जबलपुर रेलवे मेडिकल क्लेम घोटाला: 40 लाख की गड़बड़ी में दो क्लर्क सस्पेंड

Anjali Dwivedi | Jul 07, 2026, 15:13 IST
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जबलपुर रेलवे मेडिकल क्लेम घोटाला
जबलपुर रेलवे मेडिकल क्लेम घोटाला

जबलपुर में पश्चिम मध्य रेलवे के मेडिकल क्लेम में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिलों में शून्य जोड़कर रकम बढ़ाई गई। दो लिपिक निलंबित, 40 लाख रुपए के घोटाले की आशंका है।

जबलपुर में पश्चिम मध्य रेलवे के मेडिकल क्लेम में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कर्मचारियों ने इलाज के बिलों में हेराफेरी कर सरकारी पैसा हड़पने की साजिश हुई है। शुरुआती जांच में यह गड़बड़ी करीब 40 लाख रुपए की बताई जा रही है। मामले में दो क्लर्क को सस्पेंड कर दिया गया है। रेलवे विजिलेंस अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

बता दें कि रेलवे बोर्ड की ओर से कर्मचारियों को इलाज की सुविधा दी जाती है। कर्मचारी निजी अस्पताल में इलाज कराकर बिल विभाग में जमा करते हैं। जांच के बाद यह रकम कर्मचारी के खाते में वापस कर दी जाती है। इसी प्रक्रिया में सेंधमारी कर पैसों का गबन किया गया।

जबलपुर मेडिकल क्लेम में फर्जीवाड़ा
जबलपुर मेडिकल क्लेम में फर्जीवाड़ा


बिल में जोड़ा गया शून्य

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक कुछ कर्मचारियों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराया था। इसके बाद कार्मिक विभाग के लिपिकों से मिलीभगत की गई। बिलों की असली रकम के आगे अतिरिक्त शून्य जोड़ दिए गए।

इस तरह 10 हजार रुपए का बिल एक लाख रुपए का दिखाया गया। इसी बढ़ी हुई रकम के आधार पर भुगतान भी करा लिया गया। यह पूरा खेल कार्मिक विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था।

दो लिपिक निलंबित

प्रारंभिक जांच में कार्मिक विभाग के मयंक श्रीवास्तव और अतुल कुमार की भूमिका संदिग्ध मिली। जांच अधिकारियों ने दोनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को तुरंत निलंबित कर दिया गया।

रेलवे विजिलेंस ने अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने दो कर्मचारियों के निलंबन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अनियमितता के चलते यह कार्रवाई की गई है।

कटनी तक जांच

जांच में सामने आया कि फर्जीवाड़ा सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं है। कटनी मंडल के कुछ कर्मचारियों के मेडिकल बिल भी संदिग्ध पाए गए हैं। कटनी इलेक्ट्रिक लोको शेड के कर्मचारियों के बिलों पर भी सवाल उठे हैं।

इसके अलावा कार्मिक और लेखा विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। विजिलेंस टीम अब सभी संदिग्ध मामलों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

अब तक के तथ्य

जांच में अब तक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मेडिकल क्लेम के करीब 19 मामलों में गड़बड़ी मिली है। फर्जी भुगतान की राशि 40 लाख रुपए से ज्यादा हो सकती है। अब तक दो कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। छह अन्य रेलकर्मी भी संदेह के घेरे में हैं।
एक कर्मचारी के तीन महीने में दो मेडिकल क्लेम पास हुए। तीन-चार मामलों में जरूरी दस्तावेज अधूरे मिले हैं।

विभाग की भूमिका पर सवाल

जांच में कार्मिक और लेखा विभाग की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। मेडिकल क्लेम का भुगतान विभागीय परीक्षण के बाद ही होता है। ऐसे में अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत, दोनों एंगल पर जांच चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक फर्जी भुगतान के बदले रकम के बंटवारे की भी आशंका जताई जा रही है। मामले में एक अन्य कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भी जारी किया गया है। विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद और भी कार्रवाई हो सकती है।

आगे क्या होगा

रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है। विजिलेंस टीम सभी संदिग्ध बिलों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। जो भी कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

निलंबित लिपिकों से भी पूछताछ जारी है। रेलवे का कहना है कि गबन की पूरी रकम वसूलने की कोशिश की जाएगी। मामले से जुड़े सभी दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

इस मामले ने रेलवे के मेडिकल क्लेम सिस्टम की खामियां भी उजागर कर दी हैं। आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं। पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन पूरे मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है।

FAQ

  1. जबलपुर रेलवे मेडिकल क्लेम घोटाला क्या है?
    यह मेडिकल बिलों में हेराफेरी कर सरकारी पैसे के गबन का मामला है। बिलों में अतिरिक्त शून्य जोड़कर रकम बढ़ाई गई। शुरुआती जांच में यह घोटाला करीब 40 लाख रुपए का बताया जा रहा है।
  2. इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
    कार्मिक विभाग के दो लिपिकों को निलंबित किया जा चुका है। रेलवे विजिलेंस ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एक अन्य कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुआ है।
  3. क्या फर्जीवाड़ा सिर्फ जबलपुर तक सीमित है?
    नहीं, जांच में कटनी मंडल के कर्मचारियों के बिल भी संदिग्ध पाए गए हैं। कटनी इलेक्ट्रिक लोको शेड के मामले भी जांच के दायरे में हैं। कुल मिलाकर 19 मामलों में गड़बड़ी मिली है।
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