इंदौर जिला प्रशासन के राजस्व में बुरे हाल, सीएम हेल्पलाइन में भी ए से डी ग्रेड में पहुंचा
Sanjay Gupta | Jun 04, 2026, 12:01 IST
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इंदौर जिला प्रशासन के राजस्व कार्यों में बुरा हाल है। मूल नामांतरण, बटांकन, सीमांकन जैसे कार्यों में केसों का निराकरण 50 फीसदी से भी कम है। सीएम हेल्पलाइन में जो जिला अप्रैल माह में ए ग्रेड में था, वह अब डी ग्रेड में पहुंच गया है।
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार शाम को राजस्व अधिकारियों (एसडीएम और तहसीलदारों) की बैठक ली। इस बैठक में राजस्व कार्यों का जो लेखा-जोखा सामने आया, उसने इंदौर जिला प्रशासन के हाल बयां कर दिए हैं।
कलेक्टर को कहना पड़ा कि अपने काम को लेकर गंभीर हो जाएं और पटवारियों पर लगाम कसें। यह स्थिति तब है जब इंदौर में डिप्टी कलेक्टर से लेकर तहसीलदारों की लंबी-चौड़ी फौज तैनात है। तहसीलदारों को तो अब प्रोटोकॉल ड्यूटी से भी मुक्ति मिल चुकी है। इसके लिए अलग से तहसीलदार तैनात हैं।
देखिए
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वहीं मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली सीएम हेल्पलाइन के मामलों की बात करें तो अप्रैल महीने में इंदौर ए ग्रेड पर था। लेकिन अगले ही महीने, मई के रिकॉर्ड में इंदौर जिला सीधे डी ग्रेड पर पहुंच गया।
मई में 1 हजार 210 शिकायतें मिलीं, जिनके निराकरण का प्रतिशत केवल 44 फीसदी रहा। इस वजह से इंदौर जिला मध्य प्रदेश में 30वें पायदान पर खिसककर डी ग्रेड में आ गया है।
दूसरी ओर, जिस सेवा की गारंटी शासन ने दी है, उसे तो अधिकारी छू तक नहीं रहे हैं। लोक सेवा गारंटी में समय-सीमा बीतने पर पेनल्टी लगाने का प्रावधान है। इसके बावजूद हालात खराब हैं।
मई महीने में 527 नामांतरण आवेदन ऐसे हैं, जिनकी समय-सीमा बीत चुकी है। अधिकारियों ने यह सेवा उपलब्ध नहीं कराई है। कायदे से कलेक्टर को इन पर पेनल्टी लगाकर संबंधित अधिकारियों से वसूली करनी चाहिए। इसी तरह सीमांकन के भी 725 मामले ऐसे हैं, जिन्हें पूरा करने का समय कब का बीत चुका है।
हाल ही में सीएस अनुराग जैन की कलेक्टर कांफ्रेंस हुई। इसमें इंदौर के राजस्व और अन्य विकास कार्यों की सराहना की गई। जिस तरह से सीएम हेल्पलाइन में लंबे समय बाद इंदौर जिले की ए ग्रेड आई, उसे खास माना गया। अभी जो डी ग्रेड दिख रही है, उसके बारे में जानकारों का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक शिकायत दर्ज होने के कारण है। इनका निराकरण 20 जून तक होगा, तब फिर इंदौर आगे बढ़ेगा।
वहीं राजस्व कार्यों के अभी जो मामले लंबित हैं, उनमें 90 फीसदी तीन माह से कम के हैं और अभी केवल दर्ज हुए हैं। राजस्व कोर्ट में तीन माह में इनका निराकरण कर दिया जाएगा।
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कलेक्टर को कहना पड़ा कि अपने काम को लेकर गंभीर हो जाएं और पटवारियों पर लगाम कसें। यह स्थिति तब है जब इंदौर में डिप्टी कलेक्टर से लेकर तहसीलदारों की लंबी-चौड़ी फौज तैनात है। तहसीलदारों को तो अब प्रोटोकॉल ड्यूटी से भी मुक्ति मिल चुकी है। इसके लिए अलग से तहसीलदार तैनात हैं।
देखिए राजस्व विभाग के कार्यों का हाल
- अविवादित नामांतरण: निराकरण 50 फीसदी (16 हजार 480 मामलों में से 8 हजार 571)
- विवादित नामांतरण: 43 फीसदी निराकरण (748 मामलों में से 323 निस्तारित)
- अविवादित बंटवारा: 27.51 फीसदी निराकरण (782 मामलों में से केवल 176 निस्तारित)
- विवादित बंटवारा: 32 फीसदी निराकरण (22 मामलों में से केवल 7 हुए)
- सीमांकन: 45 फीसदी निराकरण (6 हजार 396 मामलों में से 2 हजार 868 हुए)
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इन अधिकारियों का काम सबसे पीछे
- अविवादित नामांतरण में: हातोद के आगरा सर्कल के नायब तहसीलदार, देपालपुर के नायब तहसीलदार, कनाडिया के नायब तहसीलदार, गौतमपुरा सर्कल के नायब तहसीलदार और बिचौली हप्सी के नायब तहसीलदार सबसे निचले पायदान पर हैं।
- विवादित नामांतरण में: कनाडिया तहसील के नायब तहसीलदार, आगरा सर्कल (हातोद) के नायब तहसीलदार, हातोद के नायब तहसीलदार, कनाडिया के तहसीलदार और महू तहसील के तहसीलदार सबसे फिसड्डी हैं।
- अविवादित बंटवारे में: कनाडिया के नायब तहसीलदार, महू के तहसीलदार, कनाडिया के तहसीलदार और हातोद के तहसीलदार की कोर्ट सबसे पीछे है।
- सीमांकन कार्यों में: खुड़ैल के तहसीलदार, आगरा के नायब तहसीलदार, खुड़ैल के नायब तहसीलदार, तथा कनाडिया के तहसीलदार और नायब तहसीलदार सबसे पीछे चल रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन में तो और बुरे हाल
मई में 1 हजार 210 शिकायतें मिलीं, जिनके निराकरण का प्रतिशत केवल 44 फीसदी रहा। इस वजह से इंदौर जिला मध्य प्रदेश में 30वें पायदान पर खिसककर डी ग्रेड में आ गया है।
लोक सेवा गारंटी को तो छू भी नहीं रहे अधिकारी
मई महीने में 527 नामांतरण आवेदन ऐसे हैं, जिनकी समय-सीमा बीत चुकी है। अधिकारियों ने यह सेवा उपलब्ध नहीं कराई है। कायदे से कलेक्टर को इन पर पेनल्टी लगाकर संबंधित अधिकारियों से वसूली करनी चाहिए। इसी तरह सीमांकन के भी 725 मामले ऐसे हैं, जिन्हें पूरा करने का समय कब का बीत चुका है।
कलेक्टर कांफ्रेंस में इंदौर के कामों की सराहना
वहीं राजस्व कार्यों के अभी जो मामले लंबित हैं, उनमें 90 फीसदी तीन माह से कम के हैं और अभी केवल दर्ज हुए हैं। राजस्व कोर्ट में तीन माह में इनका निराकरण कर दिया जाएगा।
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