कच्ची उम्र का प्यार कहीं पहुंचा न दे जेल, हाईकोर्ट ने जताई POCSO एक्ट को लेकर चिंता
Neel Tiwari | Sept 22, 2026, 21:41 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने POCSO मामलों को लेकर बड़ी चिंता जताई है। कोर्ट ने कानून की जानकारी की कमी पर ध्यान दिया है। कई मामलों में किशोर उम्र के प्रेम संबंध आपराधिक केस में बदल रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- POCSO कानून 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर लागू होता है।
- सहमति के बावजूद नाबालिग से संबंध पर केस दर्ज हो सकता है।
- हाईकोर्ट ने कानून की जानकारी की कमी पर चिंता जताई।
- अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने जागरूकता बढ़ाने की मांग की।
- अब समिति नंबर 30 POCSO के पालन की निगरानी करेगी।
आरोपी किशोर उम्र का हो सकता है। लेकिन कानून के तहत गंभीर सजा का सामना करना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसी स्थिति पर चिंता जताई है।
किशोर उम्र में दोस्ती और आकर्षण आम बात हो सकती है। लेकिन उम्र की कानूनी सीमा स्थिति बदल देती है। लड़की की उम्र 18 साल से कम होने पर POCSO लागू हो सकता है।
ऐसे मामलों में सहमति का असर कानून के तहत सीमित हो जाता है। कई मामलों में आरोपी भी किशोर उम्र के आसपास होता है। हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। कोर्ट ने जागरूकता को इस समस्या का अहम हिस्सा माना है।
अमिताभ गुप्ता ने उठाया जागरूकता का सवाल
अमिताभ गुप्ता का कहना था कि कानून की जानकारी बड़े स्तर पर दी जानी चाहिए। खासकर किशोरों और उनके माता-पिता तक यह जानकारी पहुंचनी चाहिए। इससे कानून की सीमा को लेकर भ्रम कम हो सकता है।
बालिग होने में कुछ महीने बाकी, फिर भी कानून लागू
इस उम्र में कई फैसले पूरी समझ से नहीं लिए जाते। सोशल मीडिया ने किशोरों के बीच संपर्क भी आसान किया है। ऑनलाइन दोस्ती कई बार मुलाकात तक पहुंच जाती है। इसके बाद मामला POCSO केस में बदल सकता है।
कानून की जानकारी न होना बन रहा बड़ी समस्या
कई आरोपियों की उम्र 19 से 22 साल बताई गई है। कोर्ट ने जागरूकता की कमी को गंभीर कारण माना। कोर्ट के अनुसार कई लोगों को कानून की पूरी जानकारी नहीं होती।
प्रेम संबंध में घर छोड़ना भी बन सकता है केस
कई बार आरोपी और पीड़िता दोनों उम्र में काफी करीब होते हैं। लेकिन कानून उम्र की तय सीमा के आधार पर लागू होता है। इसलिए किशोरों और परिवारों को इसकी जानकारी जरूरी है।
सरकार के जागरूकता कार्यक्रम, कोर्ट ने चिंता जताई
एक एनजीओ के जरिए 4 लाख 50 हजार लोगों तक पहुंच बताई गई। इसके बावजूद मामले लगातार सामने आने की बात कोर्ट में रखी गई। इससे जागरूकता की पहुंच और असर पर सवाल उठता है। कोर्ट ने इसी मुद्दे को आगे देखने की जरूरत मानी।
अमिताभ गुप्ता अब कोर्ट की मदद भी करेंगे
चिन्मय मिश्रा की याचिका भी इसी प्रक्रिया में शामिल हुई है। मुख्य मामला डब्ल्यूपी नंबर 39997/2024 है। यह मामला POCSO कानून के पालन से जुड़ा है। मुख्य याचिका पर आगे भी सुनवाई जारी रहेगी।
समिति नंबर 30 करेगी POCSO कानून की निगरानी
रजिस्ट्रार को मामला समिति की अगली बैठक में रखने को कहा गया है। बैठक की कार्रवाई समय-समय पर हाई कोर्ट के सामने रखी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी।
सवाल सिर्फ सजा का नहीं, सही जानकारी पहुंचाने का है
किशोरों को उम्र से जुड़े कानूनी नियम पता होने चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में इसकी जरूरत और बढ़ गई है। अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की याचिका ने इसी मुद्दे को सामने रखा। अब समिति की निगरानी से आगे की दिशा तय होगी।
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