सीएम डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव से कागजों पर ही अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को लेकर बोला ऐसा झूठ
Sanjay Gupta | Jan 05, 2026, 14:18 IST
bhagirathpura news
इंदौर के भागीरथपुरा कांड में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासनिक समन्वय को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या है पूरा मामला चलिए बताते हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा कांड में अब 17 मौत हो चुकी है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव कह चुके हैं कि अधिकारी सुनते नहीं हैं। ऐसे में काम नहीं कर सकते हैं।
इसके साथ ही इंदौर के कई जनप्रतिनिधियों ने भी बैठकों में यह कहा कि अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं।
इनके उलट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा ली गई कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को लेकर कागजों पर ही झूठ बोला गया। इसके मिनिट्स द सूत्र के पास एक्सक्लूसिव मौजूद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा बीते साल कलेक्टर और एसपी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। बाद में इसका कार्रवाई विवरण यानी मिनिट्स बनाए गए। इस बैठक के एजेंडे में कृषि, स्वास्थ्य व पोषण, रोजगार, नगरीय विकास, सुशासन, कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दे थे।
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इसी बैठक में सुशासन संबंध में कई अहम सवाल और निर्देश जारी हुए थे। इसमें एक अहम निर्देश था कि स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व दिया जाए।
अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद रखना चाहिए। इस पर अधिकारी ने जो कार्रवाई विवरण दिया, वह इंदौर को लेकर साफ झूठ था। इस निर्देश के पालन में अधिकारियों ने कहा कि- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से लगातार संवाद किया जा रहा है। खासकर महापौर के बयान और जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही शिकायतों से यही बात उठ रही है।
निर्देश 1- विविध शासकीय गतिविधियों, योजनाओं के क्रियान्वयन में मप्र 2047 विजन को ध्यान में रख पांच सालों की कार्ययोजना पर काम करें।
जवाब- विजन मप्र 2047 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
निर्देश 2- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व दिया जाए, अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद रखना चाहिए।
जवाब- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद किया जा रहा है।
निर्देश 3- सभी कलेक्टर अपने जिलों में स्थानीय आवश्यकतानुसार नवाचार करें।
जवाब- जिले में नवाचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
निर्देश 4- कलेक्टर, एसपी, सीईओ जिला पंचायत व डीएफओ जिले में टीम बनाकर काम करें।
जवाब- पालन किया जा रहा है।
निर्देश 5- कार्यपालिका मजिस्ट्रेट व पुलिस के बीच अच्छा समन्वय होना चाहिए।
जवाब- पालन किया जा रहा है।
निर्देश 6- भूमि विवादों का त्वरित व प्रभावी निराकरण होना चाहिए।
जवाब- इसके लिए राजस्व अधिकारियों को पालन के लिए निर्देशित किया गया है।
इंदौर जिला फिलहाल समन्वय के लिए तरस रहा है। पुलिस कमिश्नरी के बाद स्थितियां और अलग हो गई हैं। पुलिस सिस्टम एक तरह से अलग चल रहा है। सितंबर 2025 में ही इंदौर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हुई जिसमें राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) को खारिज कर IAS को प्राथमिकता दी गई।
अब एमपीआईडीसी, आईडीए में भी रेगुलर आईएएस पदस्थ हुए हैं। वहीं इंदौर नगर निगम में अब एक-एक करते हुए चार आईएएस (एक प्रमोटी आईएएस) पदस्थ हुए हैं। संभागायुक्त, निगमायुक्त, आईडीए सीईओ सभी बदले गए।
फिर चार महीने बाद ही भागीरथपुरा कांड में निगमायुक्त बदल गए। अभी सबसे अनुभवी इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ही हैं जो इंदौर में 18 माह निगमायुक्त रह चुके। अब चार माह से कलेक्टर इंदौर पद पर हैं। बाकी अधिकारी पहली बार इंदौर में पदस्थ हुए हैं। ऐसे में मैदान में कई समस्याएं बनी हुई है।
भागीरथपुरा कांड से जुड़ी खबरें पढ़ें...
