला कि रजिस्टर में सिर्फ आदेश नंबर दर्ज है, असल आदेश मौजूद नहीं है।
एसडीएम की टीम बनाकर जब इसकी जांच कराई गई तो यह बात सामने आई। बिल्डर चौधरी परिवार से भी इस आदेश की कॉपी मांगी गई, लेकिन वे भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाए। जांच में यह भी पता चला कि मामला राजस्व बोर्ड तक पहुंचा था, जहां से इसे सक्षम अधिकारी यानी एसडीएम के पास सुनवाई के लिए भेजा गया था। लेकिन इस मामले में अंतिम आदेश का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
बिल्डर को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। इसके बाद हातोद एसडीएम से मामले की जांच कराई गई और पुराने दस्तावेज भी तलाशे गए। लेकिन जब सीलिंग मुक्त करने वाला आदेश नहीं मिला तो कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त कदम उठाया। उन्होंने कॉलोनी की विकास मंजूरी रद्द करने के निर्देश दिए। इसके बाद अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने आधिकारिक रूप से विकास मंजूरी निरस्त कर दी।
इस पूरी फाइल की मंजूरी प्रक्रिया में इंदौर टीएंडसीपी में सहायक संचालक रहे दर्शन लाल गोयल (डीएल गोयल) की भूमिका भी सामने आ रही है। उनकी पत्नी मनोरमा गोयल, शरद गुप्ता की डेवलपर्स कंपनी में पार्टनर हैं। गोयल कुछ साल पहले वीआरएस लेकर विभाग से अलग हो चुके हैं।
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, मनोरमा गोयल के साथ दीपक टेगे, शरद गुप्ता और रौनक अग्रवाल की भी हिस्सेदारी है। इन सभी से जुड़े दस्तावेज रेरा और विकास मंजूरी की फाइल में लगाए गए हैं। कंपनी में मनोरमा गोयल की हिस्सेदारी 36 फीसदी है, जबकि दीपक टेगे और शरद गुप्ता की 28-28 फीसदी और रौनक अग्रवाल की 8 फीसदी हिस्सेदारी है। रिकॉर्ड के आधार पर कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मनोरमा गोयल की है।
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इस कॉलोनी में एक हजार वर्गफीट से लेकर ढाई-तीन हजार वर्गफीट तक के 271 प्लॉट हैं। जून 2025 में रेरा की मंजूरी मिलने के बाद यहां करोड़ों रुपए के प्लॉट की बुकिंग और बिक्री भी हो चुकी है।
अब विकास मंजूरी रद्द होने और जमीन के सीलिंग वाली होने का मामला सामने आने के बाद प्लॉट खरीदने वाले लोग परेशानी में फंस गए हैं। वहीं कई लोगों को अभी तक इस मामले की जानकारी नहीं है और प्रोजेक्ट में खरीद-बिक्री जारी है। ऐसे में रेरा मंजूरी रद्द कराने और सीलिंग जमीन होने के कारण प्लॉट की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की जरूरत बताई जा रही है।
इस पूरे मामले में कॉलोनी सेल के साथ धोखाधड़ी (चार सौ बीसी) किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि जमीन को सीलिंग मुक्त बताने के लिए फर्जी आदेश का सहारा लिया गया। इसके लिए पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी, उनके परिवार और डेवलपर्स कंपनी से जुड़े शरद गुप्ता सहित अन्य डायरेक्टरों पर एफआईआर की मांग की जा रही है।
साथ ही साल 2010-11 में जिन लोगों ने राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर इस जमीन को सीलिंग मुक्त बताकर निजी जमीन के रूप में दर्ज कराया, उन पर भी धोखाधड़ी की कार्रवाई की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले के कारण जिन लोगों ने यहां प्लॉट खरीदे हैं, वे अब परेशानी में फंस गए हैं।
अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने विकास मंजूरी रद्द होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जांच के बाद यह फैसला लिया गया है। वहीं नीलेश चौधरी ने कहा कि वह बाहर थे और उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर विकास मंजूरी रद्द हुई है तो वह इसकी जानकारी लेकर आगे बताएंगे।
नीलेश चौधरी राऊ क्षेत्र में बीजेपी के नेता हैं और पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी माने जाते हैं। उनकी पत्नी द्रोपदी वैशाली नगर वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं।
