धार की भोजशाला में नमाज की जगह पर विवाद गहराया, मुस्लिम पक्ष नहीं जाएगा 40 पीर
Sanjay Gupta | Jul 18, 2026, 12:37 IST
dhar bhojshala namaz place dispute
धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश के बाद भी जुमे की नमाज की व्यवस्था नहीं हो सकी। आदेश आने के बाद धार कलेक्टोरेट में लंबी बैठक चली। इसके बाद भोजशाला परिसर से करीब 800 मीटर दूर जगह बताई गई, जिसे मुस्लिम पक्ष ने खारिज कर दिया।
धार की भोजशाला (bhojshala dhar) को लेकर मई महीने में आए ऐतिहासिक फैसले के बाद से परिसर में लगातार पूजा हो रही है, जबकि नमाज पूरी तरह बंद है। इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें जिब्रान अंसारी की याचिका पर शुक्रवार 17 जुलाई को कोर्ट ने अपना औपचारिक फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने नमाज के लिए भोजशाला परिसर के बाहर या आसपास किसी खुले स्थान पर अस्थायी व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने जो जगह तय की, उससे मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं है। इसी नाराजगी के चलते शुक्रवार को वहां जुमे की नमाज नहीं हुई। अब मुस्लिम पक्ष इस मामले को लेकर दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।
कलेक्टोरेट धार में हुई लंबी बैठक के बाद जिला प्रशासन ने भोजशाला परिसर से करीब 800 मीटर दूर ग्राम मालीवाड़ा में 40 पीर की जगह नमाज के लिए तय की थी।
लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस जगह को स्वीकार नहीं किया। सदर मौलाना वेलफेयर कमेटी के अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन ने उनकी मांग के मुताबिक जगह नहीं दी है। उनका कहना है कि यह जगह करीब 2 किलोमीटर दूर है, इसलिए यह व्यवस्था मंजूर नहीं है।
अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर चुनौती दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के मुताबिक हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज की व्यवस्था की जानी है। लेकिन तय की गई जगह से नाराज मुस्लिम पक्ष ने अब वहां नमाज नहीं पढ़ने का फैसला किया है।
मुस्लिम पक्ष ने ऐलान किया है कि 17 जुलाई के बाद 24 और 31 जुलाई को भी वहां जुमे की नमाज नहीं करेंगे। वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए पहले से ही 5 अगस्त की तारीख तय है।
प्रशासन का मानना है कि आगे भी इसी जगह पर नमाज (धार की भोजशाला विवाद) की व्यवस्था जारी रह सकती है। इसलिए भोजशाला परिसर से एक निश्चित दूरी बनाए रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने।
प्रशासन ने जो जगह तय की है, वह भोजशाला (bhojshala case) से करीब 800 मीटर दूर खुले क्षेत्र में है। यहां दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग आने-जाने की व्यवस्था भी की जा सकती है। राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में इस जगह को सबसे उपयुक्त बताया गया है।
इससे पहले प्रशासन ने मगजपुरा और नौगांव बुजुर्ग में भी जगहों का निरीक्षण किया था, लेकिन बाद में 40 पीर की जगह को ही नमाज के लिए उपयुक्त माना गया।
नमाज के लिए भोजशाला से दूर चालीस पीर दी जगह, मुस्लिम समाज नहीं गया
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सुप्रीम कोर्ट ने नमाज के लिए भोजशाला परिसर के बाहर या आसपास किसी खुले स्थान पर अस्थायी व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने जो जगह तय की, उससे मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं है। इसी नाराजगी के चलते शुक्रवार को वहां जुमे की नमाज नहीं हुई। अब मुस्लिम पक्ष इस मामले को लेकर दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।
क्या जगह हुई तय, क्यों है नाराजगी
लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस जगह को स्वीकार नहीं किया। सदर मौलाना वेलफेयर कमेटी के अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन ने उनकी मांग के मुताबिक जगह नहीं दी है। उनका कहना है कि यह जगह करीब 2 किलोमीटर दूर है, इसलिए यह व्यवस्था मंजूर नहीं है।
अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर चुनौती दी जाएगी।
24 और 31 जुलाई को भी नहीं करेंगे नमाज
मुस्लिम पक्ष ने ऐलान किया है कि 17 जुलाई के बाद 24 और 31 जुलाई को भी वहां जुमे की नमाज नहीं करेंगे। वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए पहले से ही 5 अगस्त की तारीख तय है।
प्रशासन ने क्यों चुनी 40 पीर की जगह
प्रशासन ने जो जगह तय की है, वह भोजशाला (bhojshala case) से करीब 800 मीटर दूर खुले क्षेत्र में है। यहां दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग आने-जाने की व्यवस्था भी की जा सकती है। राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में इस जगह को सबसे उपयुक्त बताया गया है।
इससे पहले प्रशासन ने मगजपुरा और नौगांव बुजुर्ग में भी जगहों का निरीक्षण किया था, लेकिन बाद में 40 पीर की जगह को ही नमाज के लिए उपयुक्त माना गया।
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