भागीरथपुरा कांड: तीन याचिकाओं पर होगी बहस, मौतों के आंकड़े फिर कटघरे में
Rahul Dave | Jan 06, 2026, 10:24 IST
indore bhagirathpura water high court hearing
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर आज उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाओं पर बहस की जाएगी। शासन द्वारा पिछली सुनवाई में पेश आंकड़ों पर विवाद बना हुआ है।
5 पॉइंट में पूरा मामला समझें...
दोनों याचिका में लोगों का मुफ्त इलाज कराने और शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। जबकि तीसरी याचिका भागीरथपुरा निवासी वरुण गायकवाड़ की ओर से एडवोकेट अभिनव धनोतर द्वारा दायर की गई है। इसमें मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
![Read all Latest Updates on and about Indore bench of Madhya Pradesh High Court]()
2 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में सरकार द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट ने ही सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए थे। शासन ने अदालत को बताया था कि आधिकारिक तौर पर दूषित पानी से सिर्फ चार मौतें हुई हैं। वहीं नगर निगम ने राहत कार्यों के तौर पर टैंकरों से जल आपूर्ति का ब्यौरा दिया था। रिपोर्ट के अनुसार 30 दिसंबर को 36, 31 दिसंबर को 34 और 1 जनवरी को 33 टैंकरों से पानी सप्लाई किया गया। इसके समर्थन में कुछ फोटो भी कोर्ट में पेश किए गए थे।
स्टेटस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जोन-4 के जोनल अधिकारी और सहायक अभियंता को निलंबित किया गया है। एक उप-अभियंता की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। नगर निगम ने यह भी कहा कि भर्ती मरीजों और प्रभावितों के विस्तृत आंकड़े सत्यापन के बाद अलग से पेश किए जाएंगे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई जवाबदेही तय करने के बजाय डैमेज कंट्रोल जैसी है।
पिछली सुनवाई में सरकार की तरफ से इस पूरे मामले में चार मौतों होने का दावा किया गया था इसके बाद मौतों के आंकड़े सुर्खियां बने हुए थे। क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला खुद 15 से अधिक मौतों की बात कह चुके थे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव सार्वजनिक रूप से 10 मौतों की बात स्वीकार कर चुके थे।
कलेक्टर शिवम वर्मा भी 5 मौतों की पुष्टि कर चुके हैं। इसके बाद सवाल यह है कि यजि मौतें चार ही थीं, तो शासन के अपने अधिकारी और जनप्रतिनिधि अलग-अलग आंकड़े क्यों बताते रहे? वहीं कोर्ट में चार मौत के आंकड़े ही क्यों पेश किए ।
सरकार ने कोर्ट में कहा कि 29 दिसंबर को उल्टी-दस्त के मामले सामने आते ही प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 24 दिसंबर से ही मामले सामने आने लगे थे। मौतें भी पहले शुरू हो चुकी थीं। लोगों का कहना है कि पानी में बदबू और गंदगी की शिकायतें लगातार की जा रही थीं। प्रशासन 29 दिसंबर के बाद ही हरकत में आया।
शासन ने कोर्ट में यह भी कहा कि पूरे मामले को आपातकालीन चिकित्सा स्थिति मानकर देखा गया। लेकिन हकीकत यह है कि
इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सबसे गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि हाईकोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था के सामने अधूरी या गलत जानकारी दी गई। पटवारी का कहना है कि यदि वास्तविक मौतों का आंकड़ा कोर्ट के सामने होता, तो जवाबदेही तय होती। आरोप है कि जानबूझकर आंकड़े छिपाने की पुष्टि हुई तो यह अपमान के दायरे में भी आ सकता है ।
जिन मौतों को प्रशासन ने स्वीकार किया, उन्हीं मामलों में कागजी कार्रवाई हुई। बाकी पीड़ित परिवार आज भी मुआवजे और न्याय के लिए भटक रहे हैं। वहीं घटना से पहले महीनों तक दबाई गई फाइलें, टेंडर और पाइपलाइन सुधार से जुड़े फैसले मौतों के बाद तेजी से लिए गए।
भागीरथपुरा कांड अब सिर्फ दूषित पानी का मामला नहीं रह गया है। यह आंकड़ों की सच्चाई, प्रशासनिक जवाबदेही और संवैधानिक जिम्मेदारी की परीक्षा बन चुका है। आज की सुनवाई में सबकी निगाहें टिकी हुई है।
भागीरथपुरा कांड से जुड़ी खबरें पढ़िए...
इंदौर भागीरथपुरा कांड हादसे पर न कांग्रेस मैदान में, न भाजपा के दिग्गजों की संवेदना
भागीरथपुरा कांड : डिस्चार्ज हुए मरीज फिर पहुंचे अस्पताल, किडनी और लीवर तक पहुंचा संक्रमण
इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में आरोपी अभय राठौर, ठेकेदारों ने चली ये चाल
इंदौर कमिश्नरी सिस्टम पर सवाल, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
- इंदौर हाईकोर्ट की बेंच में आज तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।
- शासन ने कोर्ट को आधिकारिक तौर पर सिर्फ चार मौतें बताई हैं।
- महापौर और पार्षद ने मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा बताया था।
- प्रशासन पर 24 दिसंबर से शुरू हुई शिकायतों की अनदेखी का आरोप है।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चार साल पहले ही दूषित पानी की चेतावनी दे चुका था।
दोनों याचिका में लोगों का मुफ्त इलाज कराने और शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। जबकि तीसरी याचिका भागीरथपुरा निवासी वरुण गायकवाड़ की ओर से एडवोकेट अभिनव धनोतर द्वारा दायर की गई है। इसमें मीडिया रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
Read all Latest Updates on and about Indore bench of Madhya Pradesh High Court
पिछली सुनवाई में मौतों के आंकड़े बने थे विवाद की जड़
अनुशासनात्मक कार्रवाई या औपचारिकता?
सिर्फ चार मौतें- कई बयानों से टकराता सरकारी दावा
कलेक्टर शिवम वर्मा भी 5 मौतों की पुष्टि कर चुके हैं। इसके बाद सवाल यह है कि यजि मौतें चार ही थीं, तो शासन के अपने अधिकारी और जनप्रतिनिधि अलग-अलग आंकड़े क्यों बताते रहे? वहीं कोर्ट में चार मौत के आंकड़े ही क्यों पेश किए ।
29 दिसंबर को संज्ञान
आपातकालीन चिकित्सा या कागजी संवेदनशीलता?
- महीनों से शिकायतें अनसुनी रहीं।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चार साल पहले ही दूषित पानी को लेकर चेतावनी दे चुका था।
- मौतों के बाद ही टेंडर और फाइलें तेजी से आगे बढ़ीं।
हाईकोर्ट में अधूरी जानकारी देने का आरोप
मुआवजे और फाइलों पर भी सवाल
आज की सुनवाई से उम्मीद
भागीरथपुरा कांड से जुड़ी खबरें पढ़िए...
इंदौर भागीरथपुरा कांड हादसे पर न कांग्रेस मैदान में, न भाजपा के दिग्गजों की संवेदना
भागीरथपुरा कांड : डिस्चार्ज हुए मरीज फिर पहुंचे अस्पताल, किडनी और लीवर तक पहुंचा संक्रमण
इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में आरोपी अभय राठौर, ठेकेदारों ने चली ये चाल
इंदौर कमिश्नरी सिस्टम पर सवाल, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari