इंदौर में रिटायर्ड अफसर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.15 करोड़ की ठगी

इंदौर में एक रिटायर्ड सरकारी अफसर और उनकी पत्नी को 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया गया। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराया। उन्होंने 1.15 करोड़ रुपए ठग लिए।

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Rahul Dave
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News in Short

  • इंदौर के एक रिटायर्ड अफसर को जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट किया।
  • आरोपियों ने खुद को सीबीआई और ईडी का फर्जी अधिकारी बताया।
  • दंपती को डराया कि उनके खाते में आतंकी फंडिंग का पैसा आया है।
  • डर के मारे बुजुर्ग दंपती ने कुल 1.15 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए।
  • 15 दिन बाद ठगी का अहसास होने पर पुलिस में शिकायत की गई।

News in Detail

INDORE. इंदौर शहर में डिजिटल अरेस्ट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और उनकी पत्नी ठगी का शिकार हुए हैं। जालसाजों ने बड़ी चालाकी से उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। उन्होंने दंपती से करीब एक करोड़ पंद्रह लाख रुपए लूट लिए हैं। यह पूरी घटना किसी फिल्मी कहानी की तरह शुरू हुई थी। ठगों ने बुजुर्ग दंपती को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। पुलिस अब इस पूरे गिरोह की सरगर्मी से तलाश कर रही है। शहर में इस तरह की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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प्रॉपर्टी बेचकर आए पैसे पर थी ठगों की नजर

पीड़ित अधिकारी ने हाल ही में अपनी एक प्रॉपर्टी बेची थी। इस सौदे से उन्हें करीब 82 से 85 लाख रुपए मिले थे। ठगों को इस बड़ी रकम की जानकारी पहले से ही मिल गई थी। उन्होंने इसी पैसे को हड़पने के लिए पूरी साजिश रची थी।

जालसाजों ने अधिकारी को फोन कर खुद को बड़ा अफसर बताया। उन्होंने कहा कि वे सीबीआई या ईडी विभाग से बोल रहे हैं। उन्होंने पीड़ित को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाया। घबराहट में आकर दंपती ने अपनी सारी जमा पूंजी गंवा दी।

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वीडियो कॉल पर वर्दी पहनकर दी गिरफ्तारी की धमकी

ठगों ने पीड़ित को डराने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लिया। कॉल करने वाला अपराधी पुलिस की वर्दी पहनकर सामने आया था। उसने दावा किया कि आतंकी अफजल खान ने उन्हें पैसा भेजा है। यह सुनकर रिटायर्ड अफसर और उनकी पत्नी बहुत डर गए थे।

अपराधियों ने कहा कि आपके बैंक खातों की जांच करनी होगी। उन्होंने जांच के नाम पर पैसा सरकारी खाते में डालने को कहा। भरोसा दिलाया कि क्लीन चिट मिलने पर पैसा वापस मिल जाएगा। इसी झांसे में आकर दंपती ने खाते में पैसा भेज दिया।

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15 दिनों तक घर में ही कैद रहा बुजुर्ग दंपती

हैरानी की बात यह है कि यह खेल 15 दिन चला। इस दौरान दंपती अपने ही घर में डिजिटल कैद रहे। उन्हें किसी से भी बात करने की अनुमति नहीं दी गई थी। ठगों ने उन्हें कैमरा ऑन रखने के लिए मजबूर किया था।

जब कई दिनों तक ठगों का फोन नहीं लगा तो शक हुआ। तब जाकर पीड़ित को अहसास हुआ कि वे ठगे जा चुके हैं। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस की क्राइम ब्रांच से संपर्क किया। पुलिस ने अब इस मामले की ई-एफआईआर दर्ज कर ली है।

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पुलिस की सलाह

पुलिस ने जनता के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ कहा है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। ऐसे कॉल आने पर तुरंत फोन काटकर पुलिस को बताएं।

जालसाज अक्सर पढ़े-लिखे और बुजुर्ग लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। वे लोगों की निजी जानकारी जुटाकर उन्हें डराने का काम करते हैं। सतर्क रहकर ही आप अपनी मेहनत की कमाई बचा सकते हैं। किसी भी अंजान खाते में कभी भी पैसा ट्रांसफर न करें।

FAQ

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर अपराध है जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को कैमरा ऑन रखकर घर में ही रहने को मजबूर करते हैं, ताकि वह किसी से मदद न मांग सके।

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