शादी करके एमपी में आई महिलाओं के आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट इंदौर का अहम फैसला

इंदौर हाईकोर्ट ने शादी करके एमपी आई महिलाओं के आरक्षण पर अहम फैसला दिया है। याचिकाएं एसटी, एससी, ओबीसी महिला उम्मीदवारों ने दायर की थीं। कोर्ट ने कहा, यदि जाति दोनों राज्यों में समान आरक्षण में है, तो आरक्षण नहीं खत्म किया जा सकता है।

author-image
Sanjay Gupta
New Update
indore high court reservation married women mp
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News in Short

  •  इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ ने शादी करके एमपी आई महिलाओं के आरक्षण पर अहम फैसला दिया है।

  • याचिकाएं एसटी, एससी, ओबीसी महिला उम्मीदवारों ने दायर की थीं।

  • कोर्ट ने कहा, यदि जाति दोनों राज्यों में समान आरक्षण में है, तो आरक्षण नहीं खत्म किया जा सकता है।

  • मामले में महिलाएं शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा पास कर चुकी थीं।

  • राज्य सरकार ने कहा था कि बाहरी राज्य का जाति प्रमाणपत्र मान्य नहीं है।

News in Detail

INDORE. शादी करके अन्य राज्यों से एमपी में आई महिला उम्मीदवारों के आरक्षण को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। एसटी, एससी व ओबीसी कैटेगरी की विविध महिला उम्मीदवारों ने इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

इसमें हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता की जाति मूल राज्य और एमपी में भी उसी आरक्षण कैटेगरी में आती है तो फिर आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता है।

यह है मामला

मामला मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ा हुआ है। विविध आरक्षण कैटेगरी की महिला उम्मीदवारों ने साल 2021 में यह याचिका दायर की थी। इस पर अब फैसला आया है।

इन महिला उम्मीदवारों की याचिका थी कि उन्होंने लिखित परीक्षा पास की थी लेकिन दस्तावेज सत्यापन के समय उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनके पास एमपी की जगह अन्य राज्यों का जाति सर्टिफिकेट था। इसी को लेकर ये उम्मीदवार हाईकोर्ट गए थे।

हाईकोर्ट में यह रखे गए तर्क

हाईकोर्ट में उम्मीदवारों ने तर्क रखा कि उनकी जाति का प्रमाण पत्र वैध है। वह अब मध्यप्रदेश की मूल निवासी हैं। ऐसे में उनके आरक्षण के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता है।

वहीं राज्य सरकार ने तर्क दिया कि आरक्षण का लाभ केवल मूल निवासी को ही दिया जाता है। बाहरी राज्यों के सर्टिफिकेट को मध्यप्रदेश में मान्य नहीं किया जाता है।

हाईकोर्ट ने यह दिया फैसला

इस पर जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने फैसला सुनाया है। इसमें कहा गया कि शादी के बाद किसी अन्य राज्य से मध्यप्रदेश में आकर स्थाई रूप से बसने वाली महिलाओं को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह तब तक है, जब तक उनकी जाति दोनों राज्यों में समान आरक्षित श्रेणी में हो।

बेंच ने कहा कि भर्ती नियमों और विज्ञापन में शर्तों से अलग नई पात्रता शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं है। केवल इस आधार पर कि जाति प्रमाण पत्र दूसरे राज्य से जारी है।

आरक्षण का दावा खत्म नहीं किया जा सकता, जब तक कि नियमों में इसके बारे में स्पष्ट निषेध नहीं किया गया हो। संबंधित अधिकारी जांच करें कि दोनों राज्यों में वह संबंधित जाति को समान आरक्षण दिया गया हो।

ये खबर भी पढ़िए...

दमोह OBC पैर धुलाई कांड: सुप्रीम कोर्ट की दखल से हाईकोर्ट ने रोकी सुनवाई, अब अंतिम फैसला SC के हाथ

OBC आरक्षण केसः सुप्रीम कोर्ट बोला-राजनीतिक कारणों से जिरह मत कीजिए, मामला जनवरी तक टला

27 फीसदी OBC आरक्षण केस में सुनवाई नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा चीफ जस्टिस को मेंशन कीजिए

27 फीसदी OBC आरक्षण केस में सुनवाई एक दिन आगे बढ़वाई, 13 नवंबर के लिए लिस्ट

मध्यप्रदेश इंदौर हाईकोर्ट इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ आरक्षण
Advertisment