MP के आबकारी अफसरों का खजाना: वेतन 2 करोड़, संपत्ति 150 करोड़
Sanjay Sharma | Jun 03, 2026, 15:56 IST
mp abkari officers property relatives gad portal
MP के अफसरों की बात ही अलग है। हिसाब लगाएं तो पूरी जिंदगी की सैलरी डेढ़-दो करोड़ से ज्यादा नहीं होती, लेकिन मालिक 150 करोड़ के हैं। thesootr की इस खुलासा सीरीज में आज जानेंगे आबकारी विभाग के धन कुबेरों के बारे में…
समझें क्या है मामला...
- मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग के कई अफसरों के पास वेतन से कई गुना ज्यादा संपत्ति है।
- असिस्टेंट कमिश्नर आलोक खरे के यहां लोकायुक्त के छापे में 150 करोड़ की चल-अचल संपत्ति मिली थी।
- 30 साल की नौकरी में इन अफसरों की कुल तनख्वाह ही डेढ़ से दो करोड़ रुपए के आसपास बनती है।
- इन अफसरों ने बंगले, फ्लैट, प्लॉट और कृषि भूमि के नाम पर करोड़ों की संपत्ति दिखाई है।
- ज्यादातर अफसरों का तर्क है - लोन लिया या पुश्तैनी जमीन है।
कहां से आई इतनी दौलत?
द सूत्र ने इन अफसरों की संपत्ति के ब्योरे खंगाले। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को दिए गए दस्तावेज और लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
आलोक खरे: 150 करोड़ का राज
Assistant Commissioner Alok Khare
भोपाल, इंदौर और रायसेन में बंगले, खेत और दुकानें मिलीं थी। कुल 21 से ज्यादा संपत्तियां थीं। आलोक खरे की नौकरी 1996 में लगी थी। अभी उनकी मासिक तनख्वाह करीब एक लाख 13 हजार रुपए है। इस हिसाब से 30 साल में उनकी कुल कमाई करीब दो करोड़ 50 लाख रुपए बनती है।
वहीं, दिसंबर 2024 में GAD को दिए ब्योरे में उन्होंने सिर्फ तीन संपत्तियां बताईं थी। रायसेन में 14 लाख 75 हजार की 8.4 हेक्टेयर जमीन, भोपाल के जाटखेड़ी में 65 लाख का प्लॉट और मिसरोद में 34 लाख 25 हजार का प्लॉट।
तो बाकी 18 संपत्तियां कहां गईं?
आलोक खरे की संपत्ति के बारे में विस्तार से जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें
इंदर सिंह जामोद: विरासत भी, खरीदी भी
Inder Singh Jamod
उनकी पत्नी को इंदौर की एक ट्रेजर फैंटसी सोसायटी में 35 लाख का प्लॉट विरासत में मिला था। खुद जामोद के नाम पर तीन और प्लॉट हैं। भोपाल के बरखेड़ा पठानी में 10 लाख, मिसरोद में 26 लाख और इंदौर के नरीमन सिटी में 36 लाख का प्लॉट।
सिर्फ इन आवासीय प्लॉटों की कुल कीमत एक करोड़ से ज्यादा बनती है। तनख्वाह और घर-खर्च के बाद यह बचत कैसे हुई- यह सवाल बड़ा है।
इंदर सिंह जामोद की संपत्ति के बारे में विस्तार से जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें
नीरजा श्रीवास्तव: 3 करोड़ की मालकिन
Neerja Srivastava
इंदौर के महालक्ष्मी नगर में 30 लाख का प्लॉट, भोपाल के न्यू मिनाल में 85 लाख का डुप्लेक्स और अरेरा कॉलोनी में दो करोड़ का प्लॉट उनके नाम है। इस प्लॉट पर एक मकान भी बन रहा है।
मां से मिले फ्लैट को अलग कर दें तो भी उनके पास करीब तीन करोड़ की संपत्ति है। 1990 से अब तक की कुल तनख्वाह और 3 करोड़ की बचत- यह हिसाब मेल नहीं खाता।
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प्रमोद कुमार झा: रिटायरमेंट से पहले 2 करोड़ का फ्लैट
Pramod Kumar Jha
साल 2024 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दो करोड़ 13 लाख का फ्लैट खरीदा था। इसके लिए एक करोड़ 50 लाख का होम लोन लिया था। बालाघाट में पहले से 20 लाख का एक प्लॉट है।
GAD को दिए ब्योरे में उन्होंने कोई अतिरिक्त आमदनी नहीं बताई। लेकिन हिसाब यह है- 30 साल में कुल कमाई करीब दो करोड़। उसमें एक करोड़ 50 लाख की EMI (Equated Monthly Installment), घर-खर्च, बच्चों की पढ़ाई और गाड़ी- यह सब एक साथ कैसे?
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सबका तर्क: लोन और पुश्तैनी
लेकिन जब तनख्वाह, घर-खर्च, बच्चों की फीस, गाड़ी, बीमा और लोन की EMI एक साथ जोड़ते हैं- तो बचत के लिए जगह बहुत कम बचती है। इतनी बड़ी संपत्ति बनाना आसान नहीं होता।
लोकायुक्त और GAD के बीच का फर्क
यह सवाल सिर्फ आलोक खरे का नहीं है। बाकी अफसरों की संपत्ति की भी पूरी जांच जरूरी है।
आबकारी विभाग में यह क्यों ज्यादा?
जब तक कड़ी जांच और कार्रवाई नहीं होगी तब तक वेतन और संपत्ति के बीच का यह फर्क बना रहेगा।
जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
जब किसी अधिकारी की संपत्ति उसकी ज्ञात आय से कई गुना ज्यादा हो, तो यह खुद में संदेह का कारण बनता है। जांच एजेंसियों को हर ऐसे मामले में आय के स्रोत की पड़ताल करनी चाहिए। - न्यायमूर्ति पी. के. जायसवाल, पूर्व उप-लोकायुक्त (या वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ, भ्रष्टाचार रोधी मामलों के जानकार) नियामक विभागों में भ्रष्टाचार का जोखिम सबसे ज्यादा होता है, जहां लाइसेंस और परमिट देने का अधिकार अफसरों के पास होता है। आबकारी विभाग इसी श्रेणी में आता है। - ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया, वार्षिक रिपोर्ट
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FAQ
- लोकायुक्त छापे में आलोक खरे के पास कितनी संपत्ति मिली थी?
2019 में लोकायुक्त के छापे में आलोक खरे के पास 150 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति मिली थी। इसमें 21 से ज्यादा बंगले, खेत और प्लॉट शामिल थे। वे मध्य प्रदेश आबकारी विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर हैं। - GAD क्या होता है और इसमें संपत्ति क्यों बतानी होती है?
GAD यानी General Administration Department- सामान्य प्रशासन विभाग। सरकारी नियमों के तहत हर अधिकारी को GAD को अपनी संपत्ति का सालाना ब्योरा देना होता है। यह पारदर्शिता के लिए जरूरी है। - GAD पोर्टल क्या होता है और अफसरों की संपत्ति वहां क्यों दर्ज होती है?
GAD यानी General Administration Department का पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार का वह प्लेटफॉर्म है जहां सरकारी अधिकारी अपनी चल-अचल संपत्ति की सालाना घोषणा करते हैं। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने का सरकारी तंत्र है। इसी डेटा के आधार पर thesootr ने यह पड़ताल की है।
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