विधानसभा में मंत्री विजय शाह की गैरहाजिरी पर बवाल, विपक्ष ने पूछा कहां हैं... अध्यक्ष को आना पड़ा बीच में
Sourabh Bhatnagar | Jul 30, 2025, 13:35 IST
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मध्यप्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है। इस बीच सत्र के दूसरे दिन मंत्री विजय शाह अनुपस्थित रहे। इसके बाद सदन में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। क्या है पूरा मामला? चलिए जानते हैं...
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को एक बड़ी घटना घटी। मंत्री विजय शाह सत्र में अनुपस्थित रहे, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने सवाल उठाए कि मंत्री कहां हैं और क्या उन्हें बचाया जा रहा है। विपक्ष ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी मामले में मंत्री को बर्खास्त करने की मांग भी की। इस लेख में हम घटनाक्रम और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को विस्तार से देखेंगे।
मंत्री विजय शाह, जो विधानसभा में महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं, मंगलवार को सत्र में अनुपस्थित रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाह को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के लिए सदस्य चुनाव प्रस्ताव को पेश करना था। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने यह प्रस्ताव पढ़ा।
प्रस्ताव पढ़े जाने के दौरान कांग्रेस नेता सोहनलाल बाल्मीकि ने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य सदस्य भी खड़े हो गए और विरोध जताया। विपक्ष ने सवाल उठाया कि मंत्री शाह सत्र में क्यों नहीं आए और इस मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग की।
एसआईटी के सामने बेशर्म बयान पर कायम मंत्री विजय शाह, बोले- मैंने कुछ गलत नहीं कहा
विपक्ष के विरोध को बढ़ते देख अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सभी सदस्यों से शांति बनाए रखने की अपील की और कार्यवाही को बिना किसी और विघ्न के जारी रखने का आग्रह किया। अध्यक्ष का यह कदम सत्र की स्थिति को शांत रखने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
विपक्ष द्वारा मंत्री के खिलाफ की जा रही मांगों के जवाब में सत्ताधारी पक्ष ने अपने बचाव में यह सवाल उठाया कि एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाले लोग अब देशभक्ति की बात कर रहे हैं। एक सदस्य ने तो यहां तक कहा कि यह "100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली" जैसा बयान है, जिससे विपक्ष की आलोचना को कमजोर करने की कोशिश की गई।
मध्यप्रदेश विधानसभा में घटनाओं के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया। मंत्री विजय शाह की अनुपस्थिति और अन्य मंत्री द्वारा की गई विवादित टिप्पणी ने एक गंभीर राजनीतिक बहस को जन्म दिया। विपक्ष ने जवाबदेही की मांग की, और यह सवाल उठाया कि क्यों कुछ मंत्रियों को कार्रवाई से बचाया जा रहा है जबकि अन्य को कड़ी सजा मिलती है।
सभी राजनीतिक पक्षों के बीच केंद्रीय मुद्दा जवाबदेही बना। विपक्ष ने यह पूछा कि सरकार उन मंत्रियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जो असंवैधानिक या अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। इसके साथ ही, यह भी सवाल उठाया गया कि क्यों कुछ मंत्रियों को बचाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह को ऑनलाइन माफी पर कड़ी फटकार लगाई है। यह माफी ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई थी। सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले की सुनवाई की थी।
कोर्ट ने शाह की सार्वजनिक माफी को निष्ठाहीन बताया और खारिज कर दिया था। शाह ने अपने माफीनामे में जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात स्वीकार नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने शाह से आत्मचिंतन करने और अपनी गलती की सजा समझने को कहा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि शाह की सार्वजनिक माफी कहां है और कहा कि वह कोर्ट के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।
विवाद की शुरुआत 11 मई को हुई, जब विजय शाह ने इंदौर के महू में रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर पर बयान दिया। शाह ने कहा था, उन्होंने (आतंकियों) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा (पहलगाम हमले की बात करते हुए)। मोदी जी ने उनकी बहन को ही उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।
शाह ने आगे कहा था- अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा, कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी।
शाह के इस बयान ने पूरे देश में हंगामा मचाया। यह टिप्पणी राष्ट्रहित और संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी हुई थी, जिसके कारण उनकी कड़ी आलोचना की गई।
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सदन से गैरहाजिर रहे मंत्री विजय शाह
विपक्ष का विरोध
मंत्री विजय शाह से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें...
अध्यक्ष को बीच में आना पड़ा
सरकार का बचाव
राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया
जवाबदेही की मांग
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह को फटकारा
कोर्ट ने शाह की सार्वजनिक माफी को निष्ठाहीन बताया और खारिज कर दिया था। शाह ने अपने माफीनामे में जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात स्वीकार नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने शाह से आत्मचिंतन करने और अपनी गलती की सजा समझने को कहा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि शाह की सार्वजनिक माफी कहां है और कहा कि वह कोर्ट के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।
कोर्ट ने कहा- आपकी वह सार्वजनिक माफी कहां है? जांच के नाम पर क्या किया गया? इस तरह के माफ़ी का क्या मतलब है? यह आदमी हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है... कोर्ट ने आगे कहा- इससे उनके इरादे जाहिर होते हैं। इससे हमें उनकी ईमानदारी पर और शक होता है। उनका बयान दर्ज करने की क्या जरूरत है? जिन लोगों को प्रताड़ित किया गया है, उनके बयान दर्ज होने चाहिए थे।
ये है मंत्री विजय शाह का पूरा विवादास्पद बयान
शाह ने आगे कहा था- अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा, कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी।
शाह के इस बयान ने पूरे देश में हंगामा मचाया। यह टिप्पणी राष्ट्रहित और संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी हुई थी, जिसके कारण उनकी कड़ी आलोचना की गई।
टाइमलाइन से समझें विजय शाह का पूरा मामला
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