हाल ही में 28 अक्टूबर 2025 को बीजेपी नगर की कार्यकारिणी घोषित हुई थी, जिसमें उनका नाम शामिल नहीं किया गया। इसके बाद समर्थकों ने विरोध जताया और रैली निकाली। समर्थक बीजेपी कार्यालय पहुंचे और इंदौर बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा की नेमप्लेट पर कालिख पोत दी थी।
नीलेश चौधरी खाती समाज से आते हैं और बताया गया कि विरोध प्रदर्शन में समाज के लोग भी शामिल थे। बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
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लेकिन एक दूसरे बिल्डर ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए और जांच की मांग की। जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर कॉलोनी विकसित की जा रही थी, वह सीलिंग जमीन है। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
सीलिंग की जमीन पर ऐसे ली मंजूरी
इस प्रोजेक्ट में शरद गुप्ता पिता रामजीलाल गुप्ता को डेवलपर बनाया गया। मंजूरी लेने के दौरान साल 2009-10 का एक आदेश लगाया गया, जिसमें दावा किया गया कि यह जमीन सीलिंग से मुक्त होकर निजी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है। इसी आधार पर कॉलोनी सेल और जिला प्रशासन ने 8 जनवरी 2025 को विकास मंजूरी जारी कर दी।
जांच में पता चला आदेश तो हुआ ही नहीं
एसडीएम की टीम बनाकर जब इसकी जांच कराई गई तो यह बात सामने आई। बिल्डर चौधरी परिवार से भी इस आदेश की कॉपी मांगी गई, लेकिन वे भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाए। जांच में यह भी पता चला कि मामला राजस्व बोर्ड तक पहुंचा था, जहां से इसे सक्षम अधिकारी यानी एसडीएम के पास सुनवाई के लिए भेजा गया था। लेकिन इस मामले में अंतिम आदेश का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
इसके बाद कलेक्टर ने लिया फैसला
पर्दे के पीछे टीएंडसीपी के रिटायर्ड अधिकारी भी
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, मनोरमा गोयल के साथ दीपक टेगे, शरद गुप्ता और रौनक अग्रवाल की भी हिस्सेदारी है। इन सभी से जुड़े दस्तावेज रेरा और विकास मंजूरी की फाइल में लगाए गए हैं। कंपनी में मनोरमा गोयल की हिस्सेदारी 36 फीसदी है, जबकि दीपक टेगे और शरद गुप्ता की 28-28 फीसदी और रौनक अग्रवाल की 8 फीसदी हिस्सेदारी है। रिकॉर्ड के आधार पर कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मनोरमा गोयल की है।
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रेरा के बाद करोड़ों के प्लॉट बिक गए
अब विकास मंजूरी रद्द होने और जमीन के सीलिंग वाली होने का मामला सामने आने के बाद प्लॉट खरीदने वाले लोग परेशानी में फंस गए हैं। वहीं कई लोगों को अभी तक इस मामले की जानकारी नहीं है और प्रोजेक्ट में खरीद-बिक्री जारी है। ऐसे में रेरा मंजूरी रद्द कराने और सीलिंग जमीन होने के कारण प्लॉट की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की जरूरत बताई जा रही है।
शुद्ध रूप से चार सौ बीसी का मामला
साथ ही साल 2010-11 में जिन लोगों ने राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर इस जमीन को सीलिंग मुक्त बताकर निजी जमीन के रूप में दर्ज कराया, उन पर भी धोखाधड़ी की कार्रवाई की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले के कारण जिन लोगों ने यहां प्लॉट खरीदे हैं, वे अब परेशानी में फंस गए हैं।
क्या बोल रहे हैं अधिकारी और नीलेश चौधरी
कौन हैं नीलेश चौधरी
हाल ही में 28 अक्टूबर 2025 को बीजेपी नगर की कार्यकारिणी घोषित हुई थी, जिसमें उनका नाम शामिल नहीं किया गया। इसके बाद समर्थकों ने विरोध जताया और रैली निकाली। समर्थक बीजेपी कार्यालय पहुंचे और इंदौर बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा की नेमप्लेट पर कालिख पोत दी थी।
नीलेश चौधरी खाती समाज से आते हैं और बताया गया कि विरोध प्रदर्शन में समाज के लोग भी शामिल थे। बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
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