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इंदौर नगर निगम बिल घोटाले में ED पर आंच, कोर्ट बोला अकाउंटेंट साल्वी को 15% कमीशन, गिरफ्तारी क्यों नहीं
Sanjay Gupta | Sept 02, 2026, 12:46 IST
इंदौर निगम बिल घोटाला
इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में अब आंच ED की जांच पर भी आ गई है। इस मामले में आरोपियों द्वारा लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। इस पर जिला कोर्ट ने भी अब टिप्पणी की है।
इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल की जांच ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) इंदौर कर रहा है। इसके तहत ईडी ने 1 जून 2026 को निगम के अभय राठौर, ठेकेदार राहुल बड़ेरा और मोहम्मद जाकिर - तीनों की गिरफ्तारी की है और तीनों जेल में हैं।
इस मामले में राठौर और बड़ेरा की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। अब जाकिर की भी जमानत याचिका खारिज हुई, लेकिन इस दौरान जिला कोर्ट ने ईडी की जांच पर भी सवाल उठा दिए हैं।
दरअसल इस केस में एक-दो नहीं, ईडी ने पूरे 32 को आरोपी बनाया है। ईडी ने जांच में 103 करोड़ का घोटाला पाया है। लेकिन ईडी ने गिरफ्तारी केवल राठौर, बड़ेरा और जाकिर की की। जब जिला कोर्ट में 19 अगस्त को राठौर और बड़ेरा की याचिका पर सुनवाई हुई, तब भी दोनों ने आरोप लगाए कि ईडी ने केवल तीन को ही गिरफ्तार किया और बाकी सह-अभियुक्तों को बिना गिरफ्तार किए ही चालान पेश किया है। वहीं अब जाकिर की जमानत याचिका के दौरान भी यह आरोप लगे।
ईडी ने अपनी जांच में कहा कि मेसर्स किंग, मेसर्स ग्रीन कंस्ट्रक्शन और मेसर्स न्यू कंस्ट्रक्शन द्वारा 48 करोड़ का भुगतान निगम से लिया गया। यह फर्जी ऑर्डर, टेंडर, बिल के आधार पर लिया गया। इसमें जाकिर की किंग ने ही 13 करोड़ 18 लाख का भुगतान लिया।
इस भुगतान में से 50 फीसदी कमीशन अभय राठौर लेता था और अकाउंटेंट राजकुमार साल्वी को 15 फीसदी कमीशन मिलता था। यह कमीशन नकद में दिया जाता था। ईडी ने जांच में कहा कि पूरा कमीशन कैश में होने से किसी के पास यह कैश नहीं मिला, इसलिए संपत्ति जब्त की है।
इस मामले में सभी तथ्यों को सुनने के बाद स्पेशल कोर्ट ने ईडी की जांच पर सवाल उठाया है। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि राठौर 50 फीसदी कमीशन ले रहा है और अकाउंटेंट साल्वी 15 फीसदी कमीशन ले रहा है। लेकिन साल्वी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। प्रथम दृष्टया जांच में निष्पक्षता का अभाव दिखाई देता है। लेकिन इस पर अभी टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं है और यह ट्रायल का विषय है।
मोहम्मद जाकिर, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद सिद्दीकी, राहुल बड़ेरा, रेणु बड़ेरा, एहतशाम खान, आलिया खान, बिल्किस खान, मोहम्मद असलम खान, मौसम व्यास, इमरान खान, मोहम्मद जाहिद खान, राजेंद्र शर्मा, अभय सिंह राठौर, मनीधुरन कर्ता, राजकुमार साल्वी, करण सिरोगिया, समर सिंह परमार, अनिल कुमार गर्ग, शरद कतरोलिया, अरुण शुक्ला, रामेश्वर परमार, उदय सिंह भदौरिया, जगत सिंह ओहरिया, जगदीश चंद्र चौकसे, चेतन सिंह भदौरिया, अर्पित जैन, आयुष जैन, उषा जैन, मनोज मारू, याशु गर्ग, रमेश रूंगटा।
ईडी ने केस दर्ज करने के बाद 5 और 6 अगस्त 2024 को आरोपियों के 20 अलग-अलग ठिकानों पर छापे मारे थे। ईडी ने 222.04 करोड़ की नकदी, बैंक बैलेंस, एफडी, डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फ्रीज किेए थे। जांच के दौरान ईडी ने आरोपियों की 37 करोड़ 14 लाख रुपए मूल्य की 52 अचल संपत्तियों को भी अटैच किया है। इस तरह ईडी कुल 59 करोड़ 18 लाख रुपए की संपत्तियां अटैच कर चुका है।
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इस मामले में राठौर और बड़ेरा की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। अब जाकिर की भी जमानत याचिका खारिज हुई, लेकिन इस दौरान जिला कोर्ट ने ईडी की जांच पर भी सवाल उठा दिए हैं।
ईडी की जांच पर इसलिए आंच
राठौर को 50 और साल्वी को 15 फीसदी कमीशन
इस भुगतान में से 50 फीसदी कमीशन अभय राठौर लेता था और अकाउंटेंट राजकुमार साल्वी को 15 फीसदी कमीशन मिलता था। यह कमीशन नकद में दिया जाता था। ईडी ने जांच में कहा कि पूरा कमीशन कैश में होने से किसी के पास यह कैश नहीं मिला, इसलिए संपत्ति जब्त की है।
जिला कोर्ट ने ईडी पर उठाया सवाल
ईडी ने इन 32 को बनाया है आरोपी
ईडी के चालान में यह सभी 32 आरोपी हैं-
ईडी कर चुका यह संपत्तियां अटैच
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