3 जून का इतिहास: इंदौर से शुरू हुआ था हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का आंदोलन
Kaushiki | Jun 03, 2026, 08:00 IST
History of Hindi Language
भारतीय इतिहास में 3 जून 1918 का दिन बहुत विशेष है। इसी दिन इंदौर में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में हिन्दी साहित्य सम्मेलन हुआ था। इस ऐतिहासिक बैठक में एक प्रस्ताव पास करके हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित करने पर सहमति बनी थी।
हिन्दी साहित्य सम्मेलन: इतिहास के पन्नों में 3 जून की तारीख बहुत ज्यादा खास मानी जाती है। आज से कुछ साल पहले इसी दिन मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक बड़ा आयोजन हुआ था।
यह आयोजन कोई साधारण बैठक नहीं था, बल्कि ये आठवां 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' था। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खास बात इसके अध्यक्ष थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी खुद इस पूरे बड़े कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।
इंदौर के होल्कर राजवंश ने बापू को इस सम्मेलन के लिए सादर आमंत्रित किया था। उस समय देश गुलामी की जंजीरों में पूरी तरह जकड़ा हुआ था। ऐसे कठिन समय में देश को एक धागे में पिरोने की कोशिश जारी थी।
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महात्मा गांधी बहुत अच्छी तरह जानते थे कि आजादी की लड़ाई के लिए एक भाषा जरूरी है। एक ऐसी भाषा जो पूरे देश को आपस में आसानी से जोड़ सके।
इंदौर के इस मंच से बापू ने हिंदी के महत्व पर बहुत दमदार भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा होने के सबसे काबिल है। सम्मेलन के दौरान 3 जून 1918 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया गया था।
इस प्रस्ताव में हिंदी को देश की राजभाषा घोषित करने की बात कही गई थी। वहां मौजूद देश के बड़े-बड़े विद्वानों ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई थी। इस तरह इंदौर की धरती पर हिंदी के सुनहरे सफर की शुरुआत हुई।
![मध्य प्रदेश के इस शहर से हिंदी आंदोलन की हुई थी शुरुआत, महात्मा गांधी ने किया था आह्वान - Indore Hindi Sahitya Samiti Bhawan]()
गांधी जी का मानना था कि अंग्रेजी भाषा हमारे देश पर एक मानसिक बोझ है। वे चाहते थे कि देश के आम लोग अपनी भाषा में बात करें। हिंदी एक ऐसी भाषा थी जो उत्तर से लेकर दक्षिण तक बहुत लोकप्रिय थी।
देश के अधिकांश हिस्सों में लोग इसे आसानी से समझ लेते थे। बापू ने कहा था कि जिस भाषा को करोड़ों लोग बोलते हैं, वही राजभाषा होनी चाहिए।
इससे सरकारी कामकाज में आम लोगों की भागीदारी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। उन्होंने हिंदी को जनमानस की भाषा यानी आम जनता की असली आवाज कहा था। इसी सोच के कारण उन्होंने इंदौर में यह बड़ा फैसला लिया था।
![World Hindi Day: इंदौर में महात्मा गांधी ने किया था उद्घोष- हिंदी बने राष्ट्रभाषा]()
इस ऐतिहासिक सम्मेलन को सफल बनाने में इंदौर के लोगों का बड़ा योगदान था। इंदौर की महारानी और होल्कर राजाओं ने इसमें गहरी रुचि ली थी।
सम्मेलन के लिए भव्य तैयारियां की गई थीं और पूरे शहर को सजाया गया था। देशभर से मशहूर कवि, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी इंदौर पहुंचे थे। बापू खुद ट्रेन से इंदौर आए थे और उनका स्वागत बहुत धूमधाम से हुआ था।
लोग बापू के विचारों को सुनने के लिए दूर-दूर से पैदल आए थे। इसी सम्मेलन के बाद गांधी जी ने दक्षिण भारत में हिंदी प्रचार सभा की शुरुआत की थी। वे चाहते थे कि दक्षिण के लोग भी हिंदी को अपनाएं।
![Dakshina Bharat Hindi Prachar Sabha — Spreading Hindi for more than a century in a State opposed to its imposition - The Hindu]()
