उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही पर फूटा प्राध्यापकों का गुस्सा, जुलाई से आंदोलन
Ramanand Tiwari | Jun 07, 2026, 23:17 IST
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एमपी में प्रांतीय प्राध्यापक संघ ने सरकार को 30 जून 2026 तक डेडलाइन दी है। संघ ने कहा है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 1 जुलाई से प्रदेशभर के हजारों शिक्षक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।
मध्यप्रदेश में लंबित मांगों पर सरकार और उच्च शिक्षा विभाग की उदासीनता बढ़ रही है। प्रांतीय प्राध्यापक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 30 जून तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेशभर के हजारों शिक्षक चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। इस फैसले से शिक्षा विभाग और शासन में हलचल बढ़ गई है। संघ का आरोप है कि वर्षों से ज्ञापन और आवेदन दिए गए, लेकिन केवल आश्वासन मिले। विभागीय निष्क्रियता और लचर कार्यप्रणाली के कारण शिक्षक असंतोष में हैं।
प्राध्यापक संघ ने चेतावनी दी है कि एक जुलाई से सभी महाविद्यालयों में शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इसके बाद आंदोलन को और तेज करने की रणनीति तैयार की गई है। यह रणनीति समय-समय पर लागू की जाएगी।
संघ की प्रमुख मांगों में बैकलॉग सहायक प्राध्यापकों को समय पर पदोन्नति, खेल अधिकारियों और ग्रंथपालों को शिक्षक का दर्जा, लंबित कैरियर प्रोन्नति प्रकरणों का निपटारा, सेवानिवृत्त शिक्षकों के देयकों का भुगतान और नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठकें शामिल हैं।
प्रांतीय प्राध्यापक संघ ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन प्रदेशव्यापी हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी शासन और उच्च शिक्षा विभाग की होगी।
बैकलॉग सहायक प्राध्यापकों को समयबद्ध पदोन्नति लाभ।
क्रीड़ा अधिकारी एवं ग्रंथपालों को शिक्षक पदनाम और पे-मैट्रिक्स-14।
लंबित कैरियर प्रोन्नति और विभागीय परीक्षाओं का शीघ्र निपटारा।
सेवानिवृत्त शिक्षकों के स्वत्वों का तत्काल भुगतान।
प्रत्येक तीन माह में परामर्शदात्री समिति की बैठक।
प्रांतीय प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष आनंद शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांगों पर लगातार अनदेखी की जा रही है। यदि 30 जून 2026 तक समाधान नहीं हुआ तो 1 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदेशभर के सरकारी महाविद्यालयों में हजारों शिक्षक कार्यरत हैं। यदि आंदोलन शुरू हुआ तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। जुलाई का महीना नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत का होता है। ऐसे में यह आंदोलन शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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काली पट्टी बांधकर करेंगे काम
संघ की प्रमुख मांगों में बैकलॉग सहायक प्राध्यापकों को समय पर पदोन्नति, खेल अधिकारियों और ग्रंथपालों को शिक्षक का दर्जा, लंबित कैरियर प्रोन्नति प्रकरणों का निपटारा, सेवानिवृत्त शिक्षकों के देयकों का भुगतान और नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठकें शामिल हैं।
प्रांतीय प्राध्यापक संघ ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन प्रदेशव्यापी हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी शासन और उच्च शिक्षा विभाग की होगी।
क्या है प्रमुख मांगें
क्रीड़ा अधिकारी एवं ग्रंथपालों को शिक्षक पदनाम और पे-मैट्रिक्स-14।
लंबित कैरियर प्रोन्नति और विभागीय परीक्षाओं का शीघ्र निपटारा।
सेवानिवृत्त शिक्षकों के स्वत्वों का तत्काल भुगतान।
प्रत्येक तीन माह में परामर्शदात्री समिति की बैठक।
क्या बोले प्रांतीय प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष
छात्रों पर भी पड़ेगा असर
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