मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल का कलेक्टरों को सात दिन का अल्टीमेटम, स्वामित्व योजना पर सख्ती, काम नहीं हुआ तो जाएगी कलेक्टरी
Sanjay Dhiman | Sootr Creatives | Oct 08, 2026, 20:13 IST
पटवारी आंदोलन के बीच कलेक्टरों को सीएस की चेतावनी: स्वामित्व योजना का काम न हुआ तो भोपाल तलब
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। स्वामित्व योजना का काम पटवारियों से न करा पाने वाले कलेक्टरों को भोपाल बुलाया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उन्होंने तहसीलदारों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए। पटवारी आंदोलन के बीच आई यह चेतावनी सरकार की सख्ती दिखाती है। वहीं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ पटवारियों की बैठक टल गई है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने प्रदेशभर के कलेक्टरों को सात दिन की मोहलत दी है। स्वामित्व योजना का काम पटवारियों से नहीं करा पाए, तो कलेक्टर भोपाल बुलाए जाएंगे। यह कलेक्टरों को चेतावनी है, और पटवारी आंदोलन के बीच आई है।
सीएस की यह सख्ती वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिखी। सीएस (CS – Chief Secretary) बनने के बाद उनकी यह पहली ऐसी तल्खी है। इधर स्वामित्व योजना को लेकर प्रदेशभर के पटवारी हड़ताल पर चल रहे है, जिसके कारण योजना में प्रगति नहीं हो पा रही है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनके मुताबिक पटवारियों से काम न करा पाना कलेक्टरों की नाकामी है। पटवारी बर्खास्तगी और निलंबन के विरोध में प्रदेश भर में आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने पांच मंत्रियों की कमेटी से बात कराई। सर्कुलर (सरकारी आदेश) भी जारी किया। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ पटवारियों की बैठक फिलहाल टल गई है।
बर्णवाल ने कलेक्टरों से कहा कि जिलों में काम दिखना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि कार्रवाई जो भी करनी पड़े, काम होना चाहिए।
सात दिन की यह मोहलत ज्यादा लंबी नहीं है। अल्टीमेटम का मतलब है कि एक हफ्ते में नतीजे दिखें।
स्वामित्व योजना गांवों में आबादी की जमीन का मालिकाना हक देने की योजना है। केंद्र सरकार ने इसे 24 अप्रैल 2020 को शुरू किया था। मुख्य सचिव चाहते हैं कि सात दिन में इसमें प्रोग्रेस (प्रगति) आए।
इस योजना में ड्रोन से गांवों की आबादी जमीन का सर्वे होता है। फिर लोगों को संपत्ति कार्ड मिलता है। राज्यों में राजस्व विभाग इसका नोडल (मुख्य जिम्मेदार) विभाग है।
पटवारी मुख्य रूप से इस काम से जुड़े हैं। इसलिए उनका असहयोग सरकार को भारी पड़ रहा है। चेतावनी सिर्फ कलेक्टरों तक नहीं रुकी। क्या तहसीलदार भी इसके दायरे में हैं? जवाब है, हां।
मुख्य सचिव ने तहसीलदारों पर कार्रवाई का निर्देश भी दिया। कलेक्टर ऐसे तहसीलदारों पर कदम उठाएं। निशाने पर वे हैं, जो पटवारियों से काम नहीं करा पा रहे।
अलग-अलग जिलों में पटवारी आंदोलन पर है। इन आंदोलनों में पटवारी कलेक्टर मुर्दाबाद के नारे लगा रहे है। इसे लेकर भी सीएस ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पटवारी की इतनी हिम्मत हो गई है। वह कलेक्टर मुर्दाबाद के नारे लगा रहा है।
इसी बात पर उनकी तल्खी सबसे ज्यादा दिखी। उन्होंने कलेक्टरों से जिलों में सख्ती करने को कहा।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमारी सरकार पटवारियों के साथ नरम रुख लेकर चल रही है। उनकी मांग पर पांच मंत्रियों की कमेटी से बातचीत कराई गई। उनकी इच्छा के मुताबिक सर्कुलर भी जारी कर दिया है। सरकार का काम करने वाले हर कर्मचारी को सरकार प्रोटेक्शन देती है। लेकिन सरकार के आदेश ही नहीं माने जा रहे हैं।
पटवारी बर्खास्तगी और निलंबन के विरोध में प्रदेश भर में आंदोलन पर उतरे। उन्होंने राजस्व का काम बंद कर दिया। सरकार के निर्देश पर उनसे बातचीत शुरू हुई।
सरकार के निर्देश पर पीआरसी (PRC – Principal Revenue Commissioner) कार्यालय में बैठक हुई। आयुक्त भू संसाधन और प्रबंधन भी मौजूद थे। लेकिन बैठक बेनतीजा रही।
इसके बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को बातचीत के लिए अधिकृत किया गया। पटवारियों का प्रतिनिधिमंडल वल्लभ भवन पहुंचा। उसने डिप्टी सीएम के सामने मांगें रखीं। साथ ही स्वामित्व योजना की पेचीदगियां भी बताईं।
लेकिन डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक टल गई। इसलिए कोई फैसला नहीं हुआ। फैसला अब भी अटका है।
कलेक्टरों के सामने अब दोहरी चुनौती है। उन्हें पटवारियों से काम भी कराना है। सरकार कहती है कि वह नरम रुख के साथ चल रही है।
बैठक दोबारा कब होगी, यह अभी साफ नहीं है। तब तक सात दिन की घड़ी चलती रहेगी। क्या सात दिन में काम पटरी पर आ पाएगा?