3 जून 1918 के इस प्रस्ताव के बाद देश में हिंदी का आंदोलन तेज हो गया। क्रांतिकारियों ने अपनी पत्रिकाओं में हिंदी का जमकर प्रयोग करना शुरू किया।
नेताओं के भाषण अब अंग्रेजी के बजाय सीधे सरल हिंदी भाषा में होने लगे थे। इससे देश के गांव-गांव तक आजादी का संदेश बहुत तेजी से पहुंचा। हिंदी सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रही, बल्कि ये देशभक्ति का प्रतीक बन गई।
बापू के इस एक कदम ने अंग्रेजों की चिंता को बहुत बढ़ा दिया था। अंग्रेज चाहते थे कि देश में उनकी भाषा यानी अंग्रेजी का ही बोलबाला रहे। लेकिन बापू की इस मुहिम ने देश को अपनी भाषा पर गर्व करना सिखाया।
![Gandhi Jayanti 2022 Special; Mahatma Gandhi Swachhta Abhiyan Indore Connection]()
इंदौर सम्मेलन में जो बीज बोया गया था, वह आजादी के बाद एक बड़ा पेड़ बना। साल 1949 (14 सितंबर) को संविधान सभा ने एक अहम फैसला लिया।
संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को भारत की राजभाषा स्वीकार किया गया। इसके साथ ही देवनागरी लिपि को भी आधिकारिक मान्यता दी गई थी।
इसी वजह से हम हर साल 14 सितंबर को पूरे देश में हिंदी दिवस मनाते हैं। इस पूरे सफर की मजबूत नींव 3 जून, 1918 में इंदौर में ही रखी गई थी। आज भी जब हम हिंदी के इतिहास को पढ़ते हैं, तो इंदौर का नाम सबसे पहले आता है।
![Mahatma Gandhi 150th birth anniversary: How Gandhi influenced the world with his life lessons!]()
आज समय पूरी तरह बदल चुका है और हम डिजिटल युग में जी रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में भी हिंदी का जलवा बरकरार है। अब लोग अपने स्मार्टफोन पर हिंदी में टाइप करना ज्यादा पसंद करते हैं।
गूगल और अन्य बड़े सर्च इंजन भी हिंदी भाषा को बढ़ावा दे रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी हिंदी में ब्लॉग लिख रही है और वीडियो बना रही है।
बापू ने जिस राजभाषा का सपना देखा था, वह आज पूरी दुनिया में गूंज रही है। हमें अपनी मातृभाषा और राजभाषा का हमेशा दिल से सम्मान करना चाहिए। तो 3 जून का यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भाषा ही हमारा असली गौरव है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 03 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 03 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
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यह आयोजन कोई साधारण बैठक नहीं था, बल्कि ये आठवां 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' था। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खास बात इसके अध्यक्ष थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी खुद इस पूरे बड़े कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।
इंदौर के होल्कर राजवंश ने बापू को इस सम्मेलन के लिए सादर आमंत्रित किया था। उस समय देश गुलामी की जंजीरों में पूरी तरह जकड़ा हुआ था। ऐसे कठिन समय में देश को एक धागे में पिरोने की कोशिश जारी थी।
One Language, Two Scripts: Gandhi's Vision for Hindustani - Frontline
हिंदी को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाया गया
इंदौर के इस मंच से बापू ने हिंदी के महत्व पर बहुत दमदार भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा होने के सबसे काबिल है। सम्मेलन के दौरान 3 जून 1918 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया गया था।
इस प्रस्ताव में हिंदी को देश की राजभाषा घोषित करने की बात कही गई थी। वहां मौजूद देश के बड़े-बड़े विद्वानों ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई थी। इस तरह इंदौर की धरती पर हिंदी के सुनहरे सफर की शुरुआत हुई।
मध्य प्रदेश के इस शहर से हिंदी आंदोलन की हुई थी शुरुआत, महात्मा गांधी ने किया था आह्वान - Indore Hindi Sahitya Samiti Bhawan
