एमपी में सड़क हादसे रोकने को सचिवालय बनाने की तैयारी, हर साल हो रहीं 15 हजार मौतें
thesootr Desk | Apr 15, 2026, 16:07 IST
road accidents
मध्यप्रदेश में हर साल बिगड़ी सड़कों के कारण 12 से 15 हजार लोगों की मौत होती है। अब इन हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने का प्रस्ताव है। मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में हर साल बिगड़ी सड़कों से 12 से 15 हजार मौतें होती हैं।
- इन हादसों की मुख्य वजह ओवरलोडिंग और अनफिट गाड़ियाँ हैं।
- हादसे रोकने को सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने का प्रस्ताव आया।
- परिवहन विभाग के इस प्रस्ताव पर मुख्य सचिव ने सहमति दी।
- सचिवालय में कई विभाग मिलकर काम करेंगे, खर्च 1.8 करोड़ रुपए मासिक होगा।
हर साल 15 हजार मौतें
अब तक हादसों की वजह दूर करने की जिम्मेदारी किसी एक विभाग की नहीं थी। कभी पुलिस किसी दूसरे विभाग पर दोष मढ़ती, तो कभी PWD (Public Works Department) दूसरों पर। एनएचएआई (National Highway Authority of India), एमपीआरडीसी (Madhya Pradesh Road Development Corporation) और राज्य पुलिस एक छत के नीचे काम नहीं करते थे। इस बिखरी हुई व्यवस्था को ठीक करने के लिए अब सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने की तैयारी हो रही है।
क्या होगा सचिवालय में
इसके अलावा दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। सड़क सुरक्षा के मामलों की समीक्षा और निगरानी भी इसी सचिवालय से होगी। विभाग मिलकर हादसों को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। यह एक बड़ा संस्थागत बदलाव होगा।
मुख्य सचिव ने दी हरी झंडी
प्रस्ताव के मुताबिक सचिवालय चलाने में हर महीने करीब 1.8 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह रकम राज्य सरकार वहन करेगी। सचिवालय का काम शुरू होते ही मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी पहली बार एकजुट होकर एक जगह आएगी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी है आधार
इस दिशा में गुजरात, राजस्थान और केरल जैसे राज्यों ने पहले से अच्छा काम किया है। मध्यप्रदेश अब इस कतार में शामिल होने जा रहा है। सड़क सुरक्षा पर मध्यप्रदेश में यह पहल काफी समय से लंबित थी।
फुल टाइम अफसर होंगे तैनात
अब शुरू होगी असली परीक्षा
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