किसानों की चमकेगी किस्मत: देश में पहली बार MP की 15 से अधिक फसलों को मिला GI टैग

Amresh Kushwaha | Jul 01, 2026, 14:15 IST
Share
MP को मिला 15 से अधिक उत्पादों का GI टैग
MP को मिला 15 से अधिक उत्पादों का GI टैग

मध्‍य प्रदेश ने देश में पहली बार एक साथ 15 से अधिक उद्यानिकी उत्पादों को GI टैग दिलाकर इतिहास बनाया है। गुना के धनिया से लेकर आलीराजपुर के नूरजहां आम तक शामिल हैं। जानिए इस उपलब्धि की पूरी डिटेल...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
  • प्रदेश की 15 से अधिक फसलों को जीआई टैग मिला है।
  • देश में पहली बार यह उपलब्धि मिली है।
  • इससे किसानों को बड़ा फायदा होगा।
  • सरकार ने 2030 तक बड़ा लक्ष्य तय किया है।
मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। राज्य को एक साथ 15 से अधिक उद्यानिकी उत्पादों के लिए GI (Geographical Indication) टैग मिला है। देश में पहली बार किसी राज्य को इतने उत्पादों की यह मान्यता मिली है। यह खबर प्रदेश के किसानों के लिए गर्व की बात है। इससे स्थानीय उत्पादों की पहचान अब देश और दुनिया में मजबूत होगी।

15 से अधिक उत्पादों को मिली नई पहचान

इस सूची में गुना का कुम्भराज धनिया शामिल है। इसके साथ नरसिंहपुर के बरमान घाट का बैंगन भी है। बैतूल का गजरिया आम और खरगोन की लाल मिर्च भी इस सूची में हैं। मांडू की खुरासानी इमली और जबलपुर की हरी मटर को भी टैग मिला है। सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और मालवा का गराड़ू भी शामिल हैं। नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा और आलीराजपुर का नूरजहां आम भी इस सूची में हैं। इसके अलावा बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान, डिंडोरी की कुटकी भी इस सूची में शामिल हैं।

और भी उत्पादों की तैयारी

सरकार ने कई और पारंपरिक उत्पादों के लिए भी प्रस्ताव भेजा है। इनमें उज्जैन की इमली और आलीराजपुर का अचारी आम शामिल हैं। मालवा का सफेद प्याज और झाबुआ का दाल पानिया भी इस लिस्ट में हैं। मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी भी शामिल हैं। इन उत्पादों को भी आगे GI टैग मिलने की उम्मीद है।

2030 तक बड़ा लक्ष्य तय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से खास अपील की है। उन्होंने परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने को कहा है। अभी प्रदेश में करीब 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में यह खेती होती है। सरकार ने इसे 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना बनाई है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ सकती है।

कुम्भराज धनिया की खास कहानी

गुना जिले का कुम्भराज धनिया देशभर में मशहूर है। यह करीब 60 साल से यहां उगाया जा रहा है। इसमें 0.4 से 0.5 प्रतिशत तक वाष्पशील तेल पाया जाता है। इसी वजह से इसकी खुशबू और गुणवत्ता खास मानी जाती है। गुना जिले से हर साल करीब 32 हजार मीट्रिक टन धनिया उगता है। यह देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा है।

बरमान का बैंगन और नर्मदा की मिट्टी

नरसिंहपुर के बरमान घाट का बैंगन भी खास पहचान रखता है। इसकी बनावट और स्वाद अलग होता है। नर्मदा किनारे की बालुई मिट्टी इसे खास बनाती है। स्थानीय जलवायु भी इसकी गुणवत्ता में मदद करती है। आसपास के बाजारों में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

बैतूल के आम और खरगोन की मिर्च

बैतूल का गजरिया आम भी अब GI टैग की सूची में है। यह इलाका ऐतिहासिक किलों और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां का आम अचार, अमचूर और जूस बनाने में भी इस्तेमाल होता है। खरगोन की लाल मिर्च भी अपनी तीक्ष्णता के लिए मशहूर है। यह मिर्च चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब तक भेजी जाती है। GI टैग मिलने से इसकी ब्रांड वैल्यू और बढ़ सकती है।

