हाईकोर्ट से पीडब्ल्यूडी-पीएचई कर्मचारियों को बड़ी राहत, मिलेगा बकाया वेतन

Ratan Kumar Mishra | Aug 13, 2026, 16:54 IST
Share
gwalior-highcourt-minimum-wage-relief
gwalior-highcourt-minimum-wage-relief

ग्वालियर हाईकोर्ट ने न्यूनतम वेतन मामले में सरकार की याचिकाएं खारिज कीं। पीडब्ल्यूडी और पीएचई विभाग के कर्मचारियों को बकाया वेतन और क्षतिपूर्ति मिलने का रास्ता साफ हुआ।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ से बड़ी राहत मिली है। यह राहत लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों से जुड़ी है। इसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। मामला न्यूनतम वेतन के भुगतान से जुड़ा हुआ था। सरकार ने श्रम प्राधिकारी के आदेश को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने सरकार की रिट याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। साथ ही क्षतिपूर्ति राशि मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलील क्यों नहीं मानी

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके की एकल पीठ ने सुनवाई की। सरकार ने सहायक श्रम आयुक्त के अधिकार पर सवाल उठाया था। सरकार ने धारा 20 के तहत अधिकार को चुनौती दी थी। उसने कहा कि सहायक श्रम आयुक्त मामले नहीं सुन सकते। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं को भी ध्यान में रखा। इन अधिसूचनाओं का संबंध 1998 और 2000 से है। इनसे न्यूनतम वेतन मामलों की सुनवाई का ढांचा तय हुआ।

कर्मचारियों को किस भुगतान का इंतजार था

मामला कम मिले न्यूनतम वेतन की भरपाई से जुड़ा था। कर्मचारियों को निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम राशि मिली थी। श्रम प्राधिकारी ने वेतन अंतर चुकाने का आदेश दिया था। इसके साथ क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश हुआ था। प्रस्तुत मामले में क्षतिपूर्ति पांच गुना बताई गई है। सरकार ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इससे कर्मचारियों के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

पीडब्ल्यूडी और पीएचई कर्मचारियों को क्या फायदा होगा

इस फैसले का असर सैकड़ों कर्मचारियों पर पड़ सकता है। इनमें लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। कर्मचारियों को पुराने वेतन अंतर का भुगतान मिल सकता है। क्षतिपूर्ति राशि मिलने का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि हर कर्मचारी की देय राशि अलग हो सकती है। यह राशि संबंधित मामले के रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।

न्यूनतम वेतन कानून में धारा 20 क्या कहती है

न्यूनतम वेतन कानून में धारा 20 दावों से जुड़ी है। इसके तहत कम वेतन की शिकायत सुनी जा सकती है। इसके लिए सरकार संबंधित अधिकारी को अधिकार दे सकती है। यही अधिकार इस मामले में मुख्य विवाद बना था। भारत सरकार के कानून पोर्टल पर धारा 20 दर्ज है,इस प्रावधान में वेतन संबंधी दावों की सुनवाई का उल्लेख है।

मध्य प्रदेश में इस अधिकार को लेकर पहले भी विवाद हुआ है। 2024 में हाईकोर्ट ने इसी मुद्दे पर फैसला दिया था।उस मामले में सहायक श्रम आयुक्त की भूमिका पर सवाल था।कोर्ट ने मामले को सक्षम अधिकारी के पास भेजा था।

1998 और 2000 की अधिसूचनाएं क्यों अहम हैं

इस मामले में दो पुरानी अधिसूचनाएं अहम मानी गई हैं। पहली अधिसूचना 26 जून 1998 की बताई गई है। दूसरी अधिसूचना 6 नवंबर 2000 की बताई गई है। इनसे न्यूनतम वेतन मामलों की सुनवाई जुड़ी थी।बाद में श्रम विभाग ने अधिकारों को लेकर प्रक्रिया तय की। 2024 के एक हाईकोर्ट फैसले में यह मुद्दा सामने आया था। उस फैसले में 2000 की अधिसूचना का भी उल्लेख हुआ। इससे साफ है कि अधिकार का सवाल नया नहीं है।

हाईकोर्ट के फैसले का बड़ा असर क्या है

इस फैसले से कर्मचारियों को कानूनी राहत मिली है। सरकार की चुनौती खारिज होने से भुगतान का रास्ता खुला है।अब संबंधित विभागों को आदेश के अनुसार आगे बढ़ना होगा। कर्मचारियों को अपने मामलों के अनुसार भुगतान मिल सकता है। इसमें बकाया वेतन और क्षतिपूर्ति शामिल हो सकती है।

फैसला न्यूनतम वेतन के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण है। यह मामला सरकारी विभागों में काम करने वालों से जुड़ा है। इसका असर दूसरे समान मामलों पर भी पड़ सकता है। फिर भी हर मामले का फैसला उसके रिकॉर्ड पर निर्भर होगा।

कर्मचारियों के लिए इस फैसले का सीधा मतलब

सीधे शब्दों में कर्मचारियों का बकाया अब अटकना मुश्किल होगा। कोर्ट ने सरकार की चुनौती को स्वीकार नहीं किया है। इससे पुराने भुगतान विवाद को आगे बढ़ाने का रास्ता मिला है।

कर्मचारियों को अपने मामले की स्थिति जाननी होगी। भुगतान की राशि संबंधित आदेश के अनुसार तय होगी। इसलिए सभी कर्मचारियों को समान राशि मिलना जरूरी नहीं है। सबसे अहम बात वेतन अंतर के भुगतान से जुड़ी है। इसी वजह से कर्मचारियों में फैसले से राहत की उम्मीद है।

यह खबरें भी पढ़ें...

दूसरी पत्नी के बेटे को भी अनुकंपा नियुक्ति का हक, लेकिन हाईकोर्ट ने रखी ये शर्त

हाईकोर्ट की रोक, जिला कोर्ट से डॉ. विनोद भंडारी की 100 करोड़ की जमीन मुक्त, अपील की तैयारी

आईपीएस डांगी केस में गृह सचिव को हाईकोर्ट का नोटिस, पीड़िता ने की ये मांग

बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल! SC की सख्ती, कार-बाइक के बीमा नियम भी बदले

याचिका खारिज

Tags:
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • भारत सरकार
  • याचिका खारिज
  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
  • लोक निर्माण विभाग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा