घर से वोट डालने की तैयारी, लेकिन पहचान और गोपनीयता की गारंटी कौन देगा?, डिजिटल मतदान की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
Ramanand Tiwari | Oct 09, 2026, 22:47 IST
मध्यप्रदेश में घर से मतदान की तैयारी
मध्य प्रदेश में चुनावी व्यवस्था के प्रस्तावित बदलाव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है। मतदाता की पहचान तो डिजिटल तकनीक से जांची जा सकती है। लेकिन स्क्रीन के दूसरी तरफ वोट कौन डाल रहा है और उस पर किसी का दबाव तो नहीं है, इसकी गारंटी कैसे मिलेगी? प्रस्तावित व्यवस्था की विश्वसनीयता इसी चुनौती पर निर्भर करेगी। मतदान केंद्र की चारदीवारी से बाहर निकलने वाला वोट कितना सुरक्षित रहेगा?
चुनाव आयोग के सामने भरोसे का सवाल
प्रस्ताव के अनुसार बीमार, दिव्यांग, बुजुर्ग और विभिन्न सेवाओं में तैनात मतदाताओं सहित कुछ अन्य पात्र वर्गों को यह सुविधा मिल सकती है। लेकिन मतदान केंद्र पर मौजूद निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को घर से होने वाले मतदान में कैसे सुनिश्चित किया जाएगा, यह बड़ा प्रश्न है।
मोबाइल पर पहचान होगी, लेकिन दबाव कैसे पकड़ा जाएगा?
केवल ओटीपी से यह सुनिश्चित नहीं होता कि मतदान करते समय व्यक्ति अकेला है या किसी दबाव में नहीं है। यदि किसी मतदाता के मोबाइल या लॉगिन विवरण तक दूसरा व्यक्ति पहुंच जाता है, तो अनधिकृत मतदान रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय आवश्यक होंगे। यही वह चुनौती है, जिसका समाधान तकनीकी परीक्षण और अंतिम नियमों में स्पष्ट होना चाहिए।
साइबर सुरक्षा में चूक हुई तो जिम्मेदारी किसकी?
इसके अलावा यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि मतदाता की पहचान और उसके मतदान विकल्प को आपस में जोड़कर उसकी गोपनीयता भंग न की जा सके। स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण, तकनीकी ऑडिट और शिकायत निवारण की व्यवस्था कैसी होगी, इसका स्पष्ट विवरण अंतिम प्रणाली सामने आने पर ही मिलेगा।
पहले उपचुनाव में सामने आएगी वास्तविक स्थिति
पहचान सत्यापन, सर्वर की क्षमता, मतदान की गोपनीयता और तकनीकी खराबी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था को भी परखना जरूरी होगा। परीक्षण सफल होने के बाद भी व्यापक इस्तेमाल अंतिम नियमों और आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगा।
413 निकाय, 22,921 पंचायतें और बड़ा चुनावी दायरा
प्रस्तावित सुविधा का लाभ अस्पताल में भर्ती मरीजों, 90 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांग मतदाताओं, प्रवासी मजदूरों, विद्यार्थियों और आवश्यक सेवाओं में तैनात कर्मचारियों जैसे वर्गों तक पहुंचाने की तैयारी है। हालांकि, इन सभी श्रेणियों की अंतिम पात्रता और पंजीकरण संबंधी शर्तें अभी निर्धारित नियमों से ही स्पष्ट होंगी।
एस्टोनिया का मॉडल , लेकिन मध्यप्रदेश में कितनी तैयारी?
सुविधा के साथ निष्पक्षता कैसे बचेगी?
अब सवाल यह है कि राज्य निर्वाचन आयोग डिजिटल मतदान की सुविधा शुरू करने से पहले सुरक्षा, स्वतंत्र सत्यापन और शिकायतों के समाधान की कितनी मजबूत व्यवस्था सार्वजनिक करेगा?
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