एमपी तक पहुंची लेंसकार्ट तिलक-बिंदी विवाद की आग, हिंदू संगठनों ने घेरा शोरूम
thesootr Desk | Apr 21, 2026, 16:18 IST
lenskart
लेंसकार्ट की 'स्टाइल गाइड' में तिलक, कलावा और बिंदी पर कथित रोक को लेकर भोपाल और छिंदवाड़ा में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। कंपनी ने माफी मांगी और पॉलिसी अपडेट की जानकारी दी, लेकिन संगठन माफी से संतुष्ट नहीं हैं।
5 प्वाइंट्स में समझें क्या है पूरा मामला
लेंसकार्ट कंपनी की एक 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' (In-Store Style Guide) पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस गाइड में कथित तौर पर कर्मचारियों को तिलक, कलावा और बिंदी लगाने से रोकने की बात कही गई थी। बस यहीं से बवाल शुरू हो गया।
![Lenskart Dress Code Controversy | Hijab Allowed, Bindi-Tilak Banned?]()
कई यूजर्स और हिंदू संगठनों ने कंपनी पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट के बहिष्कार की मांग उठने लगी। देखते ही देखते यह मामला (हिंदू संगठन का विरोध) भोपाल और छिंदवाड़ा तक जा पहुंचा।
राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट, रोशनपुरा चौराहे पर स्थित लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ता जमा हो गए। कार्यकर्ताओं ने शोरूम के कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाया और उनके हाथों में कलावा बांधा। मंत्र उच्चारण भी किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, "सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान।" माहौल तनावपूर्ण जरूर था, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
![Lenskart Controversy]()
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने साफ कहा कि यह हिंदुस्तान है। यहां तिलक, कलावा और बिंदी का सम्मान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कंपनी इन धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने की कोशिश करेगी, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तिवारी ने यह भी कहा कि लेंसकार्ट के सीईओ (CEO) ने भले ही माफी मांग ली हो, लेकिन संगठन इस माफी को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना था कि आगे भी किसी कंपनी में सनातन धर्म के प्रतीकों का अपमान हुआ, तो विरोध जारी रहेगा।
![शोरूम में कर्मचारियों को लगाया टीका]()
भोपाल के साथ ही छिंदवाड़ा में भी बजरंग दल के कार्यकर्ता लेंसकार्ट शोरूम पर पहुंचे। सोमवार को कार्यकर्ताओं ने शोरूम में मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाया और हाथों में कलावा बांधा। "जय श्री राम" के नारों के साथ यहां विरोध प्रदर्शन हुआ।
दिलचस्प बात यह है कि भोपाल शोरूम के कुछ कर्मचारियों ने खुद बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। एक कर्मचारी ने कहा कि नवरात्रि में वे खुद तिलक और कलावा लगाकर काम पर आए थे। कंपनी की ओर से उन्हें ऐसी कोई पाबंदी (ड्रेस कोड) नहीं बताई गई।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर जो मुहिम चल रही है, वह लोगों के अपने नजरिए से हो सकती है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई और उन्हें कोई डर नहीं है।
बढ़ते विवाद को देखते हुए लेंसकार्ट ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर सफाई दी। कंपनी ने कहा कि जो पॉलिसी ऑनलाइन वायरल हो रही थी, वह पुरानी थी और अब लागू नहीं है।
इसके अलावा उन्होंने एक्स पर अपने नए इन स्टोर स्टाइल गाइड को भी अप्लोड किया गया। लेंसकार्ट ने अपनी पोस्ट में कहा, हमने आपकी बात बिल्कुल साफ और खुले तौर पर सुनी है। पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी बात रखी है। हमने उसे सुना है। आज, हम अपने 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' को स्टैंडर्डाइज़ कर रहे हैं और इसे सार्वजनिक रूप से और पूरी पारदर्शिता के साथ शेयर कर रहे हैं।
![Capture]()
कंपनी ने लिखा कि ये गाइडलाइंस साफ तौर पर और बिना किसी दुविधा के हमारे टीम मेंबर्स द्वारा अपनाए जाने वाले आस्था और संस्कृति के हर प्रतीक का स्वागत करती हैं। जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी, और भी बहुत कुछ। इन्हें किसी अपवाद के तौर पर नहीं बल्कि हमारी पहचान के तौर पर स्वीकार किया जाता है। लेंसकार्ट को भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बनाया गया है।
कंपनी ने माफी मांगते हुए कहा कि अगर हमारे वर्कप्लेस कम्युनिकेशन के किसी भी रूप से किसी को ठेस पहुंची हो, या हमारे किसी भी टीम मेंबर को यह महसूस हुआ हो कि उनकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो हम इसके लिए दिल से माफ़ी चाहते हैं। लेंसकार्ट ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, और न ही हम कभी ऐसे बनेंगे।
कंपनी की माफी और सफाई के बाद भी हिंदू संगठनों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। संगठन का मानना है कि सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं है। उनकी मांग है कि कंपनी स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में कभी भी किसी कर्मचारी के धार्मिक अधिकार पर कोई बाधा नहीं आएगी।
यह विवाद एक बड़े सवाल को भी जन्म दे रहा है कि कॉर्पोरेट (Corporate) कंपनियों की ड्रेस पॉलिसी और कर्मचारियों के धार्मिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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- लेंसकार्ट की 'स्टाइल गाइड' में धार्मिक चिह्नों पर रोक लगाने का आरोप है।
- भोपाल के न्यू मार्केट शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति ने प्रदर्शन किया।
- छिंदवाड़ा में बजरंग दल ने कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा।
- लेंसकार्ट के सीईओ ने माफी मांगी, लेकिन संगठन माफी से संतुष्ट नहीं हैं।
- कंपनी ने कहा, पुरानी पॉलिसी हटाई जा रही है और नई गाइड जारी होगी।
क्या है लेंसकार्ट विवाद?
