गैस गीजर बना साइलेंट किलर, नहाते समय दो युवकों की मौत, जानें कारण

इंदौर में बाथरूम में नहाते समय दो युवकों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गैस गीजर से निकली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बताई गई है। जानें बचाव के तरीके।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • इंदौर में एक महीने के अंदर गैस गीजर की जहरीली गैस से दो युवकों की मौत हो गई।

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक की बात गलत, कार्बन मोनोऑक्साइड जहर की पुष्टि हुई।

  • कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन-गंधहीन गैस है, इससे व्यक्ति को बेहोशी का अहसास भी नहीं होता।

  • डॉक्टरों ने शरीर के अंगों के गुलाबी होने को मौत की मुख्य वजह बताया।

  • विशेषज्ञों ने गैस गीजर को बंद बाथरूम के बजाय खुली जगह पर लगाने की सख्त चेतावनी दी है।

News In Detail

Indore News. अगर आपके घर में भी गैस गीजर लगा है, तो सावधान हो जाइए। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक महीने में दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने सबको डरा दिया है। बंद बाथरूम में नहाते समय दो स्वस्थ युवकों की जान चली गई। शुरुआत में सबको लगा कि यह हार्ट अटैक है, लेकिन जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था।

कैसे हुई मौत

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग में दोनों युवकों के शवों का परीक्षण किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत हार्ट अटैक से नहीं हुई थी। फॉरेंसिक विभाग के डॉ. बीके सिंह और डॉ. अंकित पी. जैन ने पुष्टि की। मौत का असली कारण गैस गीजर से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस थी। दोनों युवकों की उम्र करीब 20 साल थी और उन्हें कोई बीमारी नहीं थी।

क्यों जानलेवा है यह गैस?

डॉक्टरों के मुताबिक जब बाथरूम जैसी छोटी और बंद जगह में गैस गीजर चलता है, तो वहां ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। ऐसी स्थिति में कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बनने लगती है।

इस गैस की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसकी न तो कोई गंध होती है और न ही यह आंखों से दिखाई देती है। यहां तक कि पीड़ित व्यक्ति की सांस भी नहीं फूलती, उसे बस हल्का सा सिर भारी लगता है और वह अचानक बेहोश हो जाता है। कुछ ही मिनटों में यह गैस फेफड़ों के जरिए खून में मिलकर जान ले लेती है।

शरीर पर दिखने वाले अजीब निशान

जांच के दौरान डॉक्टरों ने मृतकों के शरीर पर पिंक हाइपोस्टेसिस देखा। शरीर के अंगों का रंग हल्का गुलाबी हो गया था, जो कार्बन मोनोऑक्साइड जहर की स्पष्ट निशानी है। यह गैस शरीर में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन को ब्लॉक कर देती है, जिससे इंसान का दम घुटने लगता है लेकिन उसे पता भी नहीं चलता।

वेंटिलेशन की कमी बनी काल

इंदौर में यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब छह महीने पहले भी एक 24 साल की युवती की जान इसी तरह गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि बाथरूम में वेंटिलेशन यानी हवा आने-जाने की जगह न होना ही इन हादसों की सबसे बड़ी वजह है। जागरूकता की कमी के कारण लोग गीजर को बंद जगह पर लगवा लेते हैं, जो बाद में गैस चैंबर में बदल जाता है।

इन सावधानियों से बच सकती है जान

  • खुली जगह पर लगवाएं: गैस गीजर को हमेशा बालकनी या छत जैसी खुली जगह पर ही फिट करवाएं।

  • बाथरूम में न हो गीजर: यदि गीजर बाथरूम के अंदर है, तो उसे तुरंत बाहर शिफ्ट करवाएं।

  • दरवाजा-खिड़की खोलें: यदि बाथरूम में गीजर लगा है, तो नहाते समय खिड़की या वेंटिलेटर जरूर खुला रखें।

  • ISI मार्क ही चुनें: केवल उच्च गुणवत्ता वाले सर्टिफाइड गैस गीजर का ही इस्तेमाल करें।

  • समय पर सर्विस: गीजर और उसके पाइप की नियमित जांच करवाते रहें।

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