क्यों हिंदी को ही भारत की राजभाषा बनाना चाहते थे गांधी जी
देश के अधिकांश हिस्सों में लोग इसे आसानी से समझ लेते थे। बापू ने कहा था कि जिस भाषा को करोड़ों लोग बोलते हैं, वही राजभाषा होनी चाहिए।
इससे सरकारी कामकाज में आम लोगों की भागीदारी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। उन्होंने हिंदी को जनमानस की भाषा यानी आम जनता की असली आवाज कहा था। इसी सोच के कारण उन्होंने इंदौर में यह बड़ा फैसला लिया था।
World Hindi Day: इंदौर में महात्मा गांधी ने किया था उद्घोष- हिंदी बने राष्ट्रभाषा
इंदौर के हिन्दी साहित्य सम्मेलन का आयोजन
सम्मेलन के लिए भव्य तैयारियां की गई थीं और पूरे शहर को सजाया गया था। देशभर से मशहूर कवि, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी इंदौर पहुंचे थे। बापू खुद ट्रेन से इंदौर आए थे और उनका स्वागत बहुत धूमधाम से हुआ था।
लोग बापू के विचारों को सुनने के लिए दूर-दूर से पैदल आए थे। इसी सम्मेलन के बाद गांधी जी ने दक्षिण भारत में हिंदी प्रचार सभा की शुरुआत की थी। वे चाहते थे कि दक्षिण के लोग भी हिंदी को अपनाएं।
Dakshina Bharat Hindi Prachar Sabha — Spreading Hindi for more than a century in a State opposed to its imposition - The Hindu
स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी ने कैसे निभाई अपनी भूमिका
नेताओं के भाषण अब अंग्रेजी के बजाय सीधे सरल हिंदी भाषा में होने लगे थे। इससे देश के गांव-गांव तक आजादी का संदेश बहुत तेजी से पहुंचा। हिंदी सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रही, बल्कि ये देशभक्ति का प्रतीक बन गई।
बापू के इस एक कदम ने अंग्रेजों की चिंता को बहुत बढ़ा दिया था। अंग्रेज चाहते थे कि देश में उनकी भाषा यानी अंग्रेजी का ही बोलबाला रहे। लेकिन बापू की इस मुहिम ने देश को अपनी भाषा पर गर्व करना सिखाया।
Gandhi Jayanti 2022 Special; Mahatma Gandhi Swachhta Abhiyan Indore Connection
आजादी के बाद भारतीय संविधान में हिंदी का स्थान
संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को भारत की राजभाषा स्वीकार किया गया। इसके साथ ही देवनागरी लिपि को भी आधिकारिक मान्यता दी गई थी।
इसी वजह से हम हर साल 14 सितंबर को पूरे देश में हिंदी दिवस मनाते हैं। इस पूरे सफर की मजबूत नींव 3 जून, 1918 में इंदौर में ही रखी गई थी। आज भी जब हम हिंदी के इतिहास को पढ़ते हैं, तो इंदौर का नाम सबसे पहले आता है।
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डिजिटल दुनिया में कहां खड़ी है हमारी हिंदी
गूगल और अन्य बड़े सर्च इंजन भी हिंदी भाषा को बढ़ावा दे रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी हिंदी में ब्लॉग लिख रही है और वीडियो बना रही है।
बापू ने जिस राजभाषा का सपना देखा था, वह आज पूरी दुनिया में गूंज रही है। हमें अपनी मातृभाषा और राजभाषा का हमेशा दिल से सम्मान करना चाहिए। तो 3 जून का यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी भाषा ही हमारा असली गौरव है।
Reference Links:
- Indian National Movement Archives (National Archives of India)
- Eighth Hindi Sahitya Sammelan Documented History (1918) (Hindi Sahitya Sammelan Official)
- Research Papers on Mahatma Gandhi's Linguistic Policies (Complete Information on Mahatma Gandhi's Philosophy and Writings)
3 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 03 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1918: महात्मा गांधी की अध्यक्षता में इंदौर में 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' हुआ, जहाँ हिंदी को राजभाषा मानने का प्रस्ताव पास हुआ।
- 1994: भारत की मदद करने वाले 'भारत सहायता क्लब' का नाम बदलकर नया नाम 'भारत सहायता मंच' किया गया।