Lenskart Dress Code Controversy | Hijab Allowed, Bindi-Tilak Banned?
कई यूजर्स और हिंदू संगठनों ने कंपनी पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट के बहिष्कार की मांग उठने लगी। देखते ही देखते यह मामला (हिंदू संगठन का विरोध) भोपाल और छिंदवाड़ा तक जा पहुंचा।
भोपाल में कैसे हुआ विरोध
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, "सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान।" माहौल तनावपूर्ण जरूर था, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
Lenskart Controversy
संगठन का क्या कहना है?
तिवारी ने यह भी कहा कि लेंसकार्ट के सीईओ (CEO) ने भले ही माफी मांग ली हो, लेकिन संगठन इस माफी को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना था कि आगे भी किसी कंपनी में सनातन धर्म के प्रतीकों का अपमान हुआ, तो विरोध जारी रहेगा।
छिंदवाड़ा में बजरंग दल का प्रदर्शन
शोरूम में कर्मचारियों को लगाया टीका
भोपाल के साथ ही छिंदवाड़ा में भी बजरंग दल के कार्यकर्ता लेंसकार्ट शोरूम पर पहुंचे। सोमवार को कार्यकर्ताओं ने शोरूम में मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाया और हाथों में कलावा बांधा। "जय श्री राम" के नारों के साथ यहां विरोध प्रदर्शन हुआ।
कर्मचारियों ने क्या कहा?
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर जो मुहिम चल रही है, वह लोगों के अपने नजरिए से हो सकती है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई और उन्हें कोई डर नहीं है।
कंपनी ने क्या सफाई दी?
इसके अलावा उन्होंने एक्स पर अपने नए इन स्टोर स्टाइल गाइड को भी अप्लोड किया गया। लेंसकार्ट ने अपनी पोस्ट में कहा, हमने आपकी बात बिल्कुल साफ और खुले तौर पर सुनी है। पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी बात रखी है। हमने उसे सुना है। आज, हम अपने 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' को स्टैंडर्डाइज़ कर रहे हैं और इसे सार्वजनिक रूप से और पूरी पारदर्शिता के साथ शेयर कर रहे हैं।
Capture
कंपनी ने लिखा कि ये गाइडलाइंस साफ तौर पर और बिना किसी दुविधा के हमारे टीम मेंबर्स द्वारा अपनाए जाने वाले आस्था और संस्कृति के हर प्रतीक का स्वागत करती हैं। जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी, और भी बहुत कुछ। इन्हें किसी अपवाद के तौर पर नहीं बल्कि हमारी पहचान के तौर पर स्वीकार किया जाता है। लेंसकार्ट को भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बनाया गया है।
कंपनी ने मांगी माफी
क्या अभी भी बवाल जारी है?
यह विवाद एक बड़े सवाल को भी जन्म दे रहा है कि कॉर्पोरेट (Corporate) कंपनियों की ड्रेस पॉलिसी और कर्मचारियों के धार्मिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
FAQ
- लेंसकार्ट स्टाइल गाइड विवाद क्या है और यह कब शुरू हुआ?
लेंसकार्ट की एक 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें कर्मचारियों को तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद हिंदू संगठनों ने कंपनी पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया और देशभर में बहिष्कार की मांग शुरू हो गई। भोपाल और छिंदवाड़ा सहित कई शहरों में शोरूम के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। - लेंसकार्ट कंपनी ने इस विवाद पर क्या कहा?
लेंसकार्ट ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर सफाई देते हुए कहा कि वायरल हो रही पॉलिसी पुरानी थी और अब लागू नहीं है। कंपनी ने नई 'इन-स्टोर स्टाइल गाइड' एक्स पर अप्लोड करते हुए बताया कि उनके स्टोर में बिंदी, कलावा, हिजाब पर पाबंदी नहीं है। हालांकि हिंदू संगठनों ने इस माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। - क्या लेंसकार्ट कर्मचारियों को वाकई तिलक लगाने से रोका जाता था?
भोपाल शोरूम के कुछ कर्मचारियों ने खुद बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। एक कर्मचारी ने बताया कि वे नवरात्रि के दौरान भी तिलक और कलावा लगाकर काम पर आए थे और कंपनी की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हुई गाइड ने देशभर में यह धारणा बना दी कि कंपनी ऐसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाती है।
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