85cae2e7-f97
85cae2e7-f97


मांडू की इमली और सिवनी का सीताफल

मांडू की पहचान अब खुरासानी इमली से भी जुड़ गई है। यह बाओबाब प्रजाति का पेड़ है। माना जाता है कि यह सदियों पहले अफ्रीका से यहां लाया गया था। सिवनी जिले में 656 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती होती है। यहां के फल का वजन 600 से 700 ग्राम तक होता है। इसी वजह से इसे जंबो सीताफल भी कहा जाता है।

5550c3ba-04c
5550c3ba-04c


मालवा का आलू, गुड़ और सिंघाड़ा

मालवा क्षेत्र का आलू और गराड़ू भी लंबे समय से मशहूर हैं। सर्दियों में गराड़ू की मांग खासतौर पर बढ़ जाती है। नरसिंहपुर को मध्य प्रदेश का शुगर बाउल कहा जाता है। यहां का गुड़ अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। जबलपुर का सिंघाड़ा भी अपने पोषण गुणों की वजह से खास है। इस खेती से हजारों किसान जुड़े हुए हैं।

57cd08db-706
57cd08db-706


आलीराजपुर का विशाल नूरजहां आम

आलीराजपुर का नूरजहां आम भी इस सूची में शामिल है। इसका आकार इसे सबसे अलग बनाता है। इस आम का वजन 3 से 3.5 किलो तक हो सकता है। इसकी लंबाई करीब एक फुट तक होती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है।

बालम ककड़ी की खासियत

सैलाना के आदिवासी इलाके में उगने वाली बालम ककड़ी आम ककड़ी से बिल्कुल अलग है। भीतर से केसरिया और हरे रंग की यह ककड़ी अगस्त से सितंबर के बीच सिर्फ एक महीने मिलती है। करीब 100 हेक्टेयर में इसकी खेती होती है।

publive-image
publive-image


डिंडोरी की कुटकी को मिली पहचान

डिंडोरी की दो किस्मों, सिताही कुटकी और नागदमन कुटकी को जीआई टैग मिला है।

सिताही कुटकी एक देशी किस्म की छोटी बाजरा है। यह सिर्फ 60 दिन में तैयार हो जाती है। सूखा, कम नमी और पहाड़ी बंजर जमीन में भी यह बखूबी उगती है।

डिंडोरी में इसकी खेती 10 हजार 395 हेक्टेयर में होती है। करीब 60 हजार आदिवासी किसान इससे जुड़े हैं। डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया और बालाघाट के किसानों को सीधा फायदा होगा। नागदमन कुटकी अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इसकी पोषण मूल्य भी अधिक है।

9902f506-856
9902f506-856


बुरहानपुर का केला

बुरहानपुर अपने केले के लिए पूरे देश में जाना जाता है। प्रदेश की एकमात्र केला मंडी यहीं है। जिले में करीब 18 हजार 640 किसान केले की खेती करते हैं। यह खेती लगभग 26 हजार 120 हेक्टेयर जमीन पर होती है। हर साल 18 लाख 28 हजार मीट्रिक टन केला यहां पैदा होता है।

उत्तर भारत, कश्मीर और खाड़ी देशों में बुरहानपुर के केले की मांग है। जीआई टैग मिलने से यह मांग और बढ़ेगी। जिले में पीएमएफएमई योजना के तहत 55 से ज्यादा केला प्रोसेसिंग यूनिट भी काम कर रही हैं।

1200-675-24967729-thumbnail-16x9-banana-358700
1200-675-24967729-thumbnail-16x9-banana-358700


इन फसलों को भी जीआई टैग दिलाने की तैयारी

इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देसी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी को भी जीआई टैग दिलाने की तैयारी चल रही है। इन सभी उत्पादों के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।

