चंबल में रेत माफिया पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तीनों राज्यों की सरकारों को लगाई फटकार
Sandeep Kumar | May 26, 2026, 19:30 IST
chambal sand mafia
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर राजस्थान, एमपी और यूपी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने इसे पर्यावरणीय संकट बताया और अफसरों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी।
चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को फटकार लगाई। तीनों राज्यों के अफसरों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की बात कही। राजस्थान के 732 हेक्टेयर क्षेत्र के डी-नोटिफिकेशन पर भी रोक लगाई गई।
चंबल नदी का नाम सुनते ही पहले डाकुओं की याद आती थी। लेकिन अब यहां एक नया खतरा पैदा हो गया है। रेत माफिया ने इस पूरे इलाके को अपनी जागीर समझ लिया है। जस्टिस संदीप मेहता ने खुद कहा कि पुरानी डकैती की जगह अब खनन माफिया ने ले ली है। हालत यह है कि एसडीएम, पुलिसकर्मी और वन अधिकारी तक अपनी जान गंवा रहे हैं।
इसी साल 8 अप्रैल को मुरैना जिले में एक वन रक्षक की मौत हो गई। वह गश्त पर था। अवैध रेत ले जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उसे कुचल दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है। ऐसे हमले पहले भी होते रहे हैं।
13 मार्च 2026 को मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले में दखल दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले का नाम रखा।"IN RE: ILLEGAL SAND MINING IN THE NATIONAL CHAMBAL SANCTUARY AND THREAT TO ENDANGERED AQUATIC WILDLIFE (SMW(C) No. 2/2026)। जस्टिस मेहता ने अवैध खनन के वीडियो देखकर उन्हें डरावना बताया। वीडियो में साफ दिखता था कि घड़ियालों और अन्य जलीय जीवों के बीच भारी मशीनें बेखौफ रेत निकाल रही हैं।
करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य तीन राज्यों की सीमाओं पर फैला है। यह घड़ियाल, रेड-क्राउन रूफ टर्टल (Red-Crowned Roof Turtle) और गंगा डॉल्फिन (Ganges River Dolphin) का सबसे बड़ा प्राकृतिक घर है। ये तीनों जीव लुप्तप्राय श्रेणी में आते हैं।
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17 अप्रैल 2026 को सुनवाई में कोर्ट ने कई कड़े निर्देश दिए। तीनों राज्य सरकारों को खनन नहीं रोक पाने पर कड़ी फटकार लगाई गई। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो मध्य प्रदेश और राजस्थान में रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा सकता है। राज्यों पर भारी जुर्माना लगाने और अर्धसैनिक बलों की तैनाती तक की चेतावनी दी गई।
कोर्ट ने अवैध खनन के रास्तों पर हाई-रिजॉल्यूशन वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। इन कैमरों की लाइव फीड एसपी या एसएसपी और डीएफओ की निगरानी में रहेगी।
कोर्ट ने एक और जरूरी आदेश दिया है। मध्य प्रदेश के मुरैना और राजस्थान के धौलपुर जिलों में खनन से जुड़े सभी वाहनों और मशीनों पर जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा। ड्रेजर, लोडर, एक्सकेवेटर, ट्रैक्टर सब इसमें शामिल हैं। इससे वाहनों की रीयल-टाइम निगरानी होगी। अगर कोई वाहन अवैध खनन में पकड़ा गया तो उसे तुरंत जब्त किया जाएगा। उसे छोड़ने के लिए सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी होगी।
कोर्ट ने मार्च सुनवाई में कड़ा रुख दिखाया था। अफसरों की जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी दी गई। अवैध उत्खनन रोकने में विफलता पर सवाल उठे। वन्यजीव आवास नुकसान का जिम्मेदार माना जाएगा। अवमानना कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। निखिल गोयल और रूपाली सैमुअल नियुक्त हुए। दोनों न्यायमित्र की भूमिका निभाएंगे। अदालतें अब नदी और जंगल दोनों संभाल रही हैं।
अप्रैल 2026 की सुनवाई में एक और बड़ा फैसला आया। राजस्थान सरकार ने 23 दिसंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के 732 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित दायरे से बाहर करने की कोशिश की गई थी। यह अधिसूचना 9 मार्च 2026 को लागू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तुरंत रोक लगा दी। कोर्ट ने सीधे कहा कि राजस्थान सरकार अवैध खनन को बढ़ावा दे रही है।
चंबल अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ड्राइवरों को नहीं, खनन के बड़े खिलाड़ियों को पकड़ो
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राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में सरकारी रवैए पर कोर्ट सख्त, राजस्थान-MP के अफसर तलब
अवैध रेत खनन पर बड़ी कार्रवाई,5 ट्रैक्टर ट्रॉली जब्त,700 घनमीटर अवैध भंडारण का भी खुलासा
चंबल में रेत माफिया का आतंक
इसी साल 8 अप्रैल को मुरैना जिले में एक वन रक्षक की मौत हो गई। वह गश्त पर था। अवैध रेत ले जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उसे कुचल दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है। ऐसे हमले पहले भी होते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया संज्ञान
अभयारण्य तीन राज्यों की सीमाओं पर फैला
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17 अप्रैल को क्या हुआ कोर्ट में
कोर्ट ने अवैध खनन के रास्तों पर हाई-रिजॉल्यूशन वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। इन कैमरों की लाइव फीड एसपी या एसएसपी और डीएफओ की निगरानी में रहेगी।
लागू होगा GPS पायलट प्रोजेक्ट
अफसरों पर होगी व्यक्तिगत जवाबदेही
राजस्थान का डी-नोटिफिकेशन भी रद्द
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