हिलटॉप सोसाइटी में धोखाधड़ी: EOW ने दर्ज की FIR, 40 साल से ठगे जा रहे सदस्य

Jitendra Shrivastava | Jun 19, 2026, 17:34 IST
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भोपाल हिलटॉप सोसायटी पर FIR
Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL. भोपाल की हिलटॉप गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों पर EOW ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। 40 साल पहले पैसे लेने के बाद भी सैकड़ों सदस्यों को प्लॉट नहीं दिए गए।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • 40 साल बाद भी नहीं मिला अपना प्लॉट, अब EOW का एक्शन।
  • घर का सपना दिखाकर करोड़ों लूटे, सोसाइटी पर FIR दर्ज।
  • रजिस्ट्री हुई, पैसे गए, पर जमीन पर कब्जा आज तक नहीं।
  • भोपाल की हिलटॉप सोसाइटी का 40 साल पुराना काला सच।
  • असली कागज रख लिए, फोटोकॉपी थमाई, EOW ने खोली पोल।
भोपाल की हिलटॉप गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों पर EOW ने बड़ा एक्शन लिया है। संस्था ने 1986 में लोगों को घर का सपना दिखाकर करोड़ों रुपए जुटाए। 40 साल बाद भी सैकड़ों सदस्यों को उनके प्लॉट नहीं मिले।

EOW की जांच में रजिस्ट्री में हेराफेरी और असली दस्तावेज छुपाने की साजिश का खुलासा हुआ। तत्कालीन अध्यक्ष सत्येन्द्र अग्रवाल और वर्तमान अध्यक्ष अनीता सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ FIR (First Information Report, प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई है।

1986 में बोया था ठगी का बीज

हिलटॉप गृह निर्माण सहकारी संस्था का पंजीयन 11 दिसंबर 1986 को हुआ था। पंजीयन क्रमांक DRB/508 के तहत दर्ज इस संस्था का गठन उस समय राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किया था।

तत्कालीन तहसीलदार सत्येन्द्र अग्रवाल इसके संस्थापक सदस्यों में थे। बाद में वे संस्था के अध्यक्ष भी बने। शुरुआत में करीब 200 से 250 लोगों को सदस्यता दी गई। उनसे प्लॉट देने के नाम पर लगभग 3 से 4 करोड़ रुपए जुटाए गए।

जमीन खरीदी, प्लॉट कभी नहीं दिए

जुटाई गई रकम से कोटरा सुल्तानाबाद, बरखेड़ी खुर्द, बावड़िया कलां और प्रेमपुरा में जमीन खरीदी गई। EOW (Economic Offences Wing-आर्थिक अपराध शाखा) की जांच के अनुसार संस्था ने करीब 25 एकड़ जमीन 23 लाख रुपए में खरीदी।

इसके अलावा 30 एकड़ और जमीन के लिए करीब 12 लाख रुपए अग्रिम के रूप में चुकाए गए। इतनी जमीन होने के बावजूद सदस्यों को प्लॉट नहीं दिए गए। जब भी पूछा गया, एक ही जवाब मिला- जमीन पर अदालती विवाद चल रहा है।

असली दस्तावेज रखे, नकली थमाए

जांच में सामने आया कि संस्था ने सदस्यों के नाम रजिस्ट्री (विक्रय पत्र) तो करा दी। लेकिन असली दस्तावेज अपने पास रख लिए। सदस्यों को केवल फोटोकॉपी दी गई। इसी का फायदा उठाकर आगे चलकर सोसाइटी के रिकॉर्ड में फेरबदल की गई।

hilltop society bhopal
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प्लॉट नंबर बदले, सदस्यता भी बदली

EOW की जांच में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के चौंकाने वाले सबूत मिले।

सदस्यता क्रमांक 763 के एक सदस्य के नाम 22 मई 1993 को खसरा क्रमांक 262/263 में भूखंड क्रमांक 177 की रजिस्ट्री हुई थी। लेकिन वर्ष 2023-24 की आवंटन सूची में वही भूखंड नंबर 178 दिखाया गया। भूखंड क्रमांक 177 किसी दूसरे व्यक्ति के नाम चढ़ा दिया गया।

सदस्यता क्रमांक 509 के एक सदस्य से भूखंड की तय कीमत 21 हजार रुपए के बदले कुल 90 हजार रुपए वसूले गए। बाद में वह भूखंड भी आवंटन सूची में किसी और के नाम दिखाया गया। यहां तक कि सदस्यता क्रमांक 509 भी किसी तीसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया।

विकास शुल्क लिया, कब्जा फिर भी नहीं

सदस्यता क्रमांक 121 के एक सदस्य से 22 मई 1993 को 23 हजार 730 रुपए में भूखंड 148 की रजिस्ट्री कराई गई। विकास के नाम पर अलग से 60 हजार रुपए और लिए गए। इसके बावजूद कब्जा नहीं दिया गया।

एक अन्य सदस्य (सदस्यता क्रमांक 57) से 1989 में 14 हजार रुपए में रजिस्ट्री हुई। विकास शुल्क के नाम पर करीब 2 लाख रुपए अलग से लिए गए। लेकिन इसकी रसीद मात्र 15 हजार रुपए की दी गई।

अधिग्रहित जमीन पर भी बेचते रहे प्लॉट

जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ। खसरा क्रमांक 261ग की जमीन का एक हिस्सा 1 जुलाई 2003 को मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका था। बावजूद इसके, उसी जमीन पर सदस्यों से प्लॉट के नाम पर पैसे लिए जाते रहे।

सेवानिवृत्त कर्मियों को सबसे ज्यादा नुकसान

EOW की जांच में पाया गया कि इस धोखाधड़ी में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इन्हें वर्षों तक सिर्फ आश्वासन देकर भटकाया जाता रहा।

सहकारिता विभाग की वर्ष 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट में भी सदस्यता सूची और आवंटन सूची के आंकड़ों में गड़बड़ी पाई गई। रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड से मिलान करने पर सोसाइटी की आवंटन सूची में कई भूखंड और सदस्यता क्रमांक मूल रजिस्ट्री से अलग मिले।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

EOW ने तत्कालीन अध्यक्ष सत्येन्द्र अग्रवाल, वर्तमान अध्यक्ष अनीता सिंह और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता (IPC — Indian Penal Code) की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत FIR दर्ज की है। प्रकरण में आगे जांच जारी है।

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