इंदौर में अस्पतालों के नाम पर खेल? रजिस्ट्रेशन और मंजूरी का पता नहीं, फिर भी किडनी और दिल के इलाज का दावा

Sandeep Kumar | Oct 18, 2026, 22:53 IST
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इंदौर के अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन पर उठे सवाल
इंदौर के अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन पर उठे सवाल

इंदौर में अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन और जरूरी मंजूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक शहर में 325 निजी अस्पताल रजिस्टर्ड हैं। इनके अलावा कुछ अन्य अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनमें से कुछ किडनी और दिल की बीमारियों के इलाज का दावा कर रहे हैं।

ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इंदौर में 325 अस्पताल पंजीकृत

इंदौर में अस्पतालों के पंजीयन (Hospital Registration) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक शहर में 325 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। कुछ अन्य अस्पतालों के संचालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनके पंजीयन और जरूरी अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि किसी अस्पताल का नाम पंजीकृत अस्पतालों की सूची में नहीं होने से उसकी अवैधता साबित नहीं होती। इसके लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। अब सवाल है कि शहर में कुल कितने अस्पताल संचालित हो रहे हैं? इनमें कितने अस्पतालों के पास सभी जरूरी अनुमतियां हैं? इन सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

8वीं पास ने फर्जी डिग्री से खोला अस्पताल, SOG ने दो को दबोचा; राजस्थान में फर्जी डॉक्टर रैकेट का खुलासा | 8th Pass Opened Hospital with Fake Degree, SOG Caught Two; Fake Doctor Racket Exposed in Rajasthan
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16 Oct 2026 ,
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राजस्थान में दो व्यक्तियों को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने पंकज यादव और नानजीराम चौधरी को गिरफ्तार किया। पंकज का विदेश में MBBS में असफल रहने के बाद फर्जी डिग्री तैयार करवाने का आरोप है। नानजीराम ने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
राजस्थान में दो व्यक्तियों को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने पंकज यादव और नानजीराम चौधरी को गिरफ्तार किया। पंकज का विदेश में MBBS में असफल रहने के बाद फर्जी डिग्री तैयार करवाने का आरोप है। नानजीराम ने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।

बिना मंजूरी अस्पताल चलाने के आरोप

इंदौर में बिना पंजीयन के अस्पताल (Unregistered Hospitals in Indore) संचालित होने के आरोप सामने आए हैं। एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अस्पतालों की अनुमति से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार ये अस्पताल मरीजों को इलाज की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। हालांकि इन सुविधाओं के संचालन के लिए जरूरी अनुमतियों पर सवाल उठे हैं। अस्पताल चलाने के लिए केवल भवन और चिकित्सा उपकरण (Medical Equipment) होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निर्धारित नियमों और जरूरी अनुमतियों का पालन करना भी आवश्यक है।

कोटा एमबीएस अस्पताल में इंजेक्शन घोटाला: भर्ती न हुई महिला के नाम पर 15 हजार के इंजेक्शन जारी, जांच की मांग | Kota MBS Hospital Injection Scam: 15 Thousand Rupees Injections Issued in the Name of Non-Admitted Woman, Demand for Investigation
कोटा एमबीएस अस्पताल में गड़बड़ी: भर्ती नहीं हुई महिला के नाम पर इंजेक्शन, अस्पताल रिकॉर्ड में 10 सितंबर से भर्ती
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कोटा सरकारी एमबीएस अस्पताल के रिकॉर्ड में 86 साल की एक महिला 10 सितंबर से भर्ती दर्ज है। दैनिक भास्कर की पड़ताल के मुताबिक वह महिला कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुई। रिकॉर्ड में उनके नाम पर 5-5 हजार रुपए के तीन ह्यूमन एल्बुमिन इंजेक्शन लगाना बताया गया यह मामला कोटा एमबीएस अस्पताल फर्जी मरीज के आरोप से जुड़ा है।
कोटा सरकारी एमबीएस अस्पताल के रिकॉर्ड में 86 साल की एक महिला 10 सितंबर से भर्ती दर्ज है। दैनिक भास्कर की पड़ताल के मुताबिक वह महिला कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुई। रिकॉर्ड में उनके नाम पर 5-5 हजार रुपए के तीन ह्यूमन एल्बुमिन इंजेक्शन लगाना बताया गया यह मामला कोटा एमबीएस अस्पताल फर्जी मरीज के आरोप से जुड़ा है।

स्टार हेल्थ केयर के पंजीयन पर सवाल

स्टार हेल्थ केयर हॉस्पिटल का नाम भी मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट में अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ और पंजीयन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में मीडिया ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा। प्रबंधन ने सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक उसके पास पंजीयन और अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि इन दस्तावेजों की वैधता का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल को अवैध नहीं कहा जा सकता।

