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News In Short
हरदा के एक गांव में लाइनमैन पर साल 2022 से दिसंबर 2025 तक अवैध वसूली का आरोप है।
बकाया बिल के कारण बिजली विभाग ने पूरे गांव के कनेक्शन काट दिए।
129 उपभोक्ताओं पर विभाग का करीब 19 लाख रुपए का बिल बकाया निकला है।
ग्रामीण हर महीने लाइनमैन को 200 रुपए दे रहे थे, जिसे वे अपना असली बिल समझ रहे थे।
एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
News In Detail
Harda. मध्य प्रदेश के हरदा जिले से एक बड़ा विश्वासघात सामने आया है। यहां के सैकड़ों ग्रामीण पिछले तीन साल से अपने बिजली बिल सही समय पर जमा कर रहे थे, लेकिन उनके नाम पर जमा हुआ बिल रिकॉर्ड में नहीं था।
यह तब सामने आया जब बकाया बिल न होने के बावजूद सैकड़ों उपभोक्ताओं का कनेक्शन काट दिया गया और उनके घरों में अंधेरा छा गया।
घटना तब सामने आई, जब अचानक पूरे गांव की बिजली चली गई। इसने इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया। नाराज ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जांच की मांग की।
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बिजली बिल देने के बाद भी अंधेरे में डूबा गांव
बड़वानी गांव के परेशान और आक्रोशित ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने एसडीएम अशोक कुमार डेहरिया को आपबीती (लाइनमैन पर आरोप) सुनाते हुए बताया कि वे तो हर महीने पैसा दे रहे थे, फिर यह अंधेरा क्यों?
2022 से चल रहा था 200 रुपए वसूली का सिलसिला
ग्रामीणों के मुताबिक, साल 2022 से लेकर दिसंबर 2025 तक, गांव का लाइनमैन हर महीने हर घर से 200 रुपए वसूलता रहा। ग्रामीणों को लगा कि यह उनका मासिक बिजली बिल है।
आरोप है कि लगभग तीन साल तक लाइनमैन ने ग्रामीणों के भरोसे का फायदा उठाया और अपनी जेब भरता रहा। वहीं विभाग के खाते में एक रुपया भी जमा नहीं हुआ।
129 उपभोक्ताओं पर 19 लाख का कर्ज
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब विभाग की समाधान योजना के तहत नोटिस बांटे गए। नोटिस देखते ही ग्रामीणों के होश उड़ गए। गांव के करीब 129 उपभोक्ताओं पर कुल 19 लाख रुपए का बकाया बिल निकला।
जो बिजली का बिल वे हर महीने देते थे, वह विभाग की फाइलों में 100% बकाया दिख रहा था। जब भारी रकम जमा नहीं हुई, तो बिजली विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए पूरी सप्लाई ही बंद कर दी।
नियम और जांच के बीच फंसी जनता
बिजली कंपनी के डीजीएम कमलकांत सिंह ने साफ किया कि बड़वानी गांव का रिकॉर्ड पूरी तरह से डिफॉल्टर श्रेणी में है। क्योंकि किसी भी उपभोक्ता ने सीधे विभाग में बिल जमा नहीं किया। इसलिए तकनीकी रूप से सप्लाई रोकना जरूरी था। दूसरी ओर, एसडीएम अशोक कुमार डेहरिया ने ग्रामीणों को इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। अब सवाल यह है कि क्या इन गरीब ग्रामीणों को उनका पैसा वापस मिलेगा, या फिर उन्हें दोबारा 19 लाख का बोझ उठाना पड़ेगा?
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