मुख्य सचिव का संदेश सीधा है। कार्रवाई जो भी हो, काम रुकना नहीं चाहिए।
सीएस की यह सख्ती वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिखी। सीएस (CS – Chief Secretary) बनने के बाद उनकी यह पहली ऐसी तल्खी है। इधर स्वामित्व योजना को लेकर प्रदेशभर के पटवारी हड़ताल पर चल रहे है, जिसके कारण योजना में प्रगति नहीं हो पा रही है।
समझें क्या है पूरा मामला
सात दिन का अल्टीमेटम क्यों?
सात दिन की यह मोहलत ज्यादा लंबी नहीं है। अल्टीमेटम का मतलब है कि एक हफ्ते में नतीजे दिखें।
स्वामित्व योजना गांवों में आबादी की जमीन का मालिकाना हक देने की योजना है। केंद्र सरकार ने इसे 24 अप्रैल 2020 को शुरू किया था। मुख्य सचिव चाहते हैं कि सात दिन में इसमें प्रोग्रेस (प्रगति) आए।
पटवारी से काम लो, वरना भोपाल
सात दिन में स्वामित्व योजना का काम पटवारियों से कराओ। जो कलेक्टर नहीं करा पाएंगे, उन्हें हम भोपाल बुलवा लेंगे।
By: अशोक बर्णवाल, मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन
पटवारी मुख्य रूप से इस काम से जुड़े हैं। इसलिए उनका असहयोग सरकार को भारी पड़ रहा है। चेतावनी सिर्फ कलेक्टरों तक नहीं रुकी। क्या तहसीलदार भी इसके दायरे में हैं? जवाब है, हां।
तहसीलदारों पर भी गिरेगी गाज?
नारेबाजी पर बरसे मुख्य सचिव
इसी बात पर उनकी तल्खी सबसे ज्यादा दिखी। उन्होंने कलेक्टरों से जिलों में सख्ती करने को कहा।
सरकार का नरम रुख और प्रोटेक्शन
पटवारी आंदोलन में क्या हुआ?
सरकार के निर्देश पर पीआरसी (PRC – Principal Revenue Commissioner) कार्यालय में बैठक हुई। आयुक्त भू संसाधन और प्रबंधन भी मौजूद थे। लेकिन बैठक बेनतीजा रही।
वल्लभ भवन में क्या बात हुई?
लेकिन डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक टल गई। इसलिए कोई फैसला नहीं हुआ। फैसला अब भी अटका है।
आगे क्या होगा अब?
बैठक दोबारा कब होगी, यह अभी साफ नहीं है। तब तक सात दिन की घड़ी चलती रहेगी। क्या सात दिन में काम पटरी पर आ पाएगा?
मुख्य सचिव का संदेश सीधा है। कार्रवाई जो भी हो, काम रुकना नहीं चाहिए।
- मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को किस कारण से सात दिन की मोहलत दी है?
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को यह मोहलत दी है ताकि वे पटवारियों से स्वामित्व योजना का काम करा सकें। यदि कलेक्टर ऐसा नहीं कर पाएंगे, तो उन्हें भोपाल बुलाया जाएगा। - स्वामित्व योजना क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
स्वामित्व योजना एक सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य गांवों में आबादी की जमीन का मालिकाना हक देना है। यह योजना 24 अप्रैल 2020 को शुरू की गई थी और इसमें ड्रोन से गांवों की आबादी जमीन का सर्वे किया जाता है। - पटवारी आंदोलन का कारण क्या है और सरकार ने इस पर क्या कदम उठाए हैं?
पटवारी आंदोलन का कारण बर्खास्तगी और निलंबन के खिलाफ विरोध है। सरकार ने इस पर बातचीत के लिए पांच मंत्रियों की एक समिति बनायी है और पटवारियों की मांगों पर चर्चा हुई, लेकिन बैठक बेनतीजा रही।
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