नर्मदा तट के जंगल को कब्जा मुक्त कराएगी वन विभाग की टास्क फोर्स
Sanjay Sharma | Nov 05, 2025, 22:44 IST
forest
डीएफओ ने लिखा है कि नर्मदा नदी को संरक्षित करने `अविरल निर्मल नर्मदा` अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की आवश्यकता भी जताई है।
BHOPAL.आलीराजपुर जिले में नर्मदा तट के पांच किलोमीटर दायरे में जंगल को अतिक्रमणमुक्त करने की मुहिम ने स्थानीय आदिवासी समुदाय को नाराज कर दिया है। डीएफओ ने वन क्षेत्र से कब्जे हटाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की अनुशंसा जिला प्रशासन से की है।
इस पत्र और प्रशासन की तैयारियों के बीच आदिवासी बाहुल्य जिले में विरोध के सुर उठने लगे हैं। वहीं पेसा समिति से सहमति के बिना 5वी अनुसूची में शामिल अंचल में कार्रवाई को असंवैधानिक बता रहे हैं।
![037961c7-90a]()
प्रदेश के मालवा अंचल का जिला आदिवासी समुदाय की बहुलता वाला क्षेत्र है। जिले के उमरेठ से जलसिंधी क्षेत्र से नर्मदा नदी बहती है। नदी के दूसरे किनारे से ही महाराष्ट्र राज्य की सीमा जुड़ती है। डीएफओ अमित वसंत निगम ने 24 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय को पत्र भेजा था। इसमें नर्मदा नदी के तट के किनारों पर पांच किलोमीटर दायरे में आने वाले जंगल से कब्जे हटाने का उल्लेख है।
डीएफओ ने लिखा है कि नर्मदा नदी को संरक्षित करने `अविरल निर्मल नर्मदा` अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किनारों से मिट्टी का कटाव रोकने व भूजल संरक्षण के लिए पौधरोपण किया जाना है। नदी से सटे जंगल में 13 दिसम्बर 2005 के बाद हुए कब्जों को मुहिम चलाकर बेदखल करना जरूरी है। उन्होंने इसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की आवश्यकता भी जताई है।
इस पत्र लिखने के साथ आलीराजपुर वन मंडल में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। वन परिक्षेत्र मथवाड और उमराली , उपवन मंडल अधिकारी के साथ ही एसडीएम सोण्डवा और थाना बखतगढ़ एवं सोण्डवा को निर्देशित किया गया है। प्रशासन की इस तैयारी से जिले की वनांचलों में छोटे- छोटे टोलों और फलियों में रहने वाले आदिवासी परिवारों में घबराहट है।
जिले में नर्मदा नदी से सटी वनभूमि पर कब्जे हटाने की तैयारी के विरोध में आदिवासी संगठन भी मुखर होने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता भी वन विभाग और अधिकारियों की कार्रवाई की तैयारी को असंवैधानिक बता रहे हैं। आदिवासियों के अधिकारों के लिए सक्रिय कार्यकर्ता आनंद राय का कहना है यह जिला संविधान में शेड्यूल-5 में शामिल है। जिसमें सीधे तौर पर प्रशासन या विभाग नियमों को सीधे तौर पर लागू नहीं कर सकता। प्रशासन की तैयारी इसका उल्लंघन कर रही है।
ये खबर भी पढ़िए :
मप्र कार्य गुणवत्ता परिषद: मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अध्यक्ष, फिर भी परिषद की हालत खराब
संविधान में शेड्यूल-5 के तहत मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, बालाघाट, बैतूल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, धार, डिंडौरी, होशंगाबाद, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मंडला, रतलाम, सिवनी, शहडोल, श्योपुर, सीधी, उमरिया जिलों के 89 आदिवासी विकासखंड शामिल हैं। इन विकासखंड में केंद्र या राज्य के नियमों को पेसा एक्ट क्रियान्वयन समितियों के माध्यम से ही लागू किया जा सकता है।
ये खबर भी पढ़िए :
एमपी में भर्ती के हाल देखिए, विज्ञापन आया तो परीक्षा रूकी, फिर रिजल्ट होल्ड, ये हो गया तो जॉइनिंग अटकी