आयुष्मान योजना में भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल संचालक पर फर्जीवाड़े का केस दर्ज, EOW कर रही जांच | Ayushman Yojana: Case registered against Bhopal's Srishti Hospital operator for fraud, EOW investigating
आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ EOW ने दर्ज किया केस
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By Sandeep Kumar
भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल पर आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य पर अपराध दर्ज किया। जांच में स्टाफ सूची में नाम दोहराने की बात सामने आई। पैथोलॉजी रिपोर्टों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों का भी आरोप है। अस्पताल को मिले भुगतान की राशि जांची जाएगी। फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगी।
भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल पर आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य पर अपराध दर्ज किया। जांच में स्टाफ सूची में नाम दोहराने की बात सामने आई। पैथोलॉजी रिपोर्टों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों का भी आरोप है। अस्पताल को मिले भुगतान की राशि जांची जाएगी। फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगी।

सिटीजन हॉस्पिटल की सुविधाओं पर सवाल

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सिटीजन हॉस्पिटल का नाम भी मीडिया की पड़ताल में सामने आया है। अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से एचआरसीटी जांच की सुविधा का जिक्र किया गया है। अस्पताल में अन्य जांच सेवाएं उपलब्ध होने की जानकारी भी सामने आई है। अस्पताल प्रबंधन ने इन सुविधाओं के संबंध में अपना पक्ष रखा है। हालांकि संबंधित सुविधाओं के लिए जरूरी अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

अविरल हॉस्पिटल में किडनी और दिल के इलाज का दावा

अविरल हॉस्पिटल में गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा होने का दावा सामने आया है। रिपोर्ट में अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं का जिक्र किया गया है। अस्पताल में दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज की सुविधाएं उपलब्ध होने की बात कही गई है। हालांकि इन सुविधाओं के संचालन के लिए जरूरी पंजीयन और अनुमतियों पर सवाल उठे हैं। इनकी वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों की जानकारी नहीं?

इंदौर स्वास्थ्य विभाग (Indore Health Department) की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में कुछ अस्पतालों के पंजीयन और संचालन से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं होने का दावा किया गया है। इससे अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। शहर में संचालित अस्पतालों का रिकॉर्ड कितना अपडेट है? क्या सभी अस्पतालों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? इन सवालों के जवाब भी सामने आने बाकी हैं।

अफसरों का फर्जीवाड़ा: गड्ढे वहीं, फोटो कहीं और की! लोकपथ ऐप पर शिकायतें बंद, मंत्री के निर्देश बेअसर | Officials' Fraud: Potholes Here, Photos Elsewhere! Lokpath App Complaints Closed, Minister's Orders Ineffective
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लोक निर्माण विभाग के लोकपथ एप पर रोड के गड्ढों की शिकायतें बंद दिखाई गईं, लेकिन सागर जिले के बीना और खुरई-राहतगढ़ रोड पर हालत जस की तस बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अफसरों ने दूसरी रोड की फोटो अपलोड कर शिकायतों का निराकरण दर्ज किया। मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन में निपटारे के निर्देश दिए थे। <br />
लोक निर्माण विभाग के लोकपथ एप पर रोड के गड्ढों की शिकायतें बंद दिखाई गईं, लेकिन सागर जिले के बीना और खुरई-राहतगढ़ रोड पर हालत जस की तस बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अफसरों ने दूसरी रोड की फोटो अपलोड कर शिकायतों का निराकरण दर्ज किया। मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन में निपटारे के निर्देश दिए थे। <br />

नियम उल्लंघन मिला तो कार्रवाई करेंगे

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का पक्ष भी सामने आया है। अधिकारियों ने अनियमितताओं के आरोपों से घिरे अस्पतालों की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है। हालांकि कार्रवाई की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। यह भी सामने नहीं आया है कि कितने अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। संबंधित जांच कब तक पूरी होगी, इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।

मरीज अस्पताल की वैधता कैसे जांचें?

निजी अस्पताल में इलाज कराने से पहले उसकी जरूरी जानकारी लेना महत्वपूर्ण है। मरीज अस्पताल के पंजीयन संबंधी दस्तावेज देखने का अनुरोध कर सकते हैं। उन्हें इलाज करने वाले डॉक्टरों की योग्यता के बारे में भी जानकारी लेनी चाहिए। इलाज की प्रक्रिया और उससे जुड़े खर्च की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लेनी चाहिए। गंभीर बीमारियों के इलाज से पहले अस्पताल में उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं के बारे में पूछना चाहिए।

फर्जी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

निजी अस्पतालों का पंजीयन और जरूरी अनुमतियां सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी हैं। गंभीर बीमारी होने पर मरीज अस्पताल की सुविधाओं और चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि अस्पताल में प्रशिक्षित कर्मचारी और योग्य डॉक्टर मौजूद होंगे। इसके अलावा इलाज के लिए जरूरी उपकरण और सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। हालांकि इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का पता आधिकारिक जांच से ही चल सकेगा।
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