सड़कों के निर्माण पर ईरान- अमेरिका युद्ध ने लगाया ब्रेक, कहीं धीमा तो कहीं ठप हुआ काम
Sanjay Sharma | Apr 07, 2026, 22:57 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल में डामर की कीमतों में बढ़ोतरी ने सड़कों के निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्रभावित किया है। युद्ध और कच्चे तेल की सीमित आपूर्ति के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ।
News in Short
- डामर की कीमतों में 4,000-5,000 रुपए प्रति टन की बढ़ोतरी हुई।
- अमृत 2.0 परियोजना की सड़कों की मरम्मत बजट से बाहर हो गई।
- भोपाल मेट्रो के नीचे की सड़कें जर्जर, मरम्मत का काम लंबित है।
- कंक्रीट सड़कों का विचार, लेकिन शुरुआती लागत और समय अधिक है।
- डामर की कमी से भविष्य की परियोजनाओं पर संकट मंडरा रहा है।
News in Detail
मंहगे डामर के कारण सड़क निर्माण कार्य की लागत बढ़ने की स्थिति के चलते ठेकेदारों ने काम रोक दिए हैं। इसका असर नगरीय निकायों के अलावा लोक निर्माण विभाग के निर्माण की रफ्तार पर नजर आ रहा है।
अमेरिका- ईरान युद्ध ने पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत बढ़ा दी है। पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसियों पर ईंधन की कमी के बाद प्रदेश के निर्माण कार्यों पर भी इसका असर नजर आने लगा है।
युद्ध की वजह से डामर की कमी हो गई है। निर्माण एजेंसियों को पिछले महीने तक जिस कीमत और मात्रा में डामर उपलब्ध हो रहा था अब उसकी कीमतें कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।
इस बढ़ी हुई कीमत पर डामर खरीदकर सड़क निर्माण करने से ठेकेदार पीछे हट रहे हैं। घाटे की आशंका को देखते हुए ज्यादातर ठेकेदारों ने सड़क निर्माण की गति धीमी कर दी है। जबकि छोटी सड़क बनाने वाले ठेकेदार तो काम बंद करके ही बैठ गए हैं।
एक माह में उछले डामर के रेट
मार्च 2026 में इसकी कीमत में 4,000 से 5,000 रुपए प्रति टन तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका कारण पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की सीमित आपूर्ति को माना जा रहा है।
सड़क निर्माण के काम पिछड़े
भोपाल में अमृत 2.0 योजना के तहत बिछाई जा रही 700 किलोमीटर लंबी सीवेज लाइन का काम भी धीमा हो गया है। ठेकेदार फर्म लाइन बिछाने के बाद डामर की सड़क बनाने से बचने के लिए काम धीमी रफ्तार से करा रही है। वहीं जिन क्षेत्रों में पिछले महीने लाइन बिछाई गई हैं वहां सड़क के निर्माण का काम पिछड़ गया है।
भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट पर असर
सड़क मेंटेनेंस से पीछे हटे ठेकेदार
अब ठेकेदार नगर निगम से निर्माण लागत बढ़ने की स्थिति में एसओआर में इजाफे की मांग कर रहे हैं। इसका दबाव बनाने के लिए काम भी रोक दिए गए हैं। उधर जिलों में ग्रामीण सड़कों के अलावा पूर्व से चल रहे जिला मार्ग, स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट की गति भी धीमी हो गई है।
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