टाइगर रिजर्व के बीच कैलाशजी वाटर पार्क! नियमों की अनदेखी या मिलीभगत?
Neel Tiwari | Feb 02, 2026, 16:16 IST
Photograph: (the sootr)
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ‘कैलाश जी वाटर पार्क’ पर अनियमितताओं का आरोप, वाटर पार्क को अनुमति देने वाले अफसरों की भूमिका पर हाईकोर्ट में सवाल।
NEWS IN SHORT
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में संचालित कैलाश जी वाटर पार्क पर गंभीर आरोप।
- कोर एरिया में स्थित होने के बावजूद बफर जोन बताकर अनुमति लेने का दावा।
- अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर उपसंचालक द्वारा एनओसी जारी करने का आरोप।
- NTCA, वन अधिकारियों और कैलाश चटनानी को नोटिस जारी।
- अगली सुनवाई में सरकार को पेश करना होगा सभी अनुमतियों और दस्तावेजों का रिकॉर्ड।
NEWS IN DETAIL
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो देशभर में बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जाना जाता है, अब एक वाटर पार्क को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि रिजर्व के कोर एरिया से सटे क्षेत्र में कैलाश जी वाटर पार्क का संचालन किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ है बल्कि वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य पर भी सीधा प्रहार करता है। यह वही इलाका है जहां हाल के महीनों में बाघों की मौत के मामले सामने आए थे, जिससे क्षेत्र की संवेदनशीलता और अधिक बढ़ जाती है।
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जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा मामला
याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल एक व्यवसायिक गतिविधि का नहीं, बल्कि टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र में कानून के उल्लंघन का है, जो जनहित और पर्यावरण दोनों से जुड़ा है।
इस जनहित याचिका पर सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह सवाल सामने आया कि क्या इतने संवेदनशील क्षेत्र में किसी निजी वाटर पार्क को अनुमति दी जा सकती है और यदि दी गई है तो क्या वह नियमों के अनुरूप है। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में ही मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए।
वाटर स्पोर्ट्स का पानी कोर एरिया में छोड़ने का आरोप
उपसंचालक टाइगर रिजर्व को नहीं था NOC देने का अधिकार
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उपसंचालक को न तो यह प्रकरण स्वीकृत करने का अधिकार था और न ही एनओसी जारी करने की वैधानिक शक्ति, जिससे पूरी अनुमति प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ जाती है।
वाटर पार्क के बफर जोन में होने के आरोप
NTCA समेत अधिकारियों और कैलाश चटवानी को नोटिस
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अगली सुनवाई में सरकार को देना होगा पूरा ब्यौरा
अनुमतियों, एनओसी और संबंधित दस्तावेजों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इस जवाब के बाद ही तय होगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या नियमों की सुनियोजित अनदेखी का।
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