जज ने की कानून की अनदेखी, रिवीजन कोर्ट ने निचली अदालत की कानूनी समझ पर उठाए सवाल
Neel Tiwari | Apr 30, 2026, 20:09 IST
judge ignores
जबलपुर के क्रिमिनल रिवीजन मामले में रिवीजन कोर्ट ने निचली अदालत की कानूनी समझ पर सवाल उठाए। बिना बयान दर्ज किए परिवाद खारिज करने को अवैध ठहराया। कोर्ट ने केस फिर से बहाल कर दिया।
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- बिना शपथ पर बयान दर्ज किए परिवाद खारिज किया गया।
- BNSS की धारा 223 और 226 का पालन नहीं किया गया।
- कोर्ट ने कहा कानूनी प्रक्रिया की मूलभूत समझ में चूक।
- आदेश को वैधता और औचित्य रहित बताया गया।
- केस दोबारा बहाल, 5 मई को अगली सुनवाई तय।
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मूल कानून की समझ में गंभीर चूक
कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को जरूरी प्रक्रिया का पालन करना था, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। यह केवल साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के विपरीत कदम था। इससे आदेश की वैधता संदिग्ध हो गई। इस मामले के सामने आने के बाद कानूनी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि मामलों का बोझ कम करने की जल्दी में जज हवा हवाई आदेश जारी कर रहे हैं।
जमीन विवाद से शुरू हुआ था आपराधिक मामला
धारा 223 की अनिवार्य प्रक्रिया
बिना परीक्षण के ही दे दिया अंतिम निष्कर्ष
गलत धारणा में दिया गया आदेश
क्या मामलों के दबाव में हुई जल्दबाजी?
दोबारा शुरू होगी पूरी कानूनी प्रक्रिया
प्रक्रिया से समझौता यानी न्याय से समझौता
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