जबलपुर मेडिकल कॉलेज में लापरवाही, 5 दिन तक डिब्बे में बंद पड़ा रहा नवजात का शव

Pawan Modiya | Jul 13, 2026, 24:19 IST
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जबलपुर मेडिकल कॉलेज
जबलपुर मेडिकल कॉलेज

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। मृत नवजात का शव पांच दिनों तक डिलीवरी रूम के बाहर प्लास्टिक के डिब्बे में रखा रहा। मामले में अस्पताल और पुलिस स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में मृत नवजात का शव मिला।
  • शव पांच दिनों तक प्लास्टिक डिब्बे में रखा रहा।
  • अस्पताल की लापरवाही पर जांच शुरू की गई।
  • प्रसूता की उम्र को लेकर दस्तावेजों में विवाद हुआ।
  • पुलिस और अस्पताल प्रबंधन कार्रवाई कर रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज में लापरवाही

मध्य प्रदेश के जबलपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बड़ी लापरवाही का आरोप लगा है। यहां मृत नवजात का शव पांच दिनों तक डिलीवरी रूम के बाहर पड़ा रहा। शव को एक प्लास्टिक के डिब्बे में बंद रखा गया था। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने अस्पताल व्यवस्था और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार मंडला जिले के यादव परिवार की बहू को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया था। महिला की हालत गंभीर बताई गई थी।

गर्भ में ही हो गई थी मौत

परिजनों के अनुसार महिला के गर्भ में पानी भर गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि शिशु की गर्भ में ही मौत हो चुकी थी। इसके बाद अस्पताल स्टाफ ने नवजात के शव को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू की। आरोप है कि शव को प्लास्टिक के डिब्बे में बंद कर दिया गया। इसके बाद डिब्बे पर मां के नाम का टैग लगाया गया। लेकिन नियमानुसार शव को मोर्चरी में रखा जाना चाहिए था। इसके बावजूद शव डिलीवरी रूम के बाहर ही रखा रहा। परिजनों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। पांच दिनों तक शव उसी स्थिति में पड़ा रहा।

उम्र को लेकर उलझा मामला

इस मामले में प्रसूता की उम्र को लेकर भी विवाद सामने आया। अस्पताल के रिकॉर्ड में महिला की उम्र पहले 17 साल दर्ज थी। नाबालिग से जुड़े मामले की जानकारी अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस अस्पताल पहुंची थी। पुलिस ने प्रसूता की सास के बयान दर्ज किए थे। हालांकि उस समय शव परिजनों को नहीं सौंपा गया।

मामला कागजी प्रक्रिया और उम्र की पुष्टि में उलझ गया। इसी दौरान नवजात का शव मोर्चरी में नहीं रखा गया। शनिवार को पुलिस दोबारा अस्पताल पहुंची। पुलिस ने दस्तावेजों में सुधार करवाया। जांच में प्रसूता की उम्र 17 साल की जगह 20 साल बताई गई। इसके बाद मामला बाल संरक्षण कानून से जुड़ा नहीं रहा।

पोस्टमार्टम से किया इनकार

दस्तावेजों में सुधार के बाद मृत नवजात का शव परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई। परिजनों ने कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने शव सौंप दिया।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल शव को सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर उठ रहा है। अस्पतालों में मृत नवजात या शवों को रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया होती है। इस मामले में उस प्रक्रिया के पालन पर सवाल हैं।

अस्पताल ने शुरू की जांच

मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। अस्पताल स्तर पर आंतरिक जांच शुरू की गई है। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि शव को मोर्चरी में क्यों नहीं रखा गया। अस्पताल प्रशासन अब संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस भी कर रही जांच

पुलिस ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी है। गढ़ा सीएसपी आशीष जैन ने कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस प्रक्रिया की भी जांच होगी। पुलिस यह देख रही है कि मामले में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं। जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

यह घटना सरकारी अस्पतालों में मरीजों और परिजनों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर सवाल उठाती है। मृत नवजात का शव लंबे समय तक खुले स्थान पर रहना गंभीर मामला माना जा रहा है। अस्पतालों में मरीजों के इलाज के साथ सम्मानजनक व्यवस्था भी जरूरी होती है। इस मामले में अब जांच के बाद ही साफ होगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई। फिलहाल अस्पताल और पुलिस दोनों अपनी-अपनी जांच कर रहे हैं।

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