इंदौर भागीरथपुरा कांड हादसे पर न कांग्रेस मैदान में, न भाजपा के दिग्गजों की संवेदना
इंदौर को हमेशा एक दबंग अधिकारी ने लीड किया है। हाल के समय में कलेक्टर रहते हुए आईएएस आकाश त्रिपाठी ने यह काम किया तो निगमायुक्त रहते हुए और फिर कलेक्टर रहते हुए मनीष सिंह ने यह किया।
अपने पूर्व के कार्यकाल में आईपीएस संतोष सिंह ने भी यह काम बखूबी किया था। संभागायुक्त रहते हुए संजय दुबे ने भी यह भूमिका निभाई और हाल में इंदौर कलेक्टर रहते हुए आशीष सिंह ने काफी हद तक यह काम किया। लेकिन अभी सभी विभागों को लीड कर समस्याओं को निपटाने वाले और जनप्रतिनिधियों से तालमेल बैठाने वाले लीड अधिकारी की कमी इंदौर में खल रही है। फिलहाल इंदौर कलेक्टर और अभी इंदौर में सबसे अनुभवी आईएएस के तौर पर शिवम वर्मा जरूर इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
इसके साथ ही इंदौर के कई जनप्रतिनिधियों ने भी बैठकों में यह कहा कि अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं।
इनके उलट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा ली गई कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को लेकर कागजों पर ही झूठ बोला गया। इसके मिनिट्स द सूत्र के पास एक्सक्लूसिव मौजूद है।
क्या थी बैठक और क्या एजेंडा
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ये निर्देश- निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दिया जाए नेतृत्व
अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद रखना चाहिए। इस पर अधिकारी ने जो कार्रवाई विवरण दिया, वह इंदौर को लेकर साफ झूठ था। इस निर्देश के पालन में अधिकारियों ने कहा कि- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से लगातार संवाद किया जा रहा है। खासकर महापौर के बयान और जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही शिकायतों से यही बात उठ रही है।
निर्देश 1- विविध शासकीय गतिविधियों, योजनाओं के क्रियान्वयन में मप्र 2047 विजन को ध्यान में रख पांच सालों की कार्ययोजना पर काम करें।
जवाब- विजन मप्र 2047 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
निर्देश 2- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व दिया जाए, अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद रखना चाहिए।
जवाब- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद किया जा रहा है।
निर्देश 3- सभी कलेक्टर अपने जिलों में स्थानीय आवश्यकतानुसार नवाचार करें।
जवाब- जिले में नवाचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
निर्देश 4- कलेक्टर, एसपी, सीईओ जिला पंचायत व डीएफओ जिले में टीम बनाकर काम करें।
जवाब- पालन किया जा रहा है।
निर्देश 5- कार्यपालिका मजिस्ट्रेट व पुलिस के बीच अच्छा समन्वय होना चाहिए।
जवाब- पालन किया जा रहा है।
निर्देश 6- भूमि विवादों का त्वरित व प्रभावी निराकरण होना चाहिए।
जवाब- इसके लिए राजस्व अधिकारियों को पालन के लिए निर्देशित किया गया है।
इंदौर जिला समन्वय के लिए तरस रहा
अब एमपीआईडीसी, आईडीए में भी रेगुलर आईएएस पदस्थ हुए हैं। वहीं इंदौर नगर निगम में अब एक-एक करते हुए चार आईएएस (एक प्रमोटी आईएएस) पदस्थ हुए हैं। संभागायुक्त, निगमायुक्त, आईडीए सीईओ सभी बदले गए।
फिर चार महीने बाद ही भागीरथपुरा कांड में निगमायुक्त बदल गए। अभी सबसे अनुभवी इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ही हैं जो इंदौर में 18 माह निगमायुक्त रह चुके। अब चार माह से कलेक्टर इंदौर पद पर हैं। बाकी अधिकारी पहली बार इंदौर में पदस्थ हुए हैं। ऐसे में मैदान में कई समस्याएं बनी हुई है।
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इंदौर भागीरथपुरा कांड हादसे पर न कांग्रेस मैदान में, न भाजपा के दिग्गजों की संवेदना
इंदौर को हमेशा एक अधिकारी ने लीड किया
अपने पूर्व के कार्यकाल में आईपीएस संतोष सिंह ने भी यह काम बखूबी किया था। संभागायुक्त रहते हुए संजय दुबे ने भी यह भूमिका निभाई और हाल में इंदौर कलेक्टर रहते हुए आशीष सिंह ने काफी हद तक यह काम किया। लेकिन अभी सभी विभागों को लीड कर समस्याओं को निपटाने वाले और जनप्रतिनिधियों से तालमेल बैठाने वाले लीड अधिकारी की कमी इंदौर में खल रही है। फिलहाल इंदौर कलेक्टर और अभी इंदौर में सबसे अनुभवी आईएएस के तौर पर शिवम वर्मा जरूर इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
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