कटनी CSP नेहा पच्चीसिया को हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज
Neel Tiwari | Aug 11, 2026, 15:55 IST
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कटनी CSP नेहा पच्चीसिया को जबलपुर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। प्रशासनिक आदेशों के खिलाफ याचिका जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने खारिज कर दी।
समझें क्या है पूरा मामला
- कटनी CSP नेहा पच्चीसिया ने पुलिस आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- उनका आरोप था कि उनके काम का दायरा लगातार घटाया गया।
- यह विवाद ट्रांसपोर्टर के वसूली आरोपों के बाद सामने आया था।
- कटनी एसपी ने कार्रवाई करते हुए कई जिम्मेदारियां वापस ली थीं।
- हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के आदेशों में दखल नहीं दिया।
यह मामला रिट याचिका क्रमांक 32807/2026 से जुड़ा है। नेहा पच्चीसिया ने यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 में लगाई थी। याचिका में पुलिस अधीक्षक कटनी के आदेश चुनौती बने थे। इनमें 16 सितंबर 2025 और 22 जुलाई 2026 के आदेश शामिल थे।
वसूली के आरोप के बाद शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार CSP के ड्राइवर को निलंबित किया गया था। इसके साथ ही कुछ थानों की जिम्मेदारी वापस ली गई थी। इससे नेहा पच्चीसिया के काम का दायरा प्रभावित हुआ था। इसके बाद उन्होंने इन फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
नेहा ने कहा, काम का दायरा बिना ठोस कारण घटाया गया
याचिका में निष्पक्षता और समानता का मुद्दा भी उठाया गया था। नेहा ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला दिया। उनका कहना था कि कार्रवाई तर्कसंगत और समान होनी चाहिए। उन्होंने अपने पद और अनुभव के अनुसार जिम्मेदारी मांगी थी।
हाईकोर्ट से मांगी थी जिम्मेदारियां वापस देने की राहत
याचिका में उनके काम के कई उदाहरण भी रखे गए थे। इनमें गुना की महिला पुलिस पहल का जिक्र किया गया। गुना में मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू करने का उदाहरण दिया गया। मंडला में अवैध गौमांस तस्करी रोकने का भी जिक्र हुआ।
अपने पुराने कामों को आधार बनाकर रखी अपनी बात
हालांकि हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के फैसले में दखल नहीं दिया। कोर्ट ने याचिका में नेहा को राहत देने से इनकार कर दिया। इससे उनके खिलाफ जारी आदेश फिलहाल प्रभावी बने हुए हैं। विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक रूप से अपलोड होना बाकी है।
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दो पुलिस आदेश बने याचिका की मुख्य वजह
याचिका के अनुसार उनके प्रशासनिक काम का दायरा घटाया गया था। इसमें कुछ थानों से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शामिल थीं। नेहा ने इस बदलाव के पीछे ठोस कारण मांगे थे। उन्होंने इसे उनके करियर पर असर डालने वाला फैसला बताया।
अब विस्तृत आदेश से साफ होगी कोर्ट की पूरी वजह
इस मामले में एक बात फिलहाल साफ है। पुलिस विभाग के प्रशासनिक फैसले को कोर्ट ने नहीं बदला। नेहा की याचिका में मांगी गई राहत भी नहीं मिली। अब आगे की तस्वीर विस्तृत आदेश आने के बाद स्पष्ट होगी।
मामले की जरूरी जानकारी एक नजर में
याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल हुई थी। चुनौती 16 सितंबर 2025 और 22 जुलाई 2026 के आदेशों को थी। मुख्य मांग जिम्मेदारियां और पर्यवेक्षण का दायरा वापस लेने की थी। हाईकोर्ट ने इस मांग पर राहत देने से इनकार किया।
13 अगस्त को अपलोड हुआ आदेश
इस नियम में 'may' (सकते हैं) शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब यह है कि यह एसपी (पुलिस अधीक्षक) का अपना विवेक है कि वे किसे अधिकार सौंपना चाहते हैं और किसे नहीं। कोर्ट ने माना कि एसपी (पुलिस अधीक्षक) प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से काम बांटने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उनके इस फैसले में कोई कमी नहीं है। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
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