शेड्यूल-5 या संविधान की पांचवी अनुसूची में दर्ज आदिवासी क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था और नगरीय निकायों के अधिकारों पर भी संवैधानिक नियंत्रण लगाया गया है। इसका साफ मतलब है कि जो क्षेत्र इस अनुसूची में शामिल हैं वहां ये संस्थाएं या दूसरे विभागों के प्रावधान प्रभावशाली नहीं होंगे। संस्थाओं और सरकारी महकमों को अनुसूचित क्षेत्र और जनजातियों का प्रशासनिक नियंत्रण पेसा एक्ट यानी "पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अधिनियम" के माध्यम से ही किया जा सकता है।
ये खबर भी पढ़िए :
MP Weather Report: प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश, बढ़ेगी ठंड
सरदार सरोवर बांध के निर्माण से बड़वानी जिले से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों को पलायन करना पड़ा था। डूब में आने की वजह से गांव छोड़ने मजबूर ऐसे ही कई आदिवासी परिवार सीमावर्ती आलीराजपुर जिले में बस गए थे। ऐसे परिवार वन क्षेत्र में 13 दिसम्बर 2005 से पहले से जंगल में बसने की गाइडलाइन से बाहर हैं। ज्यादातर वन क्षेत्रों की सेटेलाइट इमेजनरी भी उपलब्ध नहीं है। वनभूमि पर 2005 के बाद बसने वाले परिवार अतिक्रमणकारी की श्रेणी में आने से कार्रवाई का शिकार बन सकते हैं।
ये खबर भी पढ़िए :
मध्य प्रदेश में बना है दुनिया का सबसे अनोखा मंदिर, श्रीकृष्ण के साथ विराजते हैं मित्र सुदामा
इस पत्र और प्रशासन की तैयारियों के बीच आदिवासी बाहुल्य जिले में विरोध के सुर उठने लगे हैं। वहीं पेसा समिति से सहमति के बिना 5वी अनुसूची में शामिल अंचल में कार्रवाई को असंवैधानिक बता रहे हैं।
इसलिए शुरू हुआ है विरोध
037961c7-90a
प्रदेश के मालवा अंचल का जिला आदिवासी समुदाय की बहुलता वाला क्षेत्र है। जिले के उमरेठ से जलसिंधी क्षेत्र से नर्मदा नदी बहती है। नदी के दूसरे किनारे से ही महाराष्ट्र राज्य की सीमा जुड़ती है। डीएफओ अमित वसंत निगम ने 24 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय को पत्र भेजा था। इसमें नर्मदा नदी के तट के किनारों पर पांच किलोमीटर दायरे में आने वाले जंगल से कब्जे हटाने का उल्लेख है।
टास्क फोर्स हटाएगी कब्जा
पुलिस- प्रशासन कर रहा तैयारी
आदिवासी संगठन भी नाराज
ये खबर भी पढ़िए :
मप्र कार्य गुणवत्ता परिषद: मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अध्यक्ष, फिर भी परिषद की हालत खराब
ये हैं 5वी अनुसूची में शामिल क्षेत्र
ये खबर भी पढ़िए :
एमपी में भर्ती के हाल देखिए, विज्ञापन आया तो परीक्षा रूकी, फिर रिजल्ट होल्ड, ये हो गया तो जॉइनिंग अटकी
पेसा कानून से मिली प्रावधान को मजबूती
ये खबर भी पढ़िए :
MP Weather Report: प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश, बढ़ेगी ठंड
विस्थापित परिवारों में सबसे ज्यादा चिंता
ये खबर भी पढ़िए :
मध्य प्रदेश में बना है दुनिया का सबसे अनोखा मंदिर, श्रीकृष्ण के साथ विराजते हैं मित्र सुदामा
पेसा और वन अधिकार एक्ट:
- पेसा कानून, 1996, और वन अधिकार (मान्यता) कानून, 2006, आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देते हैं।
- भारत के राष्ट्रपति को देश के जनजातीय समाज का संरक्षक बनाया गया है। वहीं पांचवीं अनुसूची राज्यपाल को आदिवासी आबादी के संरक्षण की विशेष शक्तियां देती है।
- वन विभाग सीधे तौर पर नियम लागू नहीं कर सकता है क्योंकि इससे आदिवासियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और आजीविका के स्रोत प्रभावित हो सकते हैं।
- वन विभाग के कानूनों की सख्ती आदिवासियों को जंगल से लड़की बीनने, मवेशी चराने जैसे पारंपरिक कामों से रोकती है। पेसा एक्ट वनवासियों को मौलिक अधिकार देता है।
- आदिवासी समुदाय को किसी भी सरकारी नियम या कानून के दायरे में लाने से पहले उन्हें पेसा समिति की अनुमति लेना जरूरी है। ये समिति राज्य से स्थानीय स्तर तक गठित हैं।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari