इंदौर नगर निगम का फर्जी बिल घोटाला 500 करोड़ का, तीन निगमायुक्तों के समय ड्रेनेज विभाग में खेल होने के आरोप

Sanjay Gupta | Feb 03, 2026, 14:36 IST
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indore municipal corporation drainage department fake bill scam 500 crores
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इंदौर नगर निगम का बिल घोटाला 150 करोड़ का है या और बड़ा? यह मामला एक बार फिर उठा है। जेल में बंद ठेकेदारों ने लिखित में एक आवेदन हाईकोर्ट में दिया है। क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन (सीआरआर) में यह आरोप लगाए गए हैं कि यह घोटाला 500 करोड़ का है।

News In Short

  • इंदौर नगर निगम के 500 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में तीन पूर्व निगमायुक्तों के कार्यकाल पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
  • 2015 से ड्रेनेज विभाग में फर्जी बिलों के जरिए अवैध रूप से पैसे लेने की बात की जा रही है।
  • हाईकोर्ट में ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने फोटोकॉपी साक्ष्य पेश किए थे, जिनमें मूल दस्तावेज गायब थे।
  • इस घोटाले में इंजीनियर अभय राठौर और अन्य अधिकारियों का नाम सामने आया है।
  • महापौर ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की, लेकिन जांच रिपोर्ट शासन स्तर पर कभी जारी नहीं की गई।

News In Detail

इनके कार्यकाल में ड्रेनेज विभाग में हुआ था खेल

ठेकेदार ने इस घोटाले के पीछे इंदौर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से नगर निगम में फर्जी बिल बनाकर पैसे लिए जा रहे हैं।

खासकर ड्रेनेज विभाग में फर्जी बिल बनाकर आयुक्त मनीष सिंह से लेकर प्रतिभा पाल के कार्यकाल के दौरान करीब 500 करोड़ रुपए का अवैध धन लिया गया है।

30113665-466
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साल 2015 से चल रहा खेल

ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दिया है। इसमें लिखा है कि यह मामला 2015 से चल रहा है। इसके बाद भी जरूरी दस्तावेज जब्त नहीं किए गए।

ड्रेनेज विभाग के जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, जैसे कमलसिंह, धराचंद पालीवाल, सुरेंद्र बागोरा, आनंद, विजय, इनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं हुआ। सिर्फ आईएएस प्रतिभा पाल के कार्यकाल के दौरान के ही अपराध दर्ज किए गए हैं।

इस मामले में जांच के लिए कई नाम भी आवेदन में दिए गए थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इसके लिए हाईकोर्ट में केस भी दायर किए गए हैं। अब इन सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए।

हाईकोर्ट में फोटो कॉपी केस पर लगी थी याचिका

इस फर्जी बिल घोटाले में गिरफ्तार हुए इंजीनियर अभय राठौर के साथ ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में सीआरआर (क्रिमिनल रिवीजन याचिका) दायर की थी।

इनकी आपत्ति थी कि जिला ट्रायल कोर्ट में पुलिस ने जो सेकेंडरी साक्ष्य पेश किए, वे फोटोकॉपी हैं। इन फोटोकॉपियों में मूल दस्तावेज नहीं थे। बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए ये गायब कर दिए गए थे। ठेकेदारों का कहना था कि फोटोकॉपी को चालान में मान्य नहीं किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने यह किए आदेश

इंदौर हाईकोर्ट ने यह रिवीजन याचिका मंजूर की है। साथ ही, फोटोकॉपी को साक्ष्य के रूप में माने जाने संबंधी ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज किया है। साथ ही एमपी सरकार को यह अधिकार दिए हैं कि वह नए सिरे से फिर से साक्ष्य (Evidence), दस्तावेज धारा 63(2) में कानून के तहत पेश कर सकती है।



क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला अप्रैल 2025 में सामने आया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में तत्कालीन निगमायुक्त हर्षिका सिंह ने यह केस पकड़ा था। उन्होंने कुछ कंपनियों पर बिना काम किए ही बिल लगाने का आरोप लगाया था। साथ ही इसकी जांच करवाई थी।

जांच में पता चला था कि पांच साल पुरानी ड्रेनेज लाइन डालने के लिए 20 कामों के नाम पर 28 करोड़ रुपए के बिल लेखा शाखा तक पहुंचे थे। असल में ये काम किए ही नहीं गए थे।

इसमें मुख्य रूप से नींव कंस्ट्रक्शन के मोहम्मद साजिद, ग्रीन कंस्ट्रक्शन के मोहम्मद सिदिकी, किंग कंस्ट्रक्शन के मो. जाकिर, क्षितिज इंटरप्राइजेस की रेणु वडेरा और जाह्नवी इंटरप्राइजेस के राहुल वडेरा का नाम सामने आया है।

इस मामले में एक और अजीब घटना हुई। जब इस फाइल की जांच चल रही थी, तो इंजीनियर सुनील गुप्ता की कार से इन बिलों की मूल फाइल चोरी हो गई थी। इस पर भी थाने में केस दर्ज कराया गया था।

घोटाला 150 करोड़ तक पहुंचा

बाद में कई फाइलों की फोटोकॉपी निकालकर जांच की गई थी। इसमें यह घोटाला लगातार बढ़ते हुए करीब 150 करोड़ तक पहुंच गया था। इसमें मुख्य आरोपी के तौर पर इंजीनियर अभय राठौर का नाम सामने आया था।

इसके अलावा, लेखा और आडिट विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी इसमें शामिल थे। निगम के पुराने घोटालेबाज बेलदार असलम खान के भाई एहतेश्याम उर्फ काकू और उनकी कई कंपनियों का भी नाम इस मामले में आया।

पुलिस की जांच के मुताबिक, फर्जी कंपनियों ने बिना काम किए ही फर्जी बिल की फाइलें बना दी थीं। इसके बाद, लेखा और ऑडिट विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर पैसे निकाल लिए गए थे।

पैसे खातों में आने के बाद, ठेकेदारों ने इसे कैश में निकाल लिया और अभय राठौर समेत दूसरे आरोपियों को उनका हिस्सा दिया। फर्जी बिल बनाने के लिए, दूसरों की फाइलों के जावक नंबर और टेंडर नंबर जैसी चीजें फर्जी तरीके से इस्तेमाल की गई थीं।

जांच के लिए प्रमुख सचिव आए, फिर रिपोर्ट दबी

इस मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिखा था। इसमें उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी। इस पर शासन ने प्रमुख सचिव अमित राठौर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटी एक दिन के लिए इंदौर भी आई थी और नगर निगम का दौरा कर कुछ दस्तावेज लिए थे। वहीं, इसके बाद इस घोटाले में क्या हुआ, किसी को नहीं पता।

मामले की कोई रिपोर्ट कभी भी शासन स्तर से जारी नहीं की गई है। उधर जिला कोर्ट में पुलिस ने चालान पेश कर दिया है, जिसमें ट्रायल चल रहा है।

इसमें आरोपी में सबसे उच्च स्तर पर इंजीनियर अभय राठौर का ही नाम आया है। वहीं उन्होंने और अन्य ठेकेदारों ने आरोप लगाए हैं कि इसमें उच्च स्तर के अधिकारी भी शामिल थे। वहीं, मूल दस्तावेज गायब कर उन्हें बचा लिया गया है। जबकि यह घोटाला तो बहुत बड़ा था।

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