जबलपुर कलेक्टर को हाईकोर्ट की चेतावनी, 2 साल से नहीं दिया जवाब, OIC पर 10 हजार जुर्माना
Neel Tiwari | Sept 26, 2026, 17:53 IST
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जबलपुर की सीलिंग भूमि याचिका में दो साल से जवाब नहीं देना मामले के इंचार्ज ऑफिसर को भारी पड़ता नजर आ रहा है। पांच सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने OIC पर 10 हजार रु की कॉस्ट लगाई। कोर्ट ने एक सप्ताह का अंतिम मौका दिया। साथ ही कलेक्टर को हाईकोर्ट ने चेतावनी दी।
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मुन्नालाल पटेल की जमीन का विवाद सीलिंग कानून से जुड़ा है।
- मामला 1990 से अलग-अलग अदालतों में चलता आ रहा है।
- जबलपुर हाई कोर्ट में दो साल से सरकार का जवाब नहीं आया।
- पांच सुनवाई के बाद OIC पर 10 हजार रु की कॉस्ट लगी।
- जवाब नहीं आया तो कलेक्टर जबलपुर को खुद आना होगा।
जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने OIC पर व्यक्ति भगत 10 हज़ार रु का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का अंतिम मौका दिया। यह मौका ही 10 हजार रु की कॉस्ट के साथ दिया गया। खास बात यह है कि कॉस्ट सरकार पर नहीं लगी है। यह राशि OIC यानी Officer In Charge से वसूली जाएगी। इसके साथ ही जबलपुर कलेक्टर को चेतावनी दी गई है कि यदि अब जवाब नहीं आया तो कलेक्टर को खुद कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
सरकार नहीं, OIC को भरनी होगी 10 हजार की कॉस्ट
हाई कोर्ट में भी जवाब अब तक पेश नहीं हुआ। सरकार की ओर से लगातार समय मांगा गया। पांच सुनवाई के बाद कोर्ट ने और समय नहीं दिया। कोर्ट ने अब इसे अंतिम अवसर के तौर पर दिया है। इस देरी की जिम्मेदारी OIC पर तय की गई है। इसीलिए 10 हजार रु की कॉस्ट OIC से वसूली जाएगी। कोर्ट ने सरकारी फंड से राशि भरने पर रोक लगाई है। यह रकम हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में जमा होगी।
एक सप्ताह का अंतिम मौका, फिर कलेक्टर की बारी
अगर जवाब फिर भी पेश नहीं होता है, तो स्थिति बदलेगी। कॉस्ट जमा नहीं हुई तो भी कोर्ट सख्ती कर सकता है। कोर्ट ने आदेश में साफ लिखा है कि यदि अब जवाब नहीं आता तो कलेक्टर जबलपुर को खुद आना होगा। कोर्ट ने कलेक्टर की व्यक्तिगत मौजूदगी की चेतावनी दी है।
कलेक्टर को क्यों दी गई व्यक्तिगत हाजिरी की चेतावनी
याचिकाकर्ता के अनुसार रिकॉर्ड में सरकार का नाम दर्ज है। इस वजह से जमीन के उपयोग में उसे परेशानी है।
इसी रिकॉर्ड को लेकर कलेक्टर का आदेश चुनौती में है।
सीलिंग कानून खत्म होने के बाद भी क्यों अटका रिकॉर्ड
याचिकाकर्ता का दावा है कि जमीन उसके कब्जे में रही। उसने जमीन का मुआवजा भी नहीं लिया है। इसी आधार पर रिकॉर्ड दुरुस्त करने की मांग की गई। लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इस वजह से याचिकाकर्ता अपनी संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रहा। इसी विवाद का समाधान हाई कोर्ट से मांगा गया है।
1990 से चल रहा विवाद, 2024 में फिर हाई कोर्ट पहुंचा
इसके बाद सरकार से मामले पर जवाब मांगा गया। लेकिन दो साल में जवाब दाखिल नहीं हो पाया। इस दौरान पांच बार सुनवाई का मौका आया। हर बार जवाब के लिए समय मांगा गया। अब कोर्ट ने एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। साथ ही OIC पर 10 हजार रु की कॉस्ट लगाई है।
अगली सुनवाई में कलेक्टर की मौजूदगी पर रहेगी नजर
मामले में अब अगली सुनवाई काफी अहम होगी। वहां जवाब और कॉस्ट जमा होने की स्थिति देखी जाएगी। लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद में यह अहम पड़ाव है। अब सरकार का जवाब मामले की आगे की दिशा तय करेगा।
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