बिना घूस सरकारी काम नहीं: 19 महीनों में पकड़े गए 37 रिश्वतखोरी अफसर
Amresh Kushwaha | Aug 30, 2026, 13:02 IST
बिना घूस सरकारी काम नहीं
लोकायुक्त ने 19 महीनों में 37 रिश्वतखोर अफसरों को पकड़ा है। जानें कैसे पटवारी से लेकर नगर निगम के अधिकारी तक घूस लेते धरे गए। पूरी रिपोर्ट पढ़ें...
समझें क्या है पूरा मामला...
- ग्वालियर में लोकायुक्त ने 19 महीनों में 37 रिश्वतखोर अधिकारी पकड़े।
- सबसे ज्यादा मामले राजस्व विभाग और नगर निगम से जुड़े हैं।
- एक पटवारी ने रिश्वत लेने के लिए निजी ऑफिस खोल रखा था।
- नगर निगम का अफसर रिटायरमेंट से एक दिन पहले रिश्वत लेते पकड़ा गया।
- लोकायुक्त एसपी ने लोगों से बिना डर शिकायत करने की अपील की।
प्राइवेट ऑफिस में घूसखोरी
आरोप है कि पटवारी ने इसके बदले 15 हजार रुपए मांगे। पहले ही 3500 रुपए ली जा चुकी थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने ट्रैप लगाया और पटवारी को रंगे हाथ पकड़ लिया। जांच में सामने आया कि रकम लेने में उसके पति कृष्णकांत की भूमिका भी थी। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हुई है।
रिटायरमेंट से पहले रिश्वत
मामला ठेकेदार के करीब 36 लाख रुपए के भुगतान से जुड़ा था। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के लिए एक प्रतिशत कमीशन यानी 36 हजार रुपए मांगे गए थे। ठेकेदार पहले ही 30 हजार रुपए दे चुका था। बातचीत रिकॉर्ड होने पर उसने लोकायुक्त में शिकायत की। सत्यापन के बाद केमिकल लगे 6 हजार रुपए देकर ठेकेदार को भेजा गया। जैसे ही कटारे ने रकम जेब में रखी, टीम ने उन्हें दबोच लिया। नगर निगम के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है।
आम काम के लिए भी घूस
पिछोर में पटवारी दिग्विजय ने किसान शंकर लोधी से नामांतरण के लिए 25 हजार रुपए मांगे थे। इसमें से दो हजार रुपए एडवांस लिए गए थे। बाकी 23 हजार रुपए वसूलते हुए ट्रैप हुआ। इसी तरह पटवारी अमन शर्मा ने किसान संजय सिंह से नाम संशोधन के लिए 42 हजार रुपए मांगे। 14 हजार रुपए लेते हुए वह पकड़ा गया। कई शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पैसे नहीं देने पर उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। परेशान होकर लोगों ने लोकायुक्त से संपर्क किया।
महिला कर्मचारी भी शामिल
विभागवार आंकड़े क्या कहते हैं
कृषि विभाग में भी दो मामले सामने आए। वन विभाग, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग और नापतौल विभाग में एक-एक अफसर पकड़ा गया। कुल मिलाकर नौ विभागों के 37 अधिकारी-कर्मचारी 19 महीनों में रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि जमीन से जुड़े काम में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार हो रहा है।
एक्सपर्ट की राय
यहां सीमांकन और नामांतरण जैसे कामों के बदले रिश्वत मांगने की शिकायतें सबसे ज्यादा मिली थीं। उनका कहना है कि लोकायुक्त हर शिकायत की गंभीरता से जांच करता है और सत्यापन के बाद ही ट्रैप कार्रवाई की जाती है।
क्या करेगी कार्रवाई अब
असली चुनौती ऐसी व्यवस्था बनाने की है जहां आम आदमी को छोटे कामों के लिए जेब ढीली न करनी पड़े। लोकायुक्त पुलिस ने साफ अपील की है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगे तो लोग बिना डर शिकायत दर्ज कराएं। सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह खबर क्यों जरूरी है
इससे आम लोगों को यह भी पता चलता है कि लोकायुक्त जैसी संस्था कैसे काम करती है और शिकायत कैसे दर्ज कराई जा सकती है। खबर पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है और सरकारी आंकड़ों तथा अधिकारी के बयान से सत्यापित है। इसमें किसी की निजता का उल्लंघन नहीं किया गया और सभी जानकारी सार्वजनिक हित में दी गई है। यह खबर लोगों को जागरूक बनाती है कि वे रिश्वत मांगे जाने पर चुप न रहें।
ये खबरें भी पढ़िए...
MP में कैंसर का कहर: हर दिन 133 की मौत, 80 हजार से ज्यादा मिले नए मरीज
मध्य प्रदेश में नहीं थम रहा बाल विवाह, हर 5वीं बेटी की कम उम्र में हो रही शादी
ई-अटेंडेंस पर जल्द आएगा नया सर्कुलर, देरी पर संकुल प्राचार्यों को मिलेगा राहत देने का अधिकार
आधी पढ़ाई बीती पर नहीं मिली ड्रेस, अब 56 लाख छात्रों के खाते में आएगा यूनिफॉर्म का पैसा
16 साल बाद भी प्लॉट नहीं मिला: मंगलम बिल्डर पर 1.10 लाख रुपए हर्जाना, 11 लाख 9% ब्याज सहित लौटाने के आदेश
By Mukesh Sharma
जबलपुर में 17 पटवारी सस्पेंड, 164 को नोटिस, काम में लापरवाही पर प्रशासन का बड़ा एक्शन
By Sumit Kumar
दिल्ली में CJP के प्रोटेस्ट को देखते हुए जनशताब्दी-मेवाड़ एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें रद्द, देखें पूरी लिस्ट
By Jageshwar prasad
निलंबित जेलर दिव्या चौधरी को अजमेर से जयपुर जेल भेजा, देर रात किया शिफ्ट, सुरक्षा कारणों से लिया फैसला
By Jyoti Mahender Bhardwaj
सरकारी फरमान से खलबली: नवा रायपुर में कर्मचारियों की सिटी बस सेवा बंद करने की तैयारी
By VINAY VERMA
डिग्री हाथ में, नौकरी का इंतजार: क्या राजस्थान का नया यूथ बजट दूर कर पाएगा 33% शिक्षित बेरोजगारों का संकट?
By Raghvendra Singh Rathore
हाईकोर्ट फैसले में लिखा- मप्र में चार OBC सीएम, 25 फीसदी मंत्री, प्रतिनिधित्व पर्याप्त, UR से भी मिलते हैं पद
By Sanjay Gupta