मध्यप्रदेश जनगणना के लिए 31 दिसंबर को प्रशासनिक सीमाएं होंगी फ्रीज, लापरवाही होने पर 3 साल की जेल
Aman Vaishnav | Dec 28, 2025, 10:29 IST
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31 दिसंबर से प्रदेश की प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज हो जाएंगी। इसके बाद नए जिले या तहसील नहीं बनेंगे। इसके बाद नए जिले या तहसील नहीं बनेंगे। जनगणना कार्य में रुकावट डालने या मना करने पर 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पूरी खबर को 5 पॉइंट में समझें-
- 31 दिसंबर से प्रदेश की प्रशासनिक सीमाएं पूरी तरह फ्रीज हो जाएंगी।
- कलेक्टर को जिला जनगणना का मुख्य मुखिया बनाया गया है।
- जनगणना ड्यूटी से इनकार करने पर 1 हजार रुपए जुर्माना और 3 साल जेल हो सकती है।
- कुल 13 श्रेणियों के अधिकारियों को जनगणना के विशेष दायित्व सौंपे गए हैं।
- जब तक जनगणना खत्म नहीं होती, सरकार प्रशासनिक नक्शे में बदलाव नहीं कर पाएगी।
मध्यप्रदेश में जनगणना का बिगुल
31 दिसंबर की डेडलाइन
यह जानकारी लिखित रूप में जनगणना निदेशालय भोपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गणना के दौरान डेटा में कोई गड़बड़ी न हो। बीच में सीमाएं बदलती हैं, तो जनसंख्या के आंकड़े गलत हो सकते हैं।
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किसे क्या जिम्मेदारी मिली?
- संभागीय स्तर: संभागायुक्त को संभागीय जनगणना अधिकारी बनाया गया है।
- जिला स्तर: कलेक्टर अब जिले के प्रमुख जनगणना अधिकारी होंगे।
- नगर निगम: निगम आयुक्त या प्रशासक शहर की जनगणना के मुखिया होंगे।
- तहसील स्तर: तहसीलदार को चार्ज जनगणना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
- विशेष क्षेत्र: कैंटोनमेंट बोर्ड और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग से सीईओ (CEO) तैनात किए गए हैं।
काम में लापरवाही की तो होगी जेल
यदि कोई व्यक्ति जनगणना के काम में बाधा डालता है, तो उस पर 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, दोष सिद्ध होने पर 3 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।
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क्यों जरूरी है यह जनगणना?
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मध्यप्रदेश जनगणना 2026 की मुख्य बातें
- 31 दिसंबर के बाद प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- कलेक्टर और संभागायुक्त को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया गया है।
- गड़बड़ी या काम रोकने पर कानूनी सजा का प्रावधान रखा गया है।
- शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निगम के अधिकारियों को विशेष पावर दी गई है।
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