- 1999: पानी और जमीन पर चलने वाले हावरक्राफ़्ट विमानों के महान अविष्कारक क्रिसटोफ़र काकरैल का निधन हुआ।
- 1999: यूगोस्लाविया देश ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद कोसोवो शांति योजना को अपनी आधिकारिक मंजूरी दी।
- 1999: मिस्र के प्रसिद्ध राष्ट्रपति हुश्नी मोबारक रिकॉर्ड बनाते हुए लगातार चौथी बार देश के राष्ट्रपति चुने गये।
- 2004: वैज्ञानिक केन फ़ोर्ड को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अंतरिक्ष खोज पैनल का नया नेतृत्वकर्ता बनाया गया।
- 2005: फ़्रांस देश ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी दावेदारी का अपना समर्थन दोबारा दुहराया।
- 2008: तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चन्द्रशेखर राव ने उपचुनाव में करारी हार मिलने के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दिया।
- 2008: केन्द्र सरकार ने देश के सीमेंट निर्यात पर मिलने वाले रिफंड (छूट) को दी गई अपनी मंज़ूरी वापस ली।
- 2008: जापानी प्रयोगशाला के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डिस्कवरी यान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुँचा।
- 2008: खगोलविदों और वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में सौर परिवार के बाहर अब तक का सबसे छोटा ग्रह खोजने में सफलता मिली।
- 1982: तृप्ति मुर्गंडे — भारत की प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जो एकल और युगल दोनों श्रेणियों में खेलती हैं।
- 1970: तालारी रंगैय्या — आंध्र प्रदेश के एक जाने-माने और सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं।
- 1941: रूमा पाल — भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक बेहद प्रसिद्ध और सम्मानित महिला न्यायधीश रही हैं।
- 1930: जॉर्ज फ़र्नांडिस — भारत के पूर्व रक्षामंत्री, मशहूर पत्रकार, तेजतर्रार राजनेता और एक पूर्व ट्रेड यूनियन नेता थे।
- 1929: चिमनभाई पटेल — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनेता थे, जो गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री भी रहे।
- 1924: एम. करुणानिधि — दक्षिण भारत के दिग्गज राजनेता और तमिलनाडु राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
- 1912: सोहराब फिरोजशाह गोदरेज — भारत के प्रसिद्ध व्यवसायी, दिग्गज उद्यमी और मशहूर गोदरेज समूह के पूर्व अध्यक्ष थे।
- 1895: के. एम. पणीक्कर — मैसूर (वर्तमान कर्नाटक) के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, कुशल राजनयिक और इतिहास के बड़े विद्वान थे।
- 1867: हरविलास शारदा — भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद, राजनेता, महान समाज सुधारक, न्यायविद और लेखक थे।
- 1844: बालकृष्ण भट्ट — आधुनिक हिन्दी साहित्य के शीर्ष निर्माताओं, गद्यकारों और पत्रकारों में से एक थे।
- 2011: भजन लाल — हरियाणा की राजनीति के बेहद कुशल केंद्र तथा राज्य के तीन बार के मुख्यमंत्री थे।
- 1994: त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल — भारत में अमूल की नींव रखने वाले और सामुदायिक नेतृत्व के लिए जाने जाने वाले महान व्यक्ति।
- 1976: विगगो कैंपमैन — डेनमार्क के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ थे जो वहां के सामाजिक डेमोक्रेट्स दल के बड़े नेता थे।
- 1976: मुनि जिनविजय — प्राचीन भारतीय साहित्य, जैन धर्म के बड़े अन्वेषी, संपादक और कुशल पाठालोचक थे।
- 1974: कृष्ण बल्लभ सहाय — भारत के वीर स्वतंत्रता सेनानी और अविभाजित बिहार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
- 1925: वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर — भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त थे।
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