कृषक कल्याण वर्ष में इसे मध्यप्रदेश के किसानों और स्थानीय उत्पादों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जीआई टैग मिलता कैसे है

बता दें कि जीआई टैग पाने के लिए हर उत्पाद को कुछ जरूरी मानकों पर खरा उतरना होता है।

  • पहली शर्त यह है कि उत्पाद किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा हो। उस क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, पानी या परंपरागत तरीकों के कारण उत्पाद में अनोखी विशेषता होनी चाहिए।
  • दूसरी शर्त है उत्पाद की ऐतिहासिक या सांस्कृतिक पहचान। उसे उस क्षेत्र से जोड़ने वाले दस्तावेज, साक्ष्य या परंपरा होनी चाहिए।
  • तीसरी जरूरत है उत्पादकों का एक संगठित समूह। कोई किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्था या सरकारी विभाग आवेदन कर सकता है।
  • चौथी शर्त है उत्पाद की गुणवत्ता के मानक तय होना। कच्चे माल से लेकर उत्पादन प्रक्रिया तक हर चीज दस्तावेज में होनी चाहिए।
  • पांचवीं जरूरत है तकनीकी रिपोर्ट। कृषि विश्वविद्यालय या वैज्ञानिक संस्था से उत्पाद के विशेष गुणों की पुष्टि करवानी होती है।
इसके बाद भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई में आवेदन होता है। परीक्षण और आपत्ति प्रक्रिया के बाद ही टैग मिलता है।

यह खबर क्यों जरूरी है...

यह खबर मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के आर्थिक भविष्य से जुड़ी है। GI टैग मिलने से स्थानीय उत्पादों की पहचान सुरक्षित होती है। इससे नकली या मिलावटी उत्पादों की बिक्री रुक सकती है। किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ती है। यह जानकारी कृषि नीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी है।

नागरिकों को अपने राज्य की सांस्कृतिक और कृषि विरासत की जानकारी मिलना जरूरी है। यह खबर पूरी तरह सरकारी और आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग के खिलाफ कोई बात नहीं कही गई है। यह जानकारी सूचना के अधिकार और पारदर्शिता के दायरे में आती है।

FAQ

  1. जीआई टैग क्या होता है और किसानों को इससे क्या फायदा मिलता है?
    जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक एक कानूनी पहचान है जो किसी उत्पाद को उसकी उत्पत्ति के आधार पर मिलती है। इससे नकली उत्पाद बेचना कानूनन अपराध हो जाता है। किसानों को बेहतर दाम, नए बाजार और निर्यात के मौके मिलते हैं।
  2. जीआई टैग पाने के लिए किसी उत्पाद में क्या खासियत होनी चाहिए?
    उत्पाद का किसी खास भौगोलिक क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु या परंपरा से अनोखा जुड़ाव होना जरूरी है। उसकी गुणवत्ता के मानक तय होने चाहिए और तकनीकी वैज्ञानिक रिपोर्ट जरूरी है। किसान संगठन या सरकारी विभाग को भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री में आवेदन करना होता है।
  3. मध्य प्रदेश को किन उत्पादों के लिए GI टैग मिला है?
    मध्य प्रदेश को गुना के कुम्भराज धनिया, नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गजरिया आम, खरगोन की लाल मिर्च समेत 15 से अधिक उत्पादों के लिए GI (Geographical Indication) टैग मिला है। इनमें सिवनी का सीताफल और आलीराजपुर का नूरजहां आम भी शामिल हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...

सिवनी जंबो सीताफल को मिला जीआई टैग, किसानों को ऐसे होगा फायदा

इंदौरी आलू से लेकर सिवनी के सीताफल तक MP की इन 9 फसलों को मिला GI टैग

12 साल का इंतजार खत्म! बुरहानपुर के केले और इंदौरी आलू को मिला जीआई टैग

MP News: सेव के बाद रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को मिला GI टैग



Tags:
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
  • MP News
  • मध्य प्रदेश
  • जीआई टैग
  • बालम ककड़ी
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा