जबलपुर में करोड़ों की पैतृक जमीन पर बड़ा खेल: भाई ने फर्जी नक्शे से बहन का नाम हटाया, EOW भोपाल ने दर्ज की FIR
Neel Tiwari | May 25, 2026, 21:51 IST
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पैतृक संपत्ति और पेट्रोल पंप संचालन को लेकर सामने आए बड़े जमीन फर्जीवाड़े में EOW ने सगे भाई सहित दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि फर्जी नक्शा और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए बहन को करोड़ों की जमीन और पेट्रोल पंप की आय से वर्षों तक दूर रखा गया।
News in short
- EOW भोपाल ने गौरव इंगोले और धीरज कराड़े को बनाया आरोपी।
- आरोपियों पर IPC की धारा 120-B, 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज।
- फर्जी नक्शा बनाकर बहन दीप्ति श्रीवास्तव का नाम पैतृक जमीन से हटाने का आरोप।
- उसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर पेट्रोल पंप की लीज रिन्यू कर संचालन जारी रखने का मामला।
- EOW को शक, राजस्व और पेट्रोलियम अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था इतना बड़ा खेल।
News in detail
करोड़ों की जमीन और पेट्रोल पंप को लेकर भाई ने किया फर्जीवाड़ा
EOW भोपाल ने विस्तृत जांच के बाद पाया कि शिकायतकर्ता दीप्ति श्रीवास्तव को उनकी पैतृक व्यावसायिक संपत्ति से योजनाबद्ध तरीके से अलग किया गया और वर्षों तक उन्हें जमीन के किराए और पेट्रोल पंप से होने वाली आय से वंचित रखा गया। इसके बाद EOW ने 20 मई 2026 को FIR दर्ज कर मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
दीप्ति श्रीवास्तव की शिकायत पर EOW की बड़ी कार्रवाई
इसके बाद EOW भोपाल ने प्राथमिकी क्रमांक 0067/2026 दर्ज करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की गंभीर धाराओं में मामला कायम किया। आरोपियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी करने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उन्हें असली बताकर इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
1984 में खरीदी गई थी जमीन, बाद में भाई-बहन के नाम हुई दर्ज
EOW की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि इस जमीन का सरकारी स्तर पर कभी कोई बंटवारा नहीं हुआ और न ही किसी प्रकार की वैधानिक विभाजन प्रक्रिया पूरी की गई थी।
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फर्जी नक्शा बनाकर बहन का नाम हटाने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, इस नक्शे पर केवल गौरव इंगोले और धीरज कराड़े के हस्ताक्षर थे, जबकि संयुक्त मालिक होने के बावजूद दीप्ति श्रीवास्तव की सहमति तक नहीं ली गई।
फर्जी लीज डीड से कराया गया पेट्रोल पंप का रिन्यूअल
जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन पर पेट्रोल पंप संचालित हो रहा था, वह पूरी तरह संयुक्त स्वामित्व वाली थी, लेकिन शिकायतकर्ता को पूरे सौदे और संचालन से पूरी तरह बाहर रखा गया। दीप्ति श्रीवास्तव का आरोप है कि वर्षों तक पेट्रोल पंप से होने वाली व्यावसायिक आय में उन्हें कोई हिस्सा नहीं दिया गया और उन्हें आर्थिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाया गया।
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दूसरे पेट्रोल पंप और अन्य संपत्तियों की जांच भी शुरू
पेट्रोलियम और राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
इसी कारण अब उन अधिकारियों की जिम्मेदारी और भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है, जिन्होंने दस्तावेजों को स्वीकार किया या प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यदि जांच में मिलीभगत सामने आती है तो कई सरकारी अधिकारी और अन्य कारोबारी भी कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
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