गेस्ट फैकल्टी: 9 दिन बाद भी उच्च शिक्षा विभाग की समिति तैयार नहीं कर पाई रिपोर्ट

Sanjay Sharma | Jan 16, 2026, 18:24 IST
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हरियाणा के गेस्ट फैकल्टी पैटर्न पर उच्च शिक्षा विभाग की समिति 9 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं सौंप पाई। गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद टूटती दिख रही है।

News in Short

  • गेस्ट फैकल्टी संबंधी हरियाणा सरकार की नीतियों का नहीं हो पाया अध्ययन।
  • उच्च शिक्षा विभाग की समिति 9 दिन बाद भी नहीं सौंप पाई रिपोर्ट।
  • सात सदस्यीय समिति को 7 जनवरी को सौंपना था अध्ययन रिपोर्ट।
  • गेस्ट फैकल्टी को टूटती दिख रही हरियाणा की तरह सामाजिक सुरक्षा की आस।
  • उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी भी अध्ययन रिपोर्ट को लेकर नहीं संजीदा।

News in Detail

सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई का भार संभाल रहे अतिथि विद्वान एक बार फिर उच्च शिक्षा विभाग के झांसे में आ गए हैं। हरियाणा सरकार की नीतियों के अध्ययन के लिए अतिथि विद्वानों की मांग पर गठित समिति 9 दिन बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाई है। विभाग की समिति की देरी और अधिकारियों की बेरुखी से हजारों अतिथि विद्वान हताश हैं। उन्हें वेतन और बार-बार फॉलेन आउट होने की मुश्किल से निजात मिलने की उम्मीद भी टूटती दिख रही है।

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गेस्ट फैकल्टी के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं

मध्यप्रदेश में गेस्ट फैकल्टी के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं हैं। उन्हें कभी भी कॉलेजों में नियुक्त और फॉलेन आउट कर दिया जाता है। इस वजह से अतिथि विद्वान सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार से सवाल करते आ रहे हैं।गेस्ट फैकल्टी की निर्धारित वेतन और पढ़ाने की अवधि की मांग पर सरकार से हर बार आश्वासन ही मिलता रहा है।

हरियाणा सरकार द्वारा किए गए गेस्ट फैकल्टी के प्रावधान मध्य प्रदेश में लागू करने की मांग भी लंबे समय से की जा रही है। इसको देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने 2 जनवरी को समिति गठित की थी। पहले तीन सदस्यीय समिति बनाई गई जिसे 6-7 जनवरी को अपनी रिपोर्ट उच्च शिक्षा आयुक्त को सौंपनी थी।

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रिपोर्ट नहीं आई

समिति कुछ काम आगे बढ़ा पाती उससे पहले ही अचानक विभाग ने समिति में बदलाव का आदेश जारी कर दिया। समिति में सदस्यों की संख्या 3 से बढ़ाकर 7 करने के साथ ही संयोजक भी बदल दिए गए। नई समिति से 7 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने का समय तय था। निर्धारित समय बीत चुका है, लेकिन 9 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं आई। विभाग ने रिपोर्ट तलब करना भी जरूरी नहीं समझा।

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बदलाव करने से अटक गया अध्ययन

उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त आईएएस प्रबल सिपाहा के आदेश पर 2 जनवरी को 3 सदस्यीय समिति गठित की गई। डॉ. अनिल राजपूत को संयोजक और डॉ. अजय कुमार भारद्वाज व डॉ. एचके गर्ग को सदस्य नियुक्त किया गया।

5 जनवरी को समिति संयोजक बदल दिया गया। डॉ.राजपूत की जगह एमएलबी कॉलेज की प्रोफेसर डॉ.भारती जैन को यह जिम्मेदारी दी गई। समिति में डॉ. अजय कुमार भारद्वाज, डॉ. एचके गर्ग के अलावा चार नए सदस्य शामिल किए गए। डॉ. सीमा हार्डिकर, डॉ. डेनियल ग्लांस, डॉ. महेन्द्र मेहरा और डॉ. भूपेन्द्र झा को सदस्य बनाया गया। तीन दिन में दो बार समिति के बदलाव से अध्ययन अटक गया है।

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क्या है हरियाणा का गेस्ट फैकल्टी पैटर्न

  1. 58 वर्ष की आयु के बाद भी कॉलेज में नियुक्ति पर रोक नहीं
  2. हर सत्र में हटाने, बीच में फॉलेन आउट करने की मुश्किल नहीं
  3. न्यूनतम सेवा की स्पष्ट शर्तें
  4. कम से कम 5 वर्ष की सेवा का निर्धारित अवसर
  5. एक शैक्षणिक सत्र में 240 कार्य दिवस
  6. समान कार्य के लिए समान वेतन
  7. 57,700 रुपए निर्धारित मासिक वेतन
  8. केंद्र के समान मंहगाई राहत यानी डीआर
  9. सुरक्षा के लिए वैधानिक प्रावधान
  10. वेतन में वृद्धि के भी अवसर

उदासीनता भरा है विभाग का रवैया

उच्च शिक्षा विभाग की समिति की रिपोर्ट पर द सूत्र ने ओएसडी संतोष भार्गव से बात की। उन्होंने इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनका साफ कहना आ अभी समिति ने इस पर काम पूरा नहीं किया है। इसलिए रिपोर्ट कब तक आएगी यह कहा नहीं जा सकता।

जब उनसे निर्धारित अवधि के बाद रिपोर्ट पर सवाल किया गया, तो उनका रवैया उदासीन था। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी नहीं है और वे दूसरे काम में व्यस्त हैं, इसलिए कुछ नहीं कहना चाहते।

अब आगे क्या

उच्च शिक्षा विभाग की समिति की अध्ययन रिपोर्ट प्रदेश के अतिथि विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण है। नियमित प्राध्यापकों की कमी के बीच प्रदेश के सरकारी कॉलेजों की अध्यापन व्यवस्था संभाल रहे। अतिथि विद्वानों का कहना है उनमें से अधिकांश 20 साल से भी पुराने हैं।

ज्यादातर गेस्ट फैकल्टी की उम्र भर्ती की पात्रता से अधिक है। वे हरियाणा सरकार की नीतियों का समर्थन कर रहे हैं। यदि ऐसे प्रावधान प्रदेश में लागू होते हैं, तो वे सामाजिक सुरक्षा देने में मददगार होंगे।





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