भोपाल वन विहार के वाइल्ड कैफे विवाद पर आया HC का फैसला, श्रुति जैन की याचिका खारिज

Neel Tiwari | Jun 30, 2025, 21:39 IST
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HC decision
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टेंडर में एक विशेष शर्त थी, जिसे सेक्शन 8 कहा गया, और इसी के चलते मामला उलझा। इस शर्त के तहत, ऊंची बोली चाहे कोई भी लगाए, पहले से संचालन कर रहे ठेकेदार को एक मौका दिया जाएगा।

MP NEWS: भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क के ‘चीकू गेट’ पर स्थित ‘वाइल्ड कैफे’ के टेंडर प्रक्रिया में विवाद सामने आया। इस मामले में शिव शक्ति दाल मिल की प्रोपराइटर श्रुति जैन की याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि निविदा की पुरानी शर्तें गलत थीं और पारदर्शिता की कमी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि नए सिरे से आमंत्रित की गई निविदा पारदर्शी है। इसमें सबसे ऊंची बोली लगाने वाले अश्विन रिचहारिया पात्र हैं।

चीकू गेट पर है वाइल्ड कैफे

16 दिसंबर 2024 को वन विभाग, भोपाल द्वारा वाइल्ड कैफे के संचालन हेतु नया टेंडर (NIT) जारी किया गया था। पहले से ही कैफे को संचालित कर रहे अश्विन रिछारिया और शिव शक्ति दाल मिल की मालिक श्रुति जैन इस टेंडर में दो प्रमुख बोली लगाने वाले थे। जब टेंडर खोला गया तो शिव शक्ति दाल मिल ने 21 लाख 11 रूपये की बोली लगाई, जबकि अश्विन रिचहारिया की बोली 20 लाख 413 रूपये थी। इस आधार पर शिव शक्ति दाल मिल की बोली सबसे ऊंची थी और उन्हें 28 जनवरी 2025 को अनुबंध निष्पादित करने हेतु आमंत्रित कर लिया गया।

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कॉन्ट्रैक्ट का सेक्शन 8 बना अड़ंगा

टेंडर में एक विशेष शर्त थी, जिसे सेक्शन 8 कहा गया, और इसी के चलते मामला उलझा। इस शर्त के तहत, ऊंची बोली चाहे कोई भी लगाए, पहले से संचालन कर रहे ठेकेदार को एक मौका दिया जाएगा। उसे यह देखना होगा कि वह बोली की बराबर राशि दे सकता है या नहीं।

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यह थी सेक्शन 8 की शर्त

दिनांक 03-01-2025 को प्राप्त निविदा में उच्चतम दर प्राप्त होने पर, पूर्व अनुबंधित ठेकेदार को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि वह नई बोली को मैच कर सके, तो उसे पांच वर्षों के लिए नया अनुबंध दिया जाएगा। यदि ठेकेदार असहमत होता है, तो उच्चतम दर वाले नए ठेकेदार को अनुबंध हेतु आमंत्रित किया जाएगा।

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बोली मैच करने तैयार थे अश्विन रिछारिया

अश्विन रिछारिया ने कोर्ट में दावा किया कि उन्होंने 16, 17 और 20 जनवरी 2025 को विभाग को लिखित रूप से सूचित किया था कि वे ऊंची बोली को मैच करने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद, विभाग ने उन्हें सेक्शन का लाभ दिए बिना सीधे शिव शक्ति दाल मिल से अनुबंध कर लिया। इसके खिलाफ, अश्विन ने 23 जनवरी 2025 को जबलपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका (W.P. No. 2948/2025) दायर की।

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सेक्शन 8 का नहीं हुआ था पालन

कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच की और पाया कि अश्विन रिछारिया द्वारा दिए गए तीनों पत्र याचिका के साथ पहले ही लगाए गए थे और उनकी तारीखें वास्तविक थीं। याचिका 21 जनवरी 2025 को शपथपत्र के साथ दाखिल की गई थी। यानी उस समय तक शिव शक्ति दाल मिल को कोई अनुबंध नहीं दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सेक्शन 8 लागू होता, तो अश्विन रिचहारिया को वह अनुबंध मिलना चाहिए था, क्योंकि उन्होंने समय रहते अपनी मंशा जाहिर कर दी थी।

अनुचित लाभ देने वाला था सेक्शन 8

कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि खंड 8 मौजूदा ठेकेदार को अनुचित लाभ देता है। इससे प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया बाधित होती है। मौजूदा ठेकेदार न्यूनतम बोली लगाकर इंतजार कर सकता है। फिर वह सबसे ऊंची बोली देखकर उसे मैच कर अनुबंध ले सकता है। इससे राजस्व का नुकसान होता है और अन्य प्रतियोगियों की बोली लगाने की इच्छा कमजोर होती है। उन्हें पता होता है कि अधिकतम बोली को मैच करके पुराना ठेकेदार ही अनुबंध ले सकता है।

नए टेंडर में हुआ ओपन कंपटीशन

कोर्ट ने सेक्शन 8 को हटाने और नया टेंडर जारी करने की अनुमति दी। इसके बाद, वन विभाग ने 21 मई 2025 को नया टेंडर प्रकाशित किया। इस बार अश्विन रिछारिया ने टेंडर में भाग लिया और 46 लाख 34 हजार 155 रुपये की बोली लगाकर वाइल्ड कैफे का संचालन जीत लिया। वहीं, शिव शक्ति दाल मिल ने इस बार नए टेंडर में भाग नहीं लिया।

श्रुति जैन की अपील खारिज

श्रुति जैन ने पुराने आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की डिवीजनल बेंच में अपील दायर की थी। बेंच ने माना कि सेक्शन 8 को हटाना सही था और नया टेंडर पारदर्शी तथा जनहित में था। कोर्ट ने कहा कि नए टेंडर में बोली की राशि पहले से दोगुनी है, जो यह दर्शाता है कि खुले प्रतिस्पर्धा से राजस्व का अधिक फायदा हो रहा है। कोर्ट ने अपील को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया और श्रुति जैन द्वारा जमा की गई सुरक्षा राशि तत्काल लौटाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह तय किया कि भोपाल वन विहार के चीकू गेट पर वाइल्ड कैफे का संचालन अश्विन रिछारिया